अयोध्या में विश्वस्तरीय मन्दिर संग्रहालय का होगा निर्माण,योगी मंत्रीमंडल ने लिया फैसला

HIGHLIGHTS

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए


लखनऊ। मंत्रिपरिषद ने अयोध्या स्थित तहसील सदर के ग्राम मांझा जमथरा की नजूल भूमि गाटा-57 मि0 जुमला में टाटा ग्रुप के सहयोग (सी0एस0आर0 फण्ड) द्वारा विश्वस्तरीय मन्दिर संग्रहालय के निर्माण एवं संचालन हेतु भूमि के उपयोग का 90 वर्ष का लाइसेंस एक रुपये प्रतिवर्ष की टोकन दर पर दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। विश्वस्तरीय मन्दिर संग्रहालय के निर्माण एवं संचालन हेतु संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार एवं टाटा संस प्रा0लि0 के मध्य त्रिपक्षीय एम0ओ0यू0 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हस्ताक्षरित किए जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दे दी है।


मंत्रिपरिषद द्वारा उक्त एम0ओ0यू0 को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हस्ताक्षरित करने हेतु अधिकारी नामित करने के लिए प्रमुख सचिव पर्यटन, उ0प्र0 शासन को अधिकृत किया गया है। प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लिए जाने हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
विविध पर्यटन आकर्षणों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। भारत में घरेलू पर्यटकों एवं विदेशी पर्यटकों के आगमन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासतों तथा समृद्ध प्राकृतिक वन सम्पदा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं विद्यमान हैं।
भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या एक विश्वस्तरीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन गन्तव्य के रूप में विकसित हो रहा है। अयोध्या में वर्ष 2021 में लगभग 1.58 करोड़ पर्यटक आये थे। वर्ष 2022 में लगभग 2.40 करोड़ तथा वर्ष 2023 में लगभग 5.75 करोड़ पर्यटक आये थे। 22 जनवरी, 2024 को श्री राम जन्मभूमि प्रांगण में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के उपरान्त अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व गुणात्मक वृद्धि हुई है। 22 जनवरी, 2024 से प्रतिदिन लगभग 2 से 4 लाख पर्यटक अयोध्याधाम आ रहे हैं।
वर्तमान में अयोध्या आने वाले पर्यटकों का मुख्य आकर्षण केन्द्र श्रीराम जन्मभूमि परिसर एवं समीपवर्ती स्थित कनक भवन, हनुमान गढ़ी एवं अन्य धार्मिक स्थल हैं। यह पर्यटक धार्मिक पूजा-अर्चना हेतु श्रद्धाभाव से अयोध्या आते हैं। नई पीढ़ी के युवाओं, विदेशी पर्यटकों, भारतीय सभ्यता और संस्कृति में रूचि रखने वाले अन्य पर्यटकों को अयोध्या के प्रति आकर्षित करने हेतु आवश्यक पर्यटक गन्तव्य का वर्तमान में अयोध्या में एक प्रकार का अभाव है।
टाटा संस द्वारा अयोध्या में भारतीय मन्दिर संग्रहालय के निर्माण हेतु सी0एस0आर0 फण्ड से लगभग 650 करोड़ रुपये का व्यय तथा प्रश्नगत भूमि में आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं एवं साइट के विकास हेतु लगभग 100 करोड़ रुपये का व्यय किया जाना सम्भावित है। इस प्रकार टाटा संस द्वारा कुल लगभग 750 करोड़ रुपये का सम्भावित व्यय अपने सी0एस0आर0 फण्ड से भारतीय मन्दिर संग्रहालय के विकास हेतु किया जायेगा।
टाटा संस सरीखे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा अपने वित्तीय स्रोतों से विश्वस्तरीय मन्दिर संग्रहालय का निर्माण कराये जाने से मन्दिर संग्रहालय निर्माण में प्रवीणता एवं दक्षता परिलक्षित होगी। साथ ही, साथ प्रदेश सरकार द्वारा मन्दिर संग्रहालय के निर्माण हेतु व्यय की जाने वाली धनराशि की भी बचत होगी, जिसे अन्य जनोपयोगी परियोजनाओं में प्रयुक्त किया जा सकेगा।
अयोध्या में एक विश्वस्तरीय मन्दिर संग्रहालय के निर्माण से अयोध्या सहित प्रदेश के अन्य स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। टाटा संस की प्रतिष्ठा, प्रवीणता एवं सी0एस0आर0 फण्ड द्वारा मन्दिर संग्रहालय की स्थापना एवं संचालन किये जाने की प्रदर्शित इच्छा से प्रदेश सरकार के बजट में होने वाली बचत तथा प्रदेश में राजस्व एवं रोजगार के नये अवसरों के सृजन के दृष्टिगत उक्त प्रस्ताव जनहित में ग्राह्य किया जाना उपयुक्त है।
