श्रद्धा और भक्ति से हम भगवान को प्रकट कर सकते हैं: आचार्य मनोहर कृष्ण जी महाराज

सोनभद्र। राबर्ट्सगंज नगर स्थित श्री राम जानकी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की शाम कथा व्यास वृंदावन से पधारे आचार्य मनोहर कृष्ण जी महाराज  ने कहा कि भजन करने की कोई उम