आजाद, तिलक के बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता- राकेश शरण मिश्र

HIGHLIGHTS

  • संयुक्त अधिवक्ता महासंघ ने आजाद व तिलक को किया याद
  • महासंघ के नगर स्थित कार्यालय पर दोनो महापुरुषों के चित्र पर अधिवक्ताओ ने किया श्रद्धा सुमन अर्पित

सोनभद्र। भारत की आजादी में हंसते हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत मां के वीर सपूत महान क्रांतिकारी पंडित चंद्र शेखर आजाद एवम महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित बाल गंगाधर तिलक की जयंती के अवसर पर संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने अपने नगर स्थित कार्यालय पर दोनो महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण एवम पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

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इस अवसर पर महासंघ के प्रदेश संगठन सचिव उमापति पांडेय, जिला इकाई सोनभद्र संयुक्त अधिवक्ता महासंघ के पदाधिकारी अधिवक्ता विजय प्रकाश शुक्ल, अधिवक्ता राजेश देव पांडेय ,अधिवक्ता जनार्दन पांडेय अधिवक्ता प्रदीप धर दिवेदी, अमित कुमार पांडेय सहित महासंघ के कई पदाधिकारियों ने भी पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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सभा को सम्बोधित करते हुए महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महान क्रांतिकारी पंडित चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान को कभी भी भुलाया नही जा सकता। भारत मां के सच्चे सपूत पंडित चंद्र शेखर आजाद ने मरते दम तक अपनी अंतिम सांस तक जब तक जीवित रहे वो अंग्रेजो के हाथ नही लग सके। उन्होने यह संकल्प लिया था की जीते जी मैं कभी अपने भारत मां के दुश्मनों के हाथ नही आऊंगा।

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जिस दिन ऐसा होगा उस दिन मैं खुद अपने आप को गोली मार लूंगा। और हुआ भी वही जब प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजी सरकार की पुलिस ने उन्हें घेर लिया तो वो अकेले पेड़ की आड़ लेकर दुश्मनों से लोहा लेते रहे और जब अंतिम गोली शेष बची तो उन्होंने स्वयं अपने आपको अपने कनपटी पर अपने रिवाल्वर से गोली मार ली और जीते जी दुश्मनों के हाथ नही आए।

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साथ ही पंडित बाल गंगाधर तिलक ने स्वतंत्रता की लड़ाई में जो योगदान दिया है उसे भी कभी भुलाया नही जा सकता है। महासंघ के प्रदेश संगठन सचिव उमपाती पांडेय ने कहा कि आज अगर हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं तो ये भारत मां के इन अमर बलिदानियों की बदौलत ही ले पा रहे है। इसी प्रकार सभा में उपस्थित अन्य अधिवक्ता साथियों ने भी भारत मां के दोनो महान सपूतों को याद करते हुए कहा कि ये हमारे प्रेरणा स्त्रोत हैं और हमे इनसे राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का किस प्रकार निर्वहन करना है यह सीखना चाहिए।

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