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जनपद सहारनपुर में माँ शाकुम्भरी देवी धाम पर पर्यटन विकास कार्य हेतु पर्यटन विभाग को निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने ग्राम मिरगपुर पांजूवाला, तहसील बेहट, जनपद सहारनपुर की खाता संख्या 00189 तथा खाता संख्या 0049 की कुल 0.369 हेक्टेयर भूमि श्रेणी-1 माँ शाकुम्भरी देवी धाम पर पर्यटन विकास कार्य हेतु पर्यटन विभाग को निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रिपरिषद ने प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
ज्ञातव्य है कि सहारनपुर जनपद मुख्यालय से 45 कि0मी0 दूर शिवालिक पर्वत श्रृंखला में स्थित सिद्धपीठ माँ शाकुम्भरी देवी मन्दिर स्थित है। इस मन्दिर की गणना देश की 51 पवित्र शक्तिपीठों में की जाती है। माँ शाकुम्भरी देवी आदिशक्ति का ही स्वरूप हैं। सिद्धपीठ में निर्मित माता के पावन भवन में माता शाकुम्भरी देवी, भीमा, भ्रामरी एवं शताक्षी देवी की भव्य एवं प्राचीन मूर्ति स्थापित हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार शिवालिक पर्वत पर पुरातनकाल में माँ गौरी नारायणी का शीश गिरा था। मान्यता है कि माँ भगवती सूक्ष्म रूप में इसी स्थल पर वास करती हैं। नवरात्र के दिनों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश आदि से दर्शनार्थ आते हैं।
परियोजना के पूर्ण हो जाने पर पर्यटन सुविधाएं बढ़ेंगी। इससे पर्यटकों के आवागमन में वृद्धि होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा पर्यटन क्षेत्र के विविध आयामों का विकास सम्भव हो सकेगा।
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पर्यटन विभाग के बन्द/घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कर संचालित किए जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने पर्यटन विभाग के राही पर्यटक आवास गृह, मुंशीगंज (अमेठी), राही पर्यटक आवास गृह, खुर्जा (बुलन्दशहर), राही पर्यटक आवास गृह, देवाशरीफ (बाराबंकी) व राही पर्यटक आवास गृह, हरगांव (सीतापुर) को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मोड पर विकसित व संचालित कराये जाने हेतु निर्धारित दर पर लीज पर दिये जाने के साथ ही लेटर ऑफ अवॉर्ड जारी किये जाने एवं चयनित फर्म तथा विभाग के मध्य अनुबंध किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
मंत्रिपरिषद ने पर्यटन विभाग के राही पर्यटक आवास गृह, कछला (बदायूं), राही पर्यटक आवास गृह, इटावा (इटावा), राही पर्यटक आवास गृह, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर), राही पर्यटक आवास गृह, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद), यात्री निवास विन्ध्याचल (मीरजापुर), राही पर्यटक आवास गृह, गोपीगंज (भदोही) व झील महल रेस्टोरेण्ट (मऊ) को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मोड पर विकसित व संचालित कराये जाने हेतु आर0एफ0क्यू0 की ई-निविदा के सापेक्ष प्राप्त निविदाकर्ता फर्मों का शॉर्टलिस्ट किये जाने, आर0एफ0पी0 निविदा प्रपत्रों एवं शॉर्टलिस्टेड निविदाकर्ताओं के मध्य आर0एफ0पी0 की ई-निविदा आमंत्रित किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद ने प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लिए जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
ज्ञातव्य है कि देश में पर्यटन उद्योग का परिदृश्य निरन्तर बदल रहा है। पर्यटन विभाग के बंद घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कर संचालित किये जाने में प्रशिक्षित/विशेषज्ञ संस्थाओं की आवश्यकता है, जिनका निर्माण एवं संचालन विशेषज्ञ संस्थाओं/निजी निवेशकों द्वारा कराया जाना पर्यटन के दृष्टिकोण से लाभकारी एवं लोकप्रिय होगा। इससे पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए व्यवसायियों एवं सेवा प्रदाताओं का आर्थिक उन्नयन होगा।
विविध पर्यटन आकर्षणों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासतों तथा समृद्ध प्राकृतिक वन सम्पदा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनायें विद्यमान हैं। पर्यटन विभाग के बन्द/घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित कर संचालित किए जाने से पर्यटकों के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं विकसित करने तथा प्रदेश में निजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
