वाराणसी। जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान कार्यालय परिसर में क्रांतिवीर आदिवासी महानायक भगवान बिरसा मुंडा जी का 150 वें जन्म दिवस समारोह का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम एमएसएमई विभाग, भारत सरकार, नेहरू युवा विभाग केंद्र, वाराणसी, जिला प्रशासन वाराणसी, एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ ऐश्वर्या लक्ष्मी-जिला समाज कल्याण विभाग (विकास), वाराणसी* जी रही। सर्वप्रथम बिरसा मुंडा जी के मूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर गौरव दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ ऐश्वर्या राज लक्ष्मी ने कहा कि आदिवासी समाज की विकास के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है, शिक्षा की ताकत हमें बहुत आगे तक लेकर जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों के योगदान को इस देश में भुलाया नहीं जा सकता क्योंकि आजादी की लड़ाई की प्रथम बीज आदिवासियों द्वारा बोया गया, जिसके परिणाम से गुलामी के जंजीरों में से हम जीत पाए हैं I हमारा विभाग आदिवासी समाज के लिए जनपद वाराणसी में निरंतर कार्यरत है,
विभाग द्वारा जनजाति समाज के बच्चों को अनेक योजनाओं के माध्यम से उनका शैक्षणिक, सामाजिक आर्थिक उत्थान किया जा रहा है, पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति, निशुल्क पुस्तक, साइकिल, यूनिफार्म आदि अन्य योजनाओं से लगातार लाभान्वित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि आर. के. चौधरी-निदेशक एमएसएमई, चांदपुर भारत सरकार*, वाराणसी ने क्रांतिवीर भगवान बिरसा मुंडा के चरणों में नमन करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा जी की राष्ट्र निर्माण की सोच से हमारा विभाग आदिवासी समाज के आर्थिक मजबूती के लिए निरंतर कार्यरत है। अनेक स्किल प्रोग्राम के माध्यम से विभाग द्वारा जनजाति समाज के लोगों को लाभान्वित किया जाता है । जिसके लिए कोई भी जनजाति समाज का बच्चा किसी भी कार्य दिवस में आकर निशुल्क प्रशिक्षण की पंजीकरण करा सकता है।
कार्यक्रम में अथिति रितेश बरनवाल–सहायक निदेशक, एमएसएमई विभाग भारत सरकार*, वाराणसी ने कहा कि जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज को एकजुट होने का बड़ा संदेश है बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर हम आगे बढ़ सकते हैं जिस तरीके से उन्होंने देश को गुलामी से बचाने में अपना जीवन बलिदान दिया ऐसे महान क्रांतिकारी के जीवन कृतित्व को सदैव इतिहास में याद रखा जाएगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति समाज के व्यक्तियों को कौशल विकास के लिए विभिन्न कौशल परक प्रशिक्षण का आयोजन समय समय पर संचालित है जिसमें निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर उनको रोजगार की तरफ जोड़ा जा रहा है।
कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र के असिस्टेंट मैनेजर संजीव कुमार सिंह* ने बताया कि गौरव दिवस जनजातियों के लिए ही नहीं संपूर्ण देश के लिए गौरव की बात है और बिरसा मुंडा जैसे लोग हमारे भारत देश में पैदा हुए इसके लिए हमें गर्व होती है। बिरसा मुंडा जैसे महानायक ने देश से अंग्रेजों को भगाने में अहम भूमिका निभाई।
इस गौरव दिवस के अवसर पर मैं आशा करता हूं कि आदिवासी समाज नशाखोरी, अंधविश्वास और अशिक्षा जैसे कुरितियों को दूर करते हुए अपने विकास की ओर अग्रसर होंगे।
कार्यक्रम में नीतीश गौर-टेक्सटाइल इंस्पेक्टर हैंडलूम डिपार्मेंट, वाराणसी* ने कहा कि बनारस की पहचान मुख्य रूप से बनारसी साड़ी से होता है, जिसमें जनजाति समाज का अपना एक विशेष योगदान है। हजारों साल से रोजगार का मुख्य साधन बनारसी सिल्क साड़ी रहा है जिसमें आदिवासी समाज का योगदान अग्रणी है इनके द्वारा बनाए गए सिल्सक साड़ी को दिवेशों तक भेजा जाती है। इसके किये विभाग जनजाति समाज के लिए कार्यरत है।
कार्यक्रम के संयोजक बृजभान मरावी ने कहा कि जनजाति गौरव दिवस को पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जा रहा है इससे आदिवासियों की सम्मान को रखते हुए उनको आगे बढ़ाया जा रहा है, जनजाति गौरव दिवस से संपूर्ण आदिवासियों का सम्मान बढ़ता है। आदिवासी समाज के विकास के लिए हमें आगे आना होगा तभी आदिवासी समाज का विकास तेजी से होगा। साथ ही जनजाति समाज को अपनी संस्कृति, खान-पान, बोली-भाषा आदि को संजोकर रखना होगा और तभी हम राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान स्वतंत्र रूप से दे सकते हैं।
बिरसा मुंडा जी का 150 जयंती का अवसर पर आदिवासी बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है जिसमें विजेता बच्चों को शील्ड एवं पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही जनपद वाराणसी के जनजाति समाज के उत्थान के लिए कार्यरत व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया।

इस अवसर पर बलिराम, अमित कुमार, महेंद्र प्रसाद, हर्ष कुमार, संत लाल भारतीय, संदीप कुमार, रविन्द्र कुमार,राज कुंवर, अमन कुमार अंशुं गोंड, आदित्य कुमार, विकास कुमार, शुशीला पटेल, संगीता, पूजा, मीना देवी गोंड आदि के साथ जनपद के सैकड़ो लोग उपस्थित रहें। गौरव दिवस कार्यक्रम का संचालन पंजक शर्मा जी ने लिया।





















