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- म्योरपुर अखिल भारतीय अटल काव्य संध्या में झूमे श्रोता
संतोष दयाल
म्योरपुर, सोनभद्र। स्थानीय कस्बे म्योरपुर में विगत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न राधे अटल बिहारी वाजपेई की सौवीं जयंती के शुभ अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं व्यापार मंच के तत्वाधान में “अखिल भारतीय अटल काव्य निशा” का सफल आयोजन बिड़ला विद्या मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज म्योरपुर में संपन्न हुआ, जिसमें देश के नामचीन कवियों ने काव्य पाठ किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जीत सिंह खरवार ( प्रदेश उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग उत्तर प्रदेश ) ने माँ सरस्वती के प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर व श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई के प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया।
कवि सम्मेलन के अध्यक्षता की जिम्मेवारी जौनपुर से चलकर आए वरिष्ठ वरिष्ठ व्यंग्यकार व कवि सभाजीत प्रखर को दी गई जबकि संचालन की दायित्व देश के सुप्रसिद्ध संचालक वह ओज के अंतरराष्ट्रीय कवि कमलेश राजहंस को दिया गया।

कवि सम्मेलन की शुरुआत क़ौमी यकज़हती की अनूठी मिसाल पेश करते हुए देश के सुमधुर शायर निडर जौनपुरी साहब के सरस्वती वंदना से हुआ तत्पश्चात पहले कवि के रूप मैं पड़री म्योरपुर के युवा कवि ने यथार्थ विष्णु ने जोरदार अंदाज में एल्यूमीनियम कोयला बिजली गिट्टी से हम आते हैं , पर्वत घाटी जंगल झोपड़पट्टी से हम आते हैं जहाँ रेणुका सोन की बाहों में आलिंगन करती है, उस सोनभद्र की सौंधी सौंधी मिट्टी से से हम आते हैं, पढ़ा।

इसके बाद प्रयागराज से चलकर हास्य रस के धुरंधर कवि बिहारी लाल अंबर ने अपने कविताओं से लोगों को गुदगुदाया जहां रेणुका सोन की बाहों में आलिंगन करती है, उस सोनभद्र की सौंधी सौंधी मिट्टी से हम आते है कवि और शिक्षक यथारसिंधी से आए उभरते हास्य कवि कामता माखन ने अपनी विशेष शैली में श्रोताओं को पेट के बल हंसने को मजबूर करते हुए डाक्टर की रिपोर्ट आई मै बाप बन नहीं सकता फिर सोचता हूं घर में दो बच्चे किसके है।

रायगढ़ छत्तीस गढ़ से आई प्रेम रस की कवयित्री प्रियंका प्रिया ने रात से कहना कि भोर ना करे,पायलों से कहना कि शोर ना करे रचना सुनाई, छत्तीसगढ़ से आए वीर रस के चर्चित कवि देवेंद्र परिहार ने सीमा के प्रहरियों पर जान न्योछावर करने वाले जवानों के रचना पढ़ते हुए कहा मुल्क के वास्ते वफादारी करते है।

मुल्क के वास्ते हर पल जिया करते है प्रेम और श्रृंगार रस के कवि लल्लू तिवारी ने ये रचना पढ़ी “प्यार पाने में वक्त लगता है।घर बनाने में वक्त लगता है। निडर जौनपुरी ने आज के मानवीय मूल्यों के गिरते स्तर को रेखांकित करते हुए ये रचना पढ़ी” ना किसी के बद दुआ से ना किसी के श्राप से, आदमी खुद गिर रहा है खुद के नजरों से अपने आप से, ग़ज़ल के बादशाह प्राचार्य डॉ अजय विक्रम सिंह ने दिलो में प्यार रख जिंदा यही बचता है गजल प्रस्तुत की।

क्षेत्रीय भाषा के लोककवि डॉ लखन राम जंगली ने पहरी के पश्चिम ओरी ,बांस के बखारी तरी..प्रेम गीत से श्रोताओं ने खूब पसंद किया सभाजीत द्विवेदी, डाँ दिनेश कपूर जैसे दिग्गज रचनाकारों और हास्य कवि बिहारी लाल अम्बर आदि ने दर्शकों को खूब हँसाया,। अंत में वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यनारायण यादव ने सभी कवियों का आभार व्यक्त किया।

इसके पूर्व एस सी /एस टी आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, संजय धुर्वे, दीपक सिंह,प्रेमचंद यादव,हरि सिंह, सुजीत अग्रहरी, रंजीत जायसवाल, दयाशंकर विश्वकर्मा, सोना बच्चा अग्रहरी, सहदेव तिवारी, मोहर लाल खरवार,हरि सिंह,राम विचार गौतम, अजय कुमार सोनू, राजपति विश्वकर्मा, कुलदीप सिंह,आशीष अग्रहरि, जगत नारायण इत्यादि समेत सैकड़ों श्रोता उपस्थित रहे ।




















