दुष्कर्म मामले में दोषी पाया गया पवन कुमार,  मिली उम्रकैद की सजा

HIGHLIGHTS

• 35 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी

• अर्थदंड की धनराशि में से 28 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी

• सवा दो वर्ष पूर्व अपहरण कर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ हुए दुष्कर्म का मामला

सोनभद्र। सवा दो वर्ष पूर्व 16 वर्षीय नाबालिग  लड़की का अपहरण कर उसके साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट सोनभद्र अमित वीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर  दोषी पवन कुमार को उम्रकैद एवं  35 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से  28 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी।

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक दुद्धी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने दुद्धी थाने में दी तहरीर में अवगत कराया था कि  उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी जो कक्षा 9 में पढ़ती थी को 17 मार्च 2022 की रात में जब वह रोज की तरह अपने कमरे में पढ़ रही थी और घर के सभी सदस्य खा पीकर सो रहे थे तभी रात्रि में राजन कुमार पुत्र भूपेंद्र कुमार उर्फ बबलू भारती निवासी अमावट, थाना दुद्धी, जिला सोनभद्र, पवन कुमार पुत्र देवनाथ निवासी बैरखड़,थाना विंढमगंज, जिला सोनभद्र

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और दो- तीन लोग अज्ञात उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर ले गए और उसके साथ बलात्कार करके रात में बेटी को दरवाजे के बाहर बेहोशी हाल में छोड़ कर भाग गए। बेटी को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र दुद्धी में दवा इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इस तहरीर पर पुलिस ने 18 मार्च 2022 को अपहरण, बलात्कार और पाक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दिया। दौरान विवेचना विवेचक ने बयान लेने के बाद  पर्याप्त सबूत मिलने पर राजन कुमार और पवन कुमार जो आपस में ममेरा – फुफेरा भाई हैं के विरुद्ध कोर्ट में अपहरण, दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट में  चार्जशीट दाखिल किया था। किंतु राजन कुमार की उम्र 18 वर्ष से कम होने की वजह से उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।

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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी पवन कुमार को उम्रकैद एवं   35 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।  वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 28 हजार रूपये पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।

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