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जनपद लखनऊ, प्रयागराज एवं कपिलवस्तु में पर्यटन विकास के दृष्टिगत हेलीकॉप्टर सेवा संचालन के लिए हेलीपैड को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित एवं संचालित कराए जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ, प्रयागराज एवं कपिलवस्तु स्थित हेलीपैड को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मोड पर निजी निवेशकों के माध्यम से विकसित एवं संचालित कराए जाने हेतु आर0एफ0पी0/डी0सी0ए0 रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल वॉल्यूम-प्ः इन्स्ट्रक्शन टू बिडर्स, वॉल्यूम-प्प्ः ड्राफ्ट कन्सेशन एग्रीमेन्ट एवं वॉल्यूम-प्प्प्ः ड्राफ्ट शिड्यूल्स टू कन्सेशन एग्रीमेन्ट को अनुमोदित कर दिया है। मंत्रिपरिषद द्वारा शॉर्टलिस्टेड निविदाकर्ताओं के मध्य आर0एफ0पी0/डी0सी0ए0 की निविदा कराए जाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन उद्योग के बहुआयामी महत्व को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के मुख्य पर्यटन स्थलों/आकर्षणों और पर्यटन सम्भावनाओं के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके दृष्टिगत पर्यटकों के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं का सृजन किया जा रहा है ताकि यहाँ पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सके।
जनपद आगरा एवं मथुरा प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण इन जनपदों में वर्षपर्यन्त देशी एवं विदेशी पर्यटकों का आगमन होता है। पर्यटन के क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन स्थलों को वायुसेवा से जोड़ने हेतु हेलीपैड के महत्व के दृष्टिगत प्रथम चरण में प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों यथा-आगरा एवं मथुरा में हेलीपैड के पी0पी0पी0 मोड पर संचालन की पहल की गयी है।
जनपद लखनऊ, प्रयागराज एवं कपिलवस्तु स्थित हेलीपैड को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पी0पी0पी0 मोड) पर विशेषज्ञ संस्थाओं/निजी निवेशकों के माध्यम से विकसित कर संचालित किये जाने से इन स्थलों पर हेलीपोर्ट की सुविधा से देशी-विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर होगा, सैलानियों की संख्या बढ़ेगी, रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, लोगों का आर्थिक उन्नयन होगा तथा राजस्व में वृद्धि होगी।
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प्रदेश के प्राचीन तथा विरासत भवनों को एडाप्टिव रि-यूज के अन्तर्गत पी0पी0पी0 मॉडल पर पर्यटन इकाईयों के रूप में विकसित व संचालित कराये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के प्राचीन तथा विरासत भवनों को एडाप्टिव रि-यूज के अन्तर्गत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मॉडल पर पर्यटन इकाईयों के रूप में विकसित व संचालित कराये जाने हेतु कोठी रोशन-उद्-दौला (लखनऊ), बरसाना जल महल (मथुरा) तथा शुक्ला तालाब (कानपुर देहात) की तकनीकी निविदा, तकनीकी प्रस्तुतीकरण एवं वित्तीय निविदा सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश प्राचीन काल से भारत के उन राज्यों में से एक है जो सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों की दृष्टि से समृद्ध भारतीय इतिहास को परिभाषित करता है। पर्यटन के लिये महत्वपूर्ण इन धरोहरों के मामले में उत्तर प्रदेश भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य भी है। अपनी गौरवशाली ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासतों तथा समृद्ध प्राकृतिक वनसम्पदा की दृष्टि से उत्तर प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएं विद्यमान हैं।
भवन संरक्षण एवं पुरातात्विक अनुसंधान की आवश्यकताओं के लिए विरासत सम्पत्तियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य पुरातत्व निदेशालय के अन्तर्गत निहित विधिक प्राविधानों द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में स्थित विरासत सम्पत्तियां समुचित अनुरक्षण के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इनकी देख-रेख हेतु पर्याप्त मानव संसाधन नहीं होने के कारण इनमें लगी सामग्रियों की चोरी तथा भवन परिसर की क्षति की सम्भावना रहती है। ऐसे परिसर असामाजिक तत्वों की अराजक गतिविधियों के केन्द्र भी बन सकते हैं। इस प्रकार यह प्राचीन धरोहर भवन वर्तमान में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों के लिये उपयोगी नहीं हैं। इससे सरकार को कोई आर्थिक लाभ या राजस्व की प्राप्ति भी नहीं हो पा रही है।
