आजीवन सोनभद्र के विकास के लिए लड़ते रहे ग्रामवासी जी, उनकी 125 वी जयंती पर विशेष

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  • 27 अगस्त ग्रामवासी जी की 125 वी जयंती पर विशेष

सोनभद्र। सोनभद्र जनपद के सृजन, विकास, मुख्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले, 42 महीने तक मिर्जापुर जिला कारागार सहित अन्य जनपदों के जिलों में अंग्रेजों की यातनाएं, सजा, जुर्माना आदि भोगने वाले प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देशभक्त, क्रांतिकारी ब्रजभूषण दास मिश्र “ग्रामवासी” जी का सोनभद्र जनपद के विकास में अमूल्य योगदान रहा है।

इस क्षेत्र की गरीब जनता के उत्थान के लिए आजादी के बाद मिर्जापुर के दक्षिणचल के नाम से प्रसिद्ध (वर्तमान सोनभद्र) मे ग्रामवासी “दद्दा” ने सन 1954 में वनवासी सेवा आश्रम की स्थापना आदिवासियों और गरीबों के हित में किया, सन 1960 में रिहंद डैम के विस्थापितों को सरकार से उचित मुआवजा दिलाने के लिए तथा पुनर्वास के लिए 13 दिन का अनशन (मई 1960 से 3 जून 1960) तक किया।

इसके बाद बीना कोयला खदान के कारण निकाले गए किसानों, बीजपुर पावर हाउस के कारण विस्थापित किसानों, अनपरा पावर हाउस के कारण विस्थापित किसानों के मुआवजा, पुनर्वास हेतु 5- 5 दिन अनशन अपने ही सरकार के खिलाफ किया।
  समाजवादी पार्टी के शासन में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में डाला, चुर्क, चुनार सीमेंट फैक्ट्री बेचे जाने की विरोध में दो दिवसीय अनशन, सोनभद्र मुख्यालय आंदोलन में प्रमुखता से भाग लेने वाले थे।

इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज से स्थानांतरित कर कर पिपरी में स्थापित किए जाने के विरोध में ग्रामवासी “दद्दा” मिर्जापुर से सोनभद्र जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज बस से आए बस स्टेशन के प्रतीक्षालय में उनकी भेंट मेरे पूज्य गुरु डॉक्टर पशुपति नाथ दुबे से हुई और ग्रामवासी ‘दद्दा’ बड़े ही विनम्रता पूर्वक उनसे कहा कि मुझे पहुंचने में कुछ विलंब हो गया है मैं घोषित मुख्यालय के विरोध में गिरफ्तारी देने आया हूं, अनशन पर हूं।

गुरुजी का घर पास में ही था, जहां पर थोड़ी देर ग्रामवासी “दद्दा” ने विश्राम किया, चाय नाश्ते से निवृत्त होने के बाद “दद्दा” संकट मोचन हनुमान मंदिर (अस्पताल के सामने वाले) मंदिर पर पहुंचे, तब तक उनके समर्थकों अनुयायियों को खबर लग चुकी थी, मंदिर परिसर आंदोलन समर्थकों, अनशन कारियों से भर चुका था, जिला प्रशासन धारा 144 लागू कर दिया था, उस समय तहसील मुख्यालय एवं नगर पुलिस चौकी होने के कारण आंदोलनकारियों और जिला प्रशासन के मध्य तनाव की स्थिति कायम हो गई थी, नगर में चारों ओर पुलिस के जवानों का जाल बिछा दिया गया था और बड़ी तनावपूर्ण स्थिति थी।

युवा अत्यधिक जोश में थे और वह कुछ भी करने के लिए तैयार थे लेकिन “दद्दा’ ने सबको शांत किया और उन्होंने अपने अनशन व गिरफ्तारी का ऐलान किया एक 95 वर्षीय वयोवृद्ध दुद्धी- रॉबर्ट्सगंज के संयुक्त क्षेत्र के पूर्व विधायक, सोनभद्र की भौगोलिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक स्थिति से परिचित, आंदोलनकारी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, “दद्दा” के जोश को देखकर उपस्थित जनता भी जोश में आ गई और “दद्दा’ के नेतृत्व में धारा 144 को तोड़ते हुए नगर भ्रमण कर आंदोलनकारियों का जुलूस रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पहुंचा और  दद्दा ने अपनी गिरफ्तारी दी,

इनके साथ श्याम नारायण देव पांडे एडवोकेट, तीरथ राज (विधायक) बेचन देव पांडे, मनमोहन पाठक, जगदीश मिश्रा, जितेंद्र चौबे, सरदार गोविंद सिंह, भोला उपाध्याय, श्रवण कुमार, चंद्रकांत देव पांडे, एम ए खान, सीता शरण महाराज, अशोक कुमार केसरी, प्रकाश सोनी, शुभलेंद्र कुमार राय, गोपाल स्वरूप पाठक, हरिशनि, अशोक कुमार शर्मा, अनुराग द्विवेदी, राजीव कुमार तिवारी, विमल तिवारी, प्रमोद पांडे, अशरफी, कन्हैया सोनकर, अवधेश कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, राजकुमार मिश्रा, प्रशांत कुमार, विवेक कुमार, इंद्र बहादुर मुख्यालय के लिए मर- मिटने के लिए तैयार दद्दा के साथ गिरफ्तार हुए।

अधिवक्ता विनोद चौबे बताते हैं कि-“गिरफ्तारी के पूर्व 4 जुलाई 1994 के अंक की 40 प्रतियां आंदोलनकारियों में बाटी गई, जिसमें जनपद सोनभद्र के मुख्यालय के स्थानांतरण के विरोध में शासन के विरुद्ध समाचार प्रकाशित था।”
सभी आंदोलनकारियों को जिला कारागार मिर्जापुर भेज दिया गया.  दद्दा के स्वास्थ्य को देखते हुए  आंदोलनकारियों के अनुनय- विनय के बाद दद्दा गिरफ्तारी के चौथे दिन जेल से बाहर आए।

मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के कार्यकाल के समाप्त होने के पश्चात सुबे की मुख्यमंत्री बहन सुश्री मायावती ने रॉबर्ट्सगंज नगर को पुनः जनपद मुख्यालय घोषित करते हुए जिला मुख्यालय का उद्घाटन किया।
  जनपद सोनभद्र के इस विकास महापुरुष के नाम पर द्वार, स्मारक, उद्यान, सार्वजनिक मार्ग आदि का नामकरण कर जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देशभक्त क्रांतिकारी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित किया जाना चाहिए।

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