गनेशपुर में महारानी दुर्गावती के बलिदान एवं शौर्य दिवस का हुआ आयोजन

वाराणसी। सोमवार को उ0 प्र0 लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्थान, लखनऊ एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में प्रत्येक वर्ष की भॉति इस वर्ष भी लोकमाता वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के 460वॉ स्मृति बलिदान एवं शौर्य दिवस समारोह के अवसर पर ‘‘मध्यकालीन भारत की राष्ट्रीय एकता: गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का योगदान’’ विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि   कुंवर पूनम मौर्या, अध्यक्ष-जिला पंचायत, वाराणसी द्वारा दोपहर 1बजे प्रकृति शक्ति बड़ादेव एवं गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के मूर्ति पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवलन अनुपम लॉन, वाराणसी-एयरपोर्ट रोड, गनेशपुर वार्ड नं0-14 के सभागार वाराणसी में किया गया। मुख्य अतिथि माननीया  कुंवर पूनम मौर्या, अध्यक्ष-जिला पंचायत वाराणसी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का मध्यकालीन भारत की राष्ट्रीय एकता में गोडंवाना साम्राज्य की अहम भूमिका रही है। दुर्गावती जी का शौर्य और बलिदान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक विख्यात है तथा लोकमाता के रूप में जन-जन के हृदय में व्याप्त है। गोंडवाना साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड आदि सहित 258 गोंड राजाओं ने आजादी के समय अपनी विरासतों का विलय कर भारत की राष्ट्रीय एकता का बुनियाद खड़ा किया है। वर्तमान समय में गोंड आदिवासी जनजाति समाज के अतिप्राचीन धरोहरों एवं विरासतों कों संरक्षण एवं विकास से जन-जन को उनके पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक आयामों से अवगत कराने के लिए सर्व समाज को आगे आना चाहिए।
इस अवसर पर उनके द्वारा निदेशालय, जनजाति विकास विभाग, लखनऊ द्वारा आवंटित रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यदायी संस्था-जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी द्वारा 45 दिवसीय रोजगार परक व्यूटिशीयन प्रशिक्षण समाप्ति उपरान्त लाभार्थियों के स्वरोजगार हेतु मुख्य अतिथि द्वारा व्यूटिशीयन टूलकिट का वितरण भी किया गया। टूलकिट पाकर आदिवासी युवतियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि टूलकिट हमारे रोजगार एवं परिवार के संचालन में सहायक होगा। ‘‘समारोह में व्यूटिशीयन टूलकिट पाकर खुशी से झूम उठी आदिवासी महिलाएॅ’’।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि रितेश विन्दल, जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास, वाराणसी ने इस अवसर पर कहा कि जनपद में आदिवासी जनजाति समाज अपने विशिष्ट संस्कृति के पहचान हेतु विख्यात है जो उनके मूल संस्कृति का आधार है, जिसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर सरकार की विशेष जनजाति समाज की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उनके विकास हेतु प्रयासरत है। साथ ही उन्होने कहा कि आदिवासी समाज के शैक्षणिक एवं आर्थिंक विकास के क्रम में विविध कौशल उन्नयन हेतु प्रशिक्षण, छात्राओं के निःशुल्क साइकिल एवं यूनिफार्म वितरण, एवं पुस्तक वितरण कार्यक्रम संचालित है जिसे जिला समाज कल्याण विकास कार्यालय के आवेदन जमा कर प्राप्त कर सकते है।
संगोष्ठी कार्यक्रम में वक्ता के रूप में डॉ. राकेश सिंह, प्रोफेसर-इतिहास विभाग, इंन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश, डॉ. पीताम्बर दास, प्रोफेसर-दर्शनशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, वाराणसी, डॉ. उर्वशी गहलोत, प्रोफेसर-हिन्दी विभाग, बीएचयू, वाराणसी, डॉ. अमरनाथ पासवान, असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सह-सहायक निदेशक, सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केन्द्र, बी.एच.यू. वाराणसी एवं संरक्षक हरिश अग्रवाल आदि लोगों ने अपनी बाते रखा। कार्यक्रम में संस्थान अध्यक्ष, डॉ बनवारी लाल गोंड ने अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र प्रदान कर किया, एवं धन्यवाद ज्ञापन सचिव/प्रबंधक बृजभान मरावी ने किया। इस अवसर पर जनपद के सैकड़ों आदिवासी जनजाति समाज के लोग उपस्थित रहें।

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