HIGHLIGHTS
- उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य ने सर्किट हाउस में बैठक की। उन्होंने कई मामलों को मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि पुलिस आयोग की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करती।
रमेश देव पाण्डेय (जिला संवाददाता)
वाराणसी: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य नीलम प्रभात ने पुलिस पर खानापूर्ति करने का आरोप लगाया। गुरुवार को सर्किट हाउस में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि महिला आयोग की तमाम शिकायतों के बावजूद वाराणसी पुलिस सिर्फ खानापूर्ति करते हुए निस्तारित कर दे रही है।

उन्होंने तमाम मामलों में पीड़िता की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही थी। बावजूद इसके गुरुवार को उनकी तीसरी जनसुनवाई में भी वहीं फरियादी अपनी गुहार लगा रहे हैं कि पुलिस उनका मामला नहीं दर्ज कर रही है।

उन्होंने जंसा थाने में पीड़िता पूजा के मामले का हवाला देते हुए कहा कि तीन बार कहने के बावजूद जंसा पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। मामले में उच्चाधिकारी जांच कर रहे हैं, कह कर टाल दिया। पूजा का थाने में मामला दर्ज नहीं किया गया। काफी थानों से रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हैं। सभी मामलों में बार-बार फरियाद होती है।
उन्होंने बताया, एकता श्रीवास्तव की ओर से शिकायत की गई थी उनके पति पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक पद पर हैं। चार वर्षीय पुत्री सहित मारपीट कर घर से निकालने और दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
किरण सोसायटी के लोगों से जुड़े प्रीति सिंह के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संध्या पांडेय ने दिव्यांग पति के संबंध में शिकायत की। इसमें अब तक कुछ नहीं किया गया। निस्तारण के कालम में जो आख्या लगाई जा रही है उसमें संतुष्टि नहीं है। उन्होंने बताया कि सर्किट हाउस में हुई जनसुनवाई में कुल 25 मामले आए जिसमें 17 से अधिक मामलों पर सुनवाई की गई है।
जनसुनवाई के दौरान ट्रांसजेंडर सलमा ने हंगामा किया। एक महिला को लेकर वे जनसुनवाई में पहुंचीं और उस पर हो रहे अत्याचार को लेकर हंगामा किया। जिस महिला को लेकर सलमा ने हंगामा किया वह शिकायती पत्र लाने की बात कहकर चली गई।

महिला आयोग की सदस्य और सीपी से मिले भाजपा विधि प्रकोष्ठ के नेता
महाकुंभ प्रयागराज त्रिवेणी संगम स्नान कर रही माता-बहनों-बेटियों की वीडियो और फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने के विभिन्न मामलों को देखते हुए भाजपा विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र की ओर से एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्य महिला आयोग की सदस्य व पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की। विधि प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने इसे साइबर अपराध के साथ-साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत भी गंभीर अपराध बताया।





