HIGHLIGHTS
- गाजे-बाजे के साथ हुआ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन
- डीजे के भक्तीमय गाने पर थिरकते रहे लोग

सोनभद्र। जिले भर में रविवार को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पूजा पंडालों से जब माता रानी की प्रतिमाओं को विर्सजन के लिए उठाया गया तो भक्तों में खासा उत्साह रहा। बैंड-बाजे के साथ भक्तगण प्रतिमाओं के साथ नाचते-गाते चले। लेकिन, जब तालाब में प्रतिमा का विसर्जन करने लगे तो भक्तों की आंखों में नमी आ गई।

जिले भर में 300 से अधिक स्थानों पर सजी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के पंडालो में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन का जुलूस बड़े ही धूमधाम से निकाला गया।
इस दौरान श्रद्धालु डीजे के धुन पर नाचते गाते हुए विसर्जन के लिए गए। बतादे कि लगभग 150 मूर्तियों का विसर्जन धन्धरौल बांध में किया गया।

बभनी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को रविवार को बाजे गाजे के साथ नम आंखों से तालाब में विसर्जित किया गया। नौ दिनों तक मां की पूजा अर्चना के बाद विसर्जित करने के लिए मां की प्रतिमा को जैसे ही उठाया गया सभी भक्तों की आंखों में आंसू आ गए। नम आंखों से मां को विदा किया गया।

सभी स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इसके साथ चौना, चपकी बडहोर, करमघट्टी गांव में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित किया।
दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को विसर्जन से पहले माँ दुर्गा की प्रतिमा के साथ अन्य डीदेवी-देवताओं की शोभायात्रा नगर में निकाली गई। उसके बाद शिवाजी तालाब में विसर्जन किया गया।

बीजपुर प्रतिनिधि के अनुसार न्याय पंचायत जरहा में बुधवार को मां दुर्गा की प्रतिमा को शांतिपूर्ण माहौल में गाजे बाजे के साथ विसर्जित किया गया। बीजपुर दुदहिया मंदिर,बीजपुर बाजार, एनटीपीसी आवासीय परिसर, सिरसोती शिव मंदिर,कांट्रेक्टर कालोनी,शांतिनगर,नेमना जरहा, सेवकाडाड़, बकरिहवा की प्रतिमा शांतिपूर्ण माहौल में विसर्जित हुई।

केकराही प्रतिनिधि के अनुसार करमा थाना क्षेत्र के केकराही बाजार में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को बुधवार को बाजे गाजे के साथ नम आंखों से तालाब में विसर्जित किया गया।


करमा प्रतिनिधि के अुनसार स्थानीय थाना क्षेत्र के करमा बाजार ,पगिया तिराहा ,धौरहरा, करकोली, विसहार आदि गांवों में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन किया गया। देवी-देवताओं की शोभायात्रा नगर में निकाली गई। उसके बाद शिवाजी तालाब में विसर्जन किया गया।






















