रासलीला के आठवें दिन हुआ सुदामा चरित्र का मंचन

HIGHLIGHTS

  • रासलीला के आठवें दिन हुआ सुदामा चरित्र का मंचन
  • वृंदावन के कलाकारों ने सुदामा चरित्र का किया मार्मिक मंचन 
  • श्री कृष्ण रासलीला में सुदामा चरित्र का मंचन देख भक्त हुए मंत्रमुग्ध
  • द्वारकाधीश की हुई दिव्य आरती

सोनभद्र। रासलीला समिति रॉबर्ट्सगंज द्वारा नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय रासलीला के आठवें दिन कलाकारों ने महारास के साथ भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का नृत्य के माध्यम से बड़ा ही मार्मिक मंचन किया गया।
वृंदावन के कलाकारों द्वारा  लीला के अंतर्गत बाल्यकाल में सुदामा जी उज्जैन नगरी स्थित शांति वन गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के लिए जा रहे थे। रास्ते में उनके पैर में कांटा गड़ गया।

Advertisement

इस पर वे दर्द से चीखने चिल्लाने लगे। उसी रास्ते से होकर भगवान श्रीकृष्ण भी गुरुकुल शिक्षा ग्रहण करने जा रहे थे। सुदामा को मुसीबत में देख उन्होंने उनके पांव से कांटा निकाला और जड़ी बूटी लगाई। इस घटना के बाद दोनों मित्र बन गए। गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान सुदामा अपना पाठ भूल गए। गुरु द्वारा पूछे जाने के बाद उन्होंने पाठ नहीं सुनाया।

Advertisement

इस पर गुरु ने उन्हें जंगल जाकर लकड़ी लाने को कहा। मित्र को मुसीबत में देख भगवान भी अपने याद किए पाठ को भूलने का नाटक कर बैठे। इस पर क्रोधित गुरु ने उन्हें भी सुदामा के साथ जंगल से लकड़ी लाने का आदेश दिया। भूख लगने पर खाने के लिए सुदामा को दो मुट्ठी चने दिए। जंगल में कृष्ण लकड़ियां लाने चले गए।

Advertisement

उसी समय सुदामा को भूख लगी और उन्होंने पूरा चना खा लिया। लकड़ी लेकर लौटे कृष्ण ने भूख लगने पर सुदामा से चने मांगे तो सुदामा ने सच सच बता दिया। इस पर भगवान ने उन्हें श्राप दिया कि ‘हक पराया खाय के, यही मिलेगी सीख, हो दरिद्री आज से, दर दर मांगे भीख।’ पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रीकृष्ण मथुरा के राजा बन गए और सुदामा भिखारी। फिर एक समय आया कि सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। देने के लिए कुछ नहीं था तो वे अपने साथ कच्चा चावल ले गए। सुदामा को देख श्रीकृष्ण अति प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा के लाए चावल खाने शुरू किए। एक मुट्ठी खाकर एक तथा दूसरी मुट्ठी चावल खाकर जब उन्होंने सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।

Advertisement

फिर एक समय आया कि सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे। देने के लिए कुछ नहीं था तो वे अपने साथ कच्चा चावल ले गए। सुदामा को देख श्रीकृष्ण अति प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा के लाए चावल खाने शुरू किए। एक मुट्ठी खाकर एक तथा दूसरी मुट्ठी चावल खाकर जब उन्होंने सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया। जब वे तीसरी मुट्ठी चावल खाने लगे तो वहां खड़ी रुक्मिणी ने उन्हें रोककर कहा कि तीनों लोक सुदामा को दे देंगे तो स्वयं कहां रहेंगे प्रभु। इस पर श्रीकृष्ण ने अपने हाथ रोक लिए और सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।
आठवें दिन के रासलीला का समापन द्वारकाधीश की दिव्य आरती के साथ हुई।
इस अवसर पर समति के जितेन्द्र सिंह, रामप्रसाद यादव, कृष्णमुरारी, पवन जैन, अशोक श्रीवास्तव, प्रमोद गुप्ता, राकेश गुप्ता, सचिन गुप्ता, धीरज जालान, सत्येन्द्र पांडे, संदीप चौरसिया, डॉ. अशोक, डॉ. चन्द्रभूषण देव, उमेश केशरी, मनीष सोनकर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

Advertisement

जब वे तीसरी मुट्ठी चावल खाने लगे तो वहां खड़ी रुक्मिणी ने उन्हें रोककर कहा कि तीनों लोक सुदामा को दे देंगे तो स्वयं कहां रहेंगे प्रभु। इस पर श्रीकृष्ण ने अपने हाथ रोक लिए और सुदामा को दो लोक का मालिक बना दिया।
आठवें दिन के रासलीला का समापन द्वारकाधीश की दिव्य आरती के साथ हुई।

Advertisement

इस अवसर पर समति के जितेन्द्र सिंह, रामप्रसाद यादव, कृष्णमुरारी, पवन जैन, अशोक श्रीवास्तव, प्रमोद गुप्ता, राकेश गुप्ता, सचिन गुप्ता, धीरज जालान, सत्येन्द्र पांडे, संदीप चौरसिया, डॉ. अशोक, डॉ. चन्द्रभूषण देव, उमेश केशरी, मनीष सोनकर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Shree digital desk
Advertisement
Advertisement
Advertisement (विज्ञापन)






Advertisement

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

Sanskriti Live is a news website. Where you can read news related to religion, literature, art, culture, environment, economic, social, business, technology, crime, agriculture etc. Our aim is to provide you with correct and accurate information. This news website is operated by Sanskriti Live News Network (OPC) Pvt. Ltd. If you want to join us, you can contact us on 7007390035 or info@sanskritilive.in.

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें