जिले के 1500 स्थानों हुआ होलिका दहन, खूब उड़े अबीर-गुलाल

HIGHLIGHTS

  • जिले के 1500 स्थानों हुआ होलिका दहन, खूब उड़े अबीर-गुलाल
  • होलिका दहन के दौरान लोगों ने होली के खूब गीत गाए और डांस किया।

सोनभद्र। होली का पर्व जिले भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। गुरुवार को शुभ मुहूर्त में रात 11:00  बजे के बीच जिले में करीब 1500 स्थानों पर होलिका दहन किया गया। सुबह से ही लोग होली की मस्ती में डूब गए थे। आज दुल्हेंडी यानि रंग खेला जाएगा। इसके लिए लोगों की तैयारी पूरी हैं। होलिका दहन के दौरान लोगों ने होली के खूब गीत गाए और डांस किया।

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नगर से लेकर देहात क्षेत्रों तक में जगह-जगह होली रखी गई है तो महिलाओं ने सुबह से पूजा अर्चना शुरू कर दी थी। जिले में होलिका दहन के समय पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा। पुलिस ने होलिका दहन के स्थानों पर गश्त किया। होलिका दहन को लेकर सुबह से लोगों में उत्साह देखने को मिला।

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नए वस्त्र धारण कर लोगों ने होली का विधि-विधान से पूजन किया। सुबह से ही लोग एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं देने में लगे गए थे। लोगों ने होली को खूब सजाया, फिर पूजन शहर से लेकर देहात तक बच्चे और बड़ों ने अपने-अपने मोहल्ले में होली रखी। लकड़ी और उपलों की रखी होली का दिन में पूड़ी-पकवान आदि से पूजन किया। पूजन करने के बाद घर के बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। लोगों द्वारा होली को फूलों से सजाया भी गया।

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जिले के राबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र में 193, शाहगंज में 69, पन्नूगंज में 145, करमा में 84, घोरावल में 201, रायपुर में 79, मांची में 38, रामपुर बरकोनिया में 44 और ओबरा में 34 स्थानों पर होलिका दहन होगा। इसी तरह चोपन में 70, कोन में 56, हाथीनाला में 17, जुगैल में 45, दुद्धी में 50, म्योरपुर में 51, विंढमगंज में 49, बभनी में 65, बीजपुर में 63, पिपरी में 51, अनपरा में 55 और शक्तिनगर थाना क्षेत्र में 41 स्थानों पर होलिका दहन हुआ। वहीं अनपरा अनपरा परिक्षेत्र में गुरुवार को 55 जगहों पर होलिका दहन किया गया।

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खूब बिके जौ, होली की अग्नि में भूनू

होली जलने की परंपरा के साथ ही उसकी आग से जौ भूनने की प्राचीन परंपरा के निर्वहन के लिए नगर से लेकर देहात क्षेत्रों तक मे जौ की बालियों की खूब बिक्री हुई। तमाम ग्रामीण पहले से जौ की बालियों की गुच्छियां बनाकर लाए थे, जो दस से 30 रुपये तक में बिकी। होली की परंपरा में जौ का विशेष महत्व है। इसे फसल पकने का संकेत भी माना जाता है।

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जौ की बालियों को होली की आग में भूनने के बाद इसके दाने निकालकर लोग एक दूसरे को देते हैं। इसके साथ ही राम-राम की परंपरा भी है। होली की आग ठंडी होने के बाद ही जौ की बाल में सुनहरा पन छाने लगता है और लोग फसलों को काटना शुरू कर देते हैं।

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होलिका दहन के बाद क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। होली दहन के साथ खूब जयकारे लगे। महिलाओं ने होली के चारों और गीतों पर नृत्य किया।  होलिका दहन के दौरान दुल्हेंडी पर्व शुरू हो गया जो शुक्रवार शाम तक रहा। लोगों ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं।

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