जो गया जाना नहीं था, वक्त ये आना नहीं था.. स्व हीरामनी देवी की स्मृति में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन

उमेश केशरी

सोनभद्र,मिर्जापुर। हिन्दीश्री साहित्य संस्थान के सौजन्य से स्व हीरामनी देवी की स्मृति में शहीद उद्यान नारघाट में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। ज्ञात हो कि हीरामनी देवी जनपद के  वरिष्ठ साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा की धर्मपत्नी थी जिनका निधन गत 6 अगस्त 24 को हो गया था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि केबी पीजी कालेज की

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हिन्दी विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो रेनूरानी सिंह थी। वहीं वरिष्ठ पसाहित्यकार गणेश गम्भीर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम का पशुभापरम्भ पूर्व विधायक भगवती प्रसादचौधरी द्वारा हीरामनी देवी के चित्र पर पुष्पांजलि से किया गया।

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तत्पश्चात मुख्य अतिथि, अध्यक्ष व मंचासीन अतिथियों के साथ परिवार के लोगों ज्ञानदास मौर्य, सावित्री देवी, दिनेश मौर्य, शशि मौर्य, आशीष मौर्य,अंजली मौर्य, संजय मौर्य, साधना मौर्य, सान्वी मौर्य आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की।  कार्यक्रम का संचालन अरविन्द अवस्थी ने किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ पूजा यादव की सरस्वती वन्दना से हुआ। काव्य पाठ करने वाले कवियों में  गणेश गम्भीर ने पढ़ा- ‘जो गया जाना नहीं था,वक्त ये आना नहीं था,जश्न की महफिल में साहब मर्शिया गाना नहीं था। ‘लल्लू तिवारी ने सुनाया- ‘जिनिगिया बेइंजन के रेल,घुसुकि सुसुकि के सरकि रहल बा,केहु तरे ठेलमठेल, जिनिगिया बेइंजनके रेल…।

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भोलानाथ कुशवाहाने पढ़ा-‘अपनी जमीन की है पुरवाई,जैसे किसी दरिया में बहार आई, नींव का पत्थर जरूर चमकेगा, हटा दो अपनी तलछट और काई।’ अरविन्द अवस्थी ने पढ़ा- ‘बात ही बात में कुछ बात बताई जाए,राह मुश्किल हो जहाँ राह बनाई जाए।’ संदीप बालाजीने सुनाया- ‘ सदा समर्पण के आँगन में बलि देती हो सबसे आगे,युगों युगों से कर्जदार है हे नारी संसार तुम्हारा।’मुहिब मिर्जापुरी ने सुनाया- ‘तेरी यादों के सिवा कुछ भी मेरे पास नहीं, कौन हूँ मैं मुझे इस बात का एहसास नहीं।

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नन्दिनी वर्मा ने सुनाया- जिन्दगी की राहों में चलते डगर पर, हम खो न जायें क्योकि तुम साथ थे।’ इला जायसवालने पढ़ा- ‘लौटना होगा तुम्हें सूरज की पहली किरन में,पक्षियों के कलरव में, खिलते हुए फूलों में।’ ,पूजा यादव ने सुनाया- ‘सम्मान फरिश्तों का दिलाती हैं बेटियाँ।’ खुर्शीद भारती ने पढ़ा- ‘तमाम झील के पानी को पी गया सूरज, परिन्दे प्यासे हैं इनका शिकार मत करना।’

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इसके साथ ही प्रतिमा शर्मा पुष्प,चंद्रकांत भ्रमर, केदारनाथ सविता जगदीश पांडेय, कुलभूषण पाठक, शिव प्रसाद द्विवेदी,नंदलाल सिंह चंचल , त्रियोगी मिट्ठू , आनन्द अमित, लालव्रत सिंह सुगम, प्रमोद चंद्र गुप्त, नारायण जी उपाध्याय, विजय गुप्ता जी, मयंक प्रजापति, इरफान कुरैशी आदि ने भी काव्यपाठ किया । वरिष्ठ शायर जफर मिर्जापुरी की गजल को पढ़कर सुनाया गया।

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इस कार्यक्रम में शामिल विशिष्ट लोगों में  राजपति ओझा, सुनील कुमार पांडेय, आनन्द केशरी, अमरनाथ सिंह आदि थे।अंत में दो मिनट मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना की गयी।

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