इस उद्देश्य से प्रदेश के प्राचीन धरोहर भवनों (हेरिटेज बिल्डिंग्स) को एडाप्टिव रि-यूज के अन्तर्गत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मॉडल पर हेरिटेज पर्यटन इकाईयों के रूप में विकसित किया जाना है। इससे पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए व्यवसायियों एवं सेवा प्रदाताओं का आर्थिक उन्नयन होगा।
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मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम योजना सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। मंत्रिपरिषद द्वारा भविष्य में किसी अग्रेतर संशोधन/निर्णय के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को सरकार के साथ पर्यटन नीति, प्रबन्धन, कार्यान्वयन, अनुश्रवण के कार्यों में सहभागिता का विशिष्ट अवसर प्रदान करना है। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति पारिस्थितिकी से जुड़े स्थलों के सर्वांगीण विकास, केन्द्र/राज्य सरकार द्वारा कार्यान्वित योजनाओं के समवर्ती मूल्यांकन, संरचना तथा प्रदेश में मेले-महोत्सवों के आयोजन की रूप-रेखा तैयार करने हेतु शोधार्थियों का चयन किया जाना है। इससे प्रदेश की पर्यटन विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में प्रतिभाशाली एवं ऊर्जावान शोधार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित हो सकेगी।
मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम के अन्तर्गत पर्यटन, संस्कृति, ऐतिहासिक, तथा पारिस्थितिकी से जुड़े सम्बद्ध क्षेत्र के शोध कार्य करने वाले शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित शोधार्थियों के द्वारा जिलाधिकारी, मण्डलायुक्त तथा सम्बन्धित पर्यटन विभाग के अधिकारी के पर्यवेक्षण में कार्य किया जायेगा।
चयनित शोधार्थियों द्वारा पर्यटन विभाग की योजनाओं एवं मेले महोत्सवों के समेकित कार्यान्वयन की रूप-रेखा तैयार कराने एवं उसका क्रियान्वयन कराने में सहयोग किया जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में विभिन्न राज्यों एवं देशों द्वारा अपनायी गई बेस्ट प्रैक्टिसेस का चयनित शोधार्थियों द्वारा अध्ययन करते हुए उनके क्रियान्वयन सम्बन्धी सुझाव पर्यटन विभाग को प्रस्तुत किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम के कार्यान्वयन एवं प्रबन्धन का कार्य पर्यटन विभाग द्वारा किया जाएगा। शोधार्थियों के चयन में होटल प्रबन्धन, खान-पान प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयुक्त पोषाहार संस्थान, मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबन्ध संस्थान, लखनऊ तथा फूड क्राफ्ट संस्थान, अलीगढ़ का भी सहयोग प्राप्त किया जाएगा।
मुख्यमंत्री टूरिज्म फेलोशिप कार्यक्रम में चयन हेतु अभ्यर्थियों को पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। कार्यक्रम के अन्तर्गत चयनित शोधार्थी की सम्बद्धता अवधि कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से एक वर्ष के लिए मान्य होगी। उत्कृष्ट कार्य के आधार पर सम्बद्धता अवधि को एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। चयनित शोधार्थियों को पारिश्रमिक के रूप में 30 हजार रुपये तथा क्षेत्र भ्रमण हेतु 10 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाएगा। शोधार्थी को एक टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा। आवास की व्यवस्था शोधार्थी द्वारा स्वयं की जाएगी।
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प्रयागराज और आगरा में इंटीग्रेटेड मैनुफैक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने भारत सरकार की अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना के अन्तर्गत प्रयागराज और आगरा में एक-एक इंटीग्रेटेड मैनुफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना हेतु राज्य सरकार, यूपीसीडा एवं केन्द्र सरकार की कार्यदायी संस्था नेशनल इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एण्ड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट (एन0आई0सी0डी0सी0 ट्रस्ट) के मध्य हस्ताक्षरित किये जाने वाले त्रिपक्षीय स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट के आलेख, यूपीसीडा और एन0आई0सी0डी0सी0 ट्रस्ट के मध्य हस्ताक्षरित किये जाने वाले द्विपक्षीय शेयर होल्डर्स एग्रीमेंट के आलेख तथा एस0पी0वी0 के गठन के लिए आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन एवं मेमोरेण्डम ऑफ एसोसिएशन के आलेख को अनुमोदित कर दिया है।
भविष्य में स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट में किसी संशोधन को करने के लिए मुख्यमंत्री जी एवं शेयर होल्डर्स एग्रीमेंट में होने वाले किसी संशोधन को करने के लिए मंत्री, औद्योगिक विकास विभाग को अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव पर भी मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है।
ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को अमृतसर-कोलाकाता इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना की रीढ़ के रूप में चयनित किया गया है। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इसके दृष्टिगत प्रदेश में 02 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स विकसित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इंटीग्रेडेट मैनुफैक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति प्राप्त होगी, औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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नोएडा सेक्टर-142 स्टेशन से बॉटेनिकल गार्डेन तक 11.56 कि0मी0 लम्बाई के एक्वा लाइन मेट्रो कॉरिडोर के प्रस्तावित विस्तार के सम्बन्ध में डी0पी0आर0 अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने नोएडा सेक्टर-142 स्टेशन से बॉटेनिकल गार्डेन तक 11.56 कि0मी0 लम्बाई के एक्वा लाइन मेट्रो कॉरिडोर के प्रस्तावित विस्तार के सम्बन्ध में डी0पी0आर0 को अनुमोदित कर दिया है। उक्त विस्तारित परियोजना परिवहन अवस्थापना को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने तथा विभिन्न परिवहन माध्यमों में निर्बाधित कनेक्टिविटी में सहयोग प्रदान करेगी। परियोजना में 08 नए एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं। इस परियोजना की कुल लागत 2254.35 करोड़ रुपये (भूमि आई0डी0सी0 एवं सभी करां सहित) है। राज्य सरकार की अंश पूंजी के सापेक्ष
573.31 करोड़ रुपये का व्ययभार का वहन नोएडा प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
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उ0प्र0 औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 में अनुमन्य वित्तीय प्रोत्साहन हेतु 09 औद्योगिक लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किए जाने सम्बन्धी उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुति अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 में अनुमन्य वित्तीय प्रोत्साहन हेतु 09 औद्योगिक लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किए जाने सम्बन्धी उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की संस्तुति को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 में अनुबन्ध वित्तीय प्रोत्साहन हेतु अर्ह औद्योगिक इकाईयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट निर्गत किए जाने की संस्तुति का अधिकार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति में निहित है। समिति द्वारा की गई संस्तुति पर मंत्रिपरिषद का अन्तिम अनुमोदन प्राप्त किए जाने की व्यवस्था है। 01 फरवरी, 2024 को सम्पन्न उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की बैठक में समिति द्वारा 09 औद्योगिक लेटर ऑफ कम्फर्ट किए जाने की संस्तुति की गई।
