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- डॉ. भागीरथी मौर्य सोन नदी को बचाने का उठाया बीड़ा
सोनभद्र। जनपद की लाइफ़ लाईन कहे जाने वाले सोन नदी की त्रासदी से मर्माहत समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी डॉक्टर भागीरथी सिंह मौर्य ने उठाया बीड़ा। ज़ख्मी सोन नद को खनन माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए भागीरथी सिंह मौर्य ने हुंकार भरी।

किसी भी कीमत पर सोन नदी के अस्तित्व को बचाने का लिया संकल्प। सोन नदी की जलधारा को बांधकर भारी भरकम पोकलेन माशीनों से नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। नदी की जलधारा को मोड़ दिया गया है। जलधारा को रोकने के लिए हियुम पाइप लगाकर मिट्टी और बोल्डर डालकर स्थायी पुल बनाया गया।

रश्मित मल्होत्रा की बालू साइडों पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन किया जा रहा है। एनजीटी की टीम जब जांच में पहुंची तो इनकी साइडों से सेक्शन मशीनों, नावों और पोकलेन मशीनों को हटा दिया गया था। जबतक एनजीटी की टीम जनपद में रही उतने दिन खनन बंद रहा।

फिर इसके बाद अवैध खनन बेधड़क शुरू हो गया। यही नहीं अवैध खनन को लेकर पहले भी रश्मित मल्होत्रा की कम्पनियों को नोटिस जारी किया गया था। वहीं जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद भी खनन कम्पनियां अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रही हैं। इसके लिए लगातार समाजसेवी एवं नेता शिकायतें करते रहते हैं।

अवैध खनन लगातार समाचार की सुर्खियां बनती रहती है। इसके बाद भी न्यू इंडिया मिनरल्स जैसी कम्पनियां बेलगाम अवैध खनन करने में मशगूल हैं। इससे व्यथित होकर समाजसेवी एवं पर्यावरणविद डॉक्टर भागीरथी सिंह मौर्य ने सीएम योगी के जनता दरबार में जाकर शिकायत करने की बात कही।

सोन नदी के मूल स्वरूप को बचाने के लिए डॉक्टर भागीरथी सिंह ज़िम्मेदार अधिकारियों से लगातार शिकायतें कर रहे हैं। यही नहीं एनजीटी में भी उन्होंने लिखित शिकायत की है। इस पर भी नियम विरुद्ध खनन जारी रहता है तो वह धरना प्रदर्शन करने पर विवश होंगे। डॉक्टर भागीरथी सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन सरकारी खर्चे से पवित्र सोन नदी की आरती कराता है। वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन मिलीभगत कर अवैध खनन कराने में मशगूल है।

दिलचस्प बात यह है कि लगातार जिला खनिज विभाग की जानिब से खदान का सर्वे भी किया जाता है। परंतु जिम्मेदार अधिकारियों को नदी के भीतर गर्जना करती भारी भरकम मशीनें नहीं दिखाई देती। वहीं अस्थायी पुल बनाकर जलधारा को मोड़ा गया है। वह भी जांच में दिखाई नहीं देता। नियमों की धज्जियां जमकर उड़ाई जाती है। परंतु इस पर लगाम नहीं लगाया जा रहा है। जिसके चलते नदी का मूल स्वरूप बिगड़ रहा है।

वहीं इकोलॉजिकल सिस्टम भी ब्रेक हो रहा है। समय की शिला पर खड़ी जनता सोंच रही है कि आखिर इसपर कब अंकुश लगेगी। या यूं ही सोन नद के अस्तित्व को मिटाया जाता रहेगा। जिसने अपने किनारों पर न जाने कितनी सभ्यताओं को परवान चढ़ाया है। पवित्र एवं पूजनीय सोन नद सनातन संस्कृति एवं सभ्यता के न जाने कितने पहलुओं को अपने अंदर समाहित किये हुए है। सोन नद के अस्तित्व को बचाने के लिए सनातन धर्म के स्वंयम्भूओं को आगे आना होगा। वरना आने वाला इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।




















