New Income Tax Bill 2025: नए इनकम टैक्स बिल में क्या है खास, 10 प्वाइंट में समझिए पूरी बात

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में नया इनकम टैक्स बिल पेश कर दिया है। 622 पेज का ये बिल राष्‍ट्रपति की मंजूरी के बाद 6 दशक पुराने इनकम टैक्‍स एक्‍ट 1961 की जगह लेगा। इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है। नए बिल का मुख्य लक्ष्य टैक्स प्रावधानों को आम लोगों की समझ के लिए आसान बनाना है

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नया आयकर बिल पेश कर दिया है। इसका मकसद मौजूदा आयकर कानून की जटिलताओं को दूर करना और उसे करदाताओं के लिए आसान बनाना है। यह बिल लोकसभा में पास भी हो गया है। आइए 10 प्वाइंट में जानते हैं कि इस आयकर बिल में क्या खास है और इससे टैक्सपेयर्स को क्या लाभ होगा।

नया इनकम टैक्स बिल क्यों बना?
नए इनकम टैक्स बिल का मकसद कानून को सरल और स्पष्ट बनाना है। इस नए बिल से लगभग 3 लाख शब्द कम किए गए हैं। इससे कानून अधिक सुगम और समझने में आसान होगा। साथ ही, बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने और टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
880 की जगह 622 पन्ने
नए इनकम टैक्स बिल को पहले आयकर कानून 1961 की जगह पेश किया गया है। पुराने कानू में कुल 880 पन्‍नों थे। नए कानून में 622 पन्‍ने रखे गए हैं। इसमें ज्‍यादातर सबसेक्‍शन खत्‍म कर दिए गए हैं। नए कानून को इनकम टैक्स एक्ट, 2025 कहा जाएगा।
पुराने और गैरजरूरी प्रावधान हटाए गए

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पुराने और गैरजरूरी प्रावधान हटा दिए गए हैं। इससे कानून अधिक प्रासंगिक हो गया है। मुकदमेबाजी कम करने और टैक्स मामलों को जल्दी सुलझाने पर ध्यान दिया गया है। इसे आम नागरिकों के समझने लायक बनाया गया है।
आसान और स्पष्ट भाषा
पुराने कानून में इस्तेमाल किए गए जटिल शब्दों को सरल बना दिया गया है। जैसे ‘नॉटविथस्टैंडिंग’ (Notwithstanding) को ‘इरिस्पेक्टिव ऑफ एनीथिंग’ (Irrespective of anything) में बदला गया है। इससे आम लोगों के लिए कानून पढ़ना और समझना आसान

अब ‘असेसमेंट ईयर’ (Assessment Year) की जगह ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year) होगा। टैक्स ईयर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक रहेगा वित्त वर्ष की तरह। अगर कोई व्यवसाय बीच में शुरू होता है, तो उसका टैक्स ईयर उसी वित्त वर्ष में खत्म होगा।
डिजिटल एसेट्स पर टैक्स

अब क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल एसेट्स को ‘कैपिटल एसेट’ माना जाएगा और उन पर टैक्स लगाया जाएगा। इससे डिजिटल संपत्तियों पर टैक्स सिस्टम के बारे में अधिक स्पष्टता आएगी।
TDS और टैक्सेशन आसान
TDS और प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation) को टेबल फॉर्मेट में पेश किया गया है। इससे टैक्सपेयर्स को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें कितना टैक्स देना है।
विवादों के समाधान के लिए DRP (Dispute Resolution Panel)
अब टैक्स विवादों को जल्दी निपटाने के लिए DRP के फैसले को स्पष्ट रूप से पेश किया जाएगा। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी।

पुराने टैक्स रिजीम का क्या होगा?
सरकार नए टैक्स रिजीम को बढ़ावा दे रही है, लेकिन ओल्ड टैक्स रिजीम भी जारी रहेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही कह चुकी हैं कि अभी सरकार का पुरानी टैक्स व्यवस्था को खत्म करने का कोई इरादा नहीं है।
लंबित टैक्स असेसमेंट खत्म होंगे
सरकार नए इनकम टैक्स बिल के तहत लंबित टैक्स असेसमेंट को खत्म नहीं करेगी। उनका निपटारा पुरानी व्यवस्था के हिसाब से ही किया जाएगा।
टैक्स विवाद और मुकदमेबाजी कम होगी
नए कानून में कई सारे नियम आसान कर दिए गए हैं। इससे मुकदमेबाजी कम होगी, जिससे टैक्स विवाद जल्दी सुलझेंगे। इससे आम जनता के साथ सरकार को भी फायदा होगा।
नया बिल कानून कब बनेगा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया है, जहां से यह पास भी हो गया है। अब इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा। समिति की सिफारिशों के बाद इसे संसद में फिर से पेश किया जाएगा। संसद से मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद यह नया इनकम टैक्स कानून लागू हो जाएगा।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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