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- संकट मोचन मंदिर पर हुआ अखंड रामायण का पाठ, धूमधाम से मना हनुमान जन्मोत्सव
सोनभद्र। जिला मुख्यालय स्थित श्री राम जानकी संकट मोचन मंदिर पर नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) के अवसर पर हनुमान जन्मोत्सव का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया इस दौरान मंदिर के प्रधान पुजारी ने मंदिर का भव्य श्रृंगार किया।

इसके पश्यात श्री संकट मोचन हनुमान जी की दिव्य आरती हुई और प्रसाद का वितरण किया गया। वहीं मंदिर परिसर में 24 घंटे का अखंड रामायण के पाठ का भी आयोजन कराया गया। जिसमें गंगेश्वर पाठक और उनकी टीम के अजीत पाठक, धीरज, सत्यप्रकाश पाठक, रोहित शुभम ने वाद्य यंत्र के सुंदर वादन के अखंड रामायण का पाठ किया।

वहीं इस अवसर पर प्रधान पुजारी राजकुमार पांडे ने बताया कि हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच और दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को अर्थात सितंबर-अक्टूबर के बीच उन्होंने आगे बताया कि चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। मतलब यह कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था। फिर चतुर्दर्शी क्यों मनाते हैं?

वाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था।एक तिथि को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में जबकि दूसरी तिथि को जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।

पहली तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमानजी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया।

इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी जबकि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका जन्म हुआ हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार माता सीता ने हनुमानजी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया था।

यह दिन नरक चतुर्दशी का दिन था। हालांकि वाल्मिकीजी ने जो लिखा है उसे सही माना जा सकता है। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। इस अवसर पर सुरेश नन्दन मिश्रा, अजय मिश्रा, राहुल, केतन, हिमांशु,आशु , सचिन, मोनू, करन सिंह, बच्चा पाठक , शिवपूजन दूबे सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।

























