HIGHLIGHTS
- महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को विधि विधान से पूजन- अर्चन किया
- महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से मंदिरों, तालाबों, सार्वजनिक स्थानों पर जीवित्पुत्रिका की पूजन- अर्चन किया गया
- जिउतिया त्यौहार को लेकर बाजारों में पूजा- पाठ के सामानों को खरीदने वालों की काफी भीड़ देखने को मिली।

सोनभद्र। जिले भर में अष्टमी तिथि बुधवार को महिलाओं ने पुत्र की दीर्घायु और मंगल कामनाओं के लिए निर्जल और निराहार रह कर जीवित्पुत्रिका का व्रत रखा। माताओं ने दिनभर पूजा की तैयारियां किया और शाम होते ही नगर के मंदिरों सार्वजनिक स्थानों, तालाब के पास सामुहिक रुप से एकत्रित होकर पूरे विधि विधान के साथ पूजन अर्चन किया।

वही त्यौहार को लेकर बाजारों में जिउतिया व फलों के दुकानों पर काफी भीड़ रही। व्रती महिलाओं ने बताया कि पुत्रों की दीर्घायु व मंगल कामनाओं के लिए रखा जाने वाला यह व्रत काफी कठिन होता है। इस व्रत में दिन भर निर्जल व्रत रहा जाता है और शाम को विधि विधान के साथ पूजा अर्चन किया जाता है।

इस दौरान व्रती महिलाओं ने कहानियां सुनकर, सोहर, बधाई आदि मांगलिक गीत गाकर व्रत को किया और दूसरे दिन नवमी तिथि को जाय और प्रसाद ग्रहण कर उपवास को खोला।

रॉबर्ट्सगंज नगर के उत्तर माहौल,पूरब माहौल, नई बस्ती, राम सरोवर तालाब, बड़ौली पोखरा, अकड़हवा पोखरा समेत आदि स्थानों पर महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर पूजन- अर्चन किया।

साहित्यकार प्रतिभा देवी ने बताया कि निर्जल और निराहार रहकर पुत्र की दीर्घायु और मंगल कामनाओं के लिए यह व्रत रखा जाता है। इसमें फल- फूल, मिष्ठान, खिलौना, जिउतिया, पूड़ी पकवान, वस्त्र आदि चढ़ाकर कुश और गन्ने को गाड़ कर विधि विधान से पूजन- अर्चन किया जाता है

तथा पूजन स्थल पर कहानियां सुनकर, सोहर, बधाई आदि मांगलिक गीत गाकर व्रत को पूर्ण किया जाता है और दूसरे दिन नवमी तिथि को व्रती महिलाएं जाय और प्रसाद ग्रहण कर उपवास को खोलती है।




















