बसंत पंचमी मेला और स्वाधीनता आंदोलन

HIGHLIGHTS

  • गौरी शंकर मंदिर से असहयोग आंदोलन हुआ था शुभारंभ।
  • पंडित महादेव प्रसाद चौबे की अध्यक्षता में हुई थी विशाल जनसभा।
  • क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी ने दिया था। ओजस्वी भाषण

सोनभद्र। सोनभद्र जनपद के नाम- अनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा देश के स्वतंत्रता आंदोलन में तन- मन- धन न्योछावर करने वाले सेनानियों पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है।
विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“सन 1918 में मिर्जापुर तहसील सहित चुनार, रॉबर्ट्सगंज, दुद्धी में कांग्रेस कमेटी का गठन हो चुका था और इसके माध्यम से सोनभद्र जैसे दुरुह आदिवासी अंचलो में स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाने के लिए कांग्रेसी नेता तत्पर थे।

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सन 1921 में कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद मिर्जापुर जनपद के कांग्रेसी नेता हनुमान प्रसाद पांडे, डॉ उपेंद्र नाथ बनर्जी, मास्टर गंगा प्रसाद, पंडित शालिग्राम पांडे,परमानंद पंजाबी, सरस्वती देवी, महादेव शरण आदि नेताओं ने सोनभद्र जनपद के रॉबर्ट्सगंज एवं दुद्धी तहसील का दौरा किया और असहयोग आंदोलन के की नीतियों और उद्देश्यों का प्रचार किया, इससे सोनभद्र जनपद की जनता बहुत ही प्रभावित हुई थी।

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रॉबर्ट्सगंज नगर सहित आसपास के गांवो में असहयोग आंदोलन के प्रचार- प्रसार हेतु ग्राम मुठेर के पंडित तारक नाथ त्रिपाठी द्वारा अन्य नौजवान साथियों के सहयोग से आम जनमानस को असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों से अवगत कराया और कांग्रेस कमेटी का सदस्य, स्वयंसेवक बनाया।
वर्तमान जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में असहयोग आंदोलन की नीतियों के प्रचार के लिए सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी कांग्रेसी नेता बलराम दास केसरवानी की अध्यक्षता में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें दुद्धी, रॉबर्ट्सगंज, मिर्जापुर के क्षदेशभक्तों, क्रांतिकारियों ने भाग लिया था।

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इसके साथ ही साथ स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयंसेवकों, नेताओं द्वारा छोटी-छोटी सभाओं के माध्यम से देशभक्ति का पाठ पढ़ाया गया।
असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम अंतर्गत सोनभद्र जनपद के देशभक्तों, क्रांतिकारियों द्वारा ग्राम परासी में एक संस्कृत राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना किया गया। इस पाठशाला के प्रथम प्रधानाध्यापक सेनानी पंडित महादेव प्रसाद चौबे बनाए गए।
आंदोलन के प्रचार- प्रसार के लिए 12 फरवरी 1921, शनिवार (बसंत पंचमी) का दिन निश्चित किया गया।सोनभद्र जनपद के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में इस महान,ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित महादेव प्रसाद चौबे की अध्यक्षता में जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज से 7 किलोमीटर दूर पर बरहरदा गांव के गौरी शंकर मंदिर पर आयोजित बसंत पंचमी के मेला मे  पंडित महादेव प्रसाद चौबे,

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बलराम दास केसरवानी, केसरी प्रसाद द्विवेदी मिर्जापुर जनपद से अतिथि के रुप में पधारे सक्रिय, उत्साही, नेता गंगा प्रसाद जायसवाल, कृष्ण द्विवेदी ने ओजस्वी भाषण देते हुए विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, नशा उन्मूलन, सरकारी उपाधियों और अवैधानिक पदों का त्याग, सरकारी एवं गैर सरकारी उत्सव का बहिष्कार, सरकारी स्कूलों से बच्चों को हटाना, राष्ट्रीय स्कूलों की स्थापना, अंग्रेजी अदालतों का बहिष्कार, झगड़ों का राष्ट्रीय पंचायत द्वारा निर्णय, सरकारी कर न देना, अपने गांव घर के लोगों को मजदूर के रुप में मेसोपोटामिया न भेजना, सरकार द्वारा आयोजित चुनाव का बहिष्कार आदि का संदेश दिया।

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आंदोलनकारियों ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर रॉबर्ट्सगंज तहसील में असहयोग आंदोलन का शुभारंभ किया और पंपलेट भी वितरित किया गया था। असहयोग आंदोलन का शंखनाद दुद्धी तहसील में मिर्जापुर के कांग्रेसी नेता बाबू पुरुषोत्तम सिंह, बेनी माधव पांडे सहित अन्य उत्साही नेताओं ने अपार कष्ट झेलते हुए दुद्धी के सेनानी यीशु मसीह, सदानंद पांडे, सुखन अली, सखावत हुसैन, सुखलाल खरवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन का शुभारंभ किया और आंदोलन की नीतियों का आम जनता में प्रचार किया

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और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार लगान बंदी, नशाबंदी आदि कार्यक्रम को पूरा किया गया। इस जुर्म में सेनानियों को पुलिस द्वारा घोर कष्ट दिया गया और जेल में बंद कर उन पर जुर्माना लगाया गया।

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आजादी के बाद गौरी शंकर मंदिर पर हर वर्ष बसंत पंचमी को विशाल मेला लगता है और इस मेले में आसपास गांव के लोग मेले का आनंद लेने के लिए यहां पर जुटते हैं, आज भी इस क्षेत्र के बुजुर्गों को महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन जिसकी शुरुआत जनपद सोनभद्र में गौरी शंकर के मेले से हुई थी इस ऐतिहासिक घटना को नई पीढ़ी को सुनाते है।

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