HIGHLIGHTS
- समाज में आर्थिक से ज्यादा सामाजिक समानता की जरूरत
संतोष दयाल
म्योरपुर, सोनभद्र। स्थानीय ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम में आयोजित चार दिवसीय युवा शिविर के तीसरे दिन संविधान की उद्देशिका,जैविक खेती, हमारा गांव और उसकी व्यवस्था, स्वास्थ्य के घरेलू नुक्से आदि विषयों पर चर्चा की साहित्यकार और गांधीविचारक ,संतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि हमें जो कुछ भी मिला है वह संविधान के प्रावधानों के अनुरूप ही मिला है

बल्कि ये कहा जा सकता है कि जो जितना मिलना चाहिए उसका एक अंश ही मिला है पूरा नहीं । इसलिए देने का दावा करने वाले भूलें नहीं कि उन्हें यह अवसर भी जनता ने दिया है ।

देना सरकारों का कर्तव्य और पाना जनता का अधिकार है । संविधान को भूलने की वजह से जनता सरकारों के समक्ष नितांत असहाय और निरूपाय दिखाई पड़ती है । यदि वह संविधान को याद रखती तो भेड़ नहीं बाघ होती । उन्होंने कहा की संविधान हमको प्रतिरोध की शक्ति और आत्म बल प्रदान करता है ।

हम संविधान की उद्देशिका को निरंतर पढ़ें उसे आत्मसात करें और अपने स्वजनों के बीच प्रचारित कर उन्हें भी भेड़ चाल से बाहर निकलाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में में अपनी भूमिका का निर्वाह करें । संविधान की आत्मा को समझे स्वीकारे और लागू किए बिना सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय दूर की कौड़ी बने रहेंगे ।

उन्होंने सत्य और झूठ की व्याख्या भी बड़े सरल ढंग से की। स्वास्थ्य की चर्चा करते हुए डॉ विभा प्रेम ने कहा कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए घरेलू नुक्से बहुत लाभकारी है।आज कल सर्दी में दर्द ,जुकाम , खाँसी हो तो गुन गुना पानी का सेवन करे।उन्होंने ,तिल,हल्दी, तीसी , आदि के गुणकारी नुक्से की भी जानकारी दी।

जैविक खेती विशेषज्ञ शिव शरण सिंह ने प्राकृतिक खेती और उससे जुड़े नई जानकारियां दी साथ ही मोटे अनाज , खेती में लगने वाले कीट की रोक के लिए अहम जानकारियां दी और फल अनाज दूध ,अंडा मांस मछली में मिलने वाले किलोकैलरी ऊर्जा की रोचक जानकारी दी।

देवनाथ भाई ने जमीन नापने की जानकारी दी। युवाओं ने श्रम के प्रति आस्था जागृत करने के लिए एक घंटे श्रमदान किया। संचालन की भूमिका राकेश और प्रदीप पांडेय ने निभाई।





















