सोनभद्र। नागरिकों ने सड़क की मांग को लेकर उपजिलाधिकारी ओबरा को ज्ञापन सौंपा है। बताया है कि तेलगुड़वा से लेकर कोन तक की रोड 13 वर्षों से बनी ही नहीं है। जहां लाखों लोगों का आवागमन है। हद तो यह है कि ग्रामीण सांसद विधायक से लगाय जिला प्रशासन को भी अवगत कराते हुए आएं हैं लेकिन अभी तक किसी ने भी इस झांकना मुनासिब नहीं समझा है।

तकरीबन एक दशक से ज्यादा समय से सड़क का ना बनना जहां सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहा है तो वहीं जनप्रतिनिधियों की उपेक्षात्मक रवैए को भी दर्शा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो इन क्षेत्रों में लगातार बालू
खनन का कार्य होता रहा है 10 किलोमीटर दूरी पर ग्राम पंचायत बिल्ली-मारकुंडी और डाला में पत्थर खनन होता है इन सभी का जिला खनिज निधि में अरबो रुपए बेकार में पड़ा हुआ है अगर इस खनिज निधि से ही उक्त रोड बना दिया जाए तो लोगों को सड़क की सुलभता हो जाए। यह रोड लगभग 35 किलोमीटर की है जिसमें से 5 से 7 किलोमीटर की रोड बन चुकी है। लगभग 25 से 27 किलोमीटर दूरी के रोड का बनना बाकी है। सोनभद्र के जिला खनिज नीधि में अरबों रुपए रखे हुए हैं। यह रोड झारखंड प्रदेश से भी मिलती है।

इतने सब के बाद भी यह रोड नहीं बन पा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में उपजिलाधिकारी को पत्र दिया गया था। 7 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय नवनिर्माण सेना द्वारा तेलगुड़वा से लेकर कोन तक की रोड बनाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। चेतावनी दी गई है कि यह रोड जब तक नहीं
बनेगी तब तक संघर्ष जारी रहेगा और 7 जुलाई 2024 को प्रथम चरण में तेलगुड़वा में हस्ताक्षर अभियान का शुभारम्भ भी कर दिया गया है। 14 जुलाई 2024 को कोन में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया जिसमें सैकड़ो लोगों ने अपना समर्थन देते हुए हस्ताक्षर किया है।

साथ ही चेतावनी दी गई है कि यह रोड अगर नहीं बनाई गई तो आने वाले दिनों में एक बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा। जिसमें भूख
हड़ताल, धरना प्रदर्शन होगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस दौरान सेना के नेताओ ने बताया कि आम आदमी को उसका अधिकार दिलाना ही राष्ट्रीय नवनिर्माण सेना का उद्देश्य है। इसके लिए वह संघर्ष जारी रखेंगे।
