इनमें कनोडिया सीमेन्ट प्रा0लि0, बुलन्दशहर (मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 452.75 करोड़ रुपये), कनोडिया सीमेन्ट प्रा0लि0, प्रतापगढ़ (मेगा श्रेणीय प्रस्तावित निवेश 452.75 करोड़ रुपये), बालाजी वेफर्स प्रा0लि0, हरदोई (मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 497.24 करोड़ रुपये), बनासकांठा जिला सहकारी मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लि0, वाराणसी (सुपर मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 618.15 करोड़ रुपये), आर0ए0सी0एल0 गियरटेक लि0, अमरोहा (मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 250 करोड़ रुपये), आई0टी0सी0 लि0, हरदोई (सुपर मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 663.24 करोड़ रुपये), ए0बी0 मौरी इण्डिया प्रा0लि0, पीलीभीत (सुपर मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 1133.67 करोड़ रुपये), एच0एल0 एग्रो प्रोडक्ट्स प्रा0लि0, कानपुर देहात (मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 499.99 करोड़ रुपये) तथा श्री सीमेन्ट नॉर्थ प्रा0लि0, एटा (सुपर मेगा श्रेणी य प्रस्तावित निवेश 1016.60 करोड़ रुपये) सम्मिलित हैं। उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति की उपर्युक्तानुसार संस्तुति पर मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।
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टेक्सफेड समूह के अन्तर्गत उ0प्र0 स्टेट स्पिनिंग कं0लि0, कानपुर एवं उ0प्र0 स्टेट यार्न कं0लि0, कानपुर की बन्द पड़ी कताई मिलों की भूमि के औद्योगिक प्रयोग हेतु यूपीसीडा को निःशुल्क हस्तांतरण के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने टेक्सफेड समूह के अन्तर्गत उ0प्र0 स्टेट स्पिनिंग कं0लि0, कानपुर एवं उ0प्र0 स्टेट यार्न कं0लि0, कानपुर की बन्द पड़ी कताई मिलों की भूमि के औद्योगिक प्रयोग के लिए यूपीसीडा को निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। इसके तहत उ0प्र0 स्टेट स्पिनिंग कं0लि0 की बाराबंकी इकाई में उपलब्ध 69.86 एकड़ भूमि तथा उ0प्र0 स्टेट यार्न कम्पनी की इकाईयों क्रमशः मेजा, प्रयागराज (175 एकड़), बांदा (90 एकड़) एवं रसड़ा, बलिया (57 एकड़) भूमि यूपीसीडा को निःशुल्क उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु इन्वेस्टर्स समिट तथा ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश-विदेश के उद्यमियों को आकर्षित करने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी विगत वर्षों में सामने आये हैं। विभिन्न सेक्टरों के निवेशकों द्वारा प्रदेश में औद्योगिक इकाईयों की स्थापना के सम्बन्ध में एम0ओ0यू0 किये गये हैं।
इन इकाईयों की स्थापना हेतु प्रमुखतः भूमि एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भूमि की उक्त मांग को पूर्ण किये जाने हेतु औद्योगिक विकास विभाग के स्तर पर लैण्ड बैंक को बढ़ाये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके दृष्टिगत टैक्सफेड समूह के अन्तर्गत उ0प्र0 स्टेट स्पिनिंग कं0लि0, कानपुर एवं उ0प्र0 स्टेट यार्न कं0लि0, कानपुर की बन्द पड़ी कताई मिलों की भूमि के औद्योगिक प्रयोग हेतु यूपीसीडा को निःशुल्क हस्तांतरण का प्रस्ताव है।
विगत दो दशकों से बंद पड़ी इन कताई मिलों की निष्प्रयोज्य कुल 391.86 एकड़ भूमि के हस्तांतरण के फलस्वरूप राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास के कार्य यथाशीघ्र प्रारम्भ किये जा सकेंगे। बंद पड़ी कताई मिलों की निष्प्रयोज्य भूमि पर नई औद्योगिक इकाईयों की स्थापना की जा सकेगी। स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। उद्योगों की स्थापना होने से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
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मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 (प्रथम संशोधन-2022) के प्राविधानां के अन्तर्गत प्रदेश में 04 नए उत्कृष्टता के केन्द्रों की स्थापना हेतु आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके तहत आई0आई0टी0 रुड़की (सहारनपुर परिसर) में 5जी/6जी टेक्नोलॉजी, आई0आई0टी0 कानपुर में 5जी/6जी टेक्नोलॉजी आई0आई0एम0 लखनऊ (नोएडा परिसर) में ब्लॉक चेन तथा अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना हेतु कुल 39.96 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता (जिसमें पूंजीगत तथा परिचालन व्यय सम्मिलित है) 05 वर्षों में प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश सरकार द्वारा उत्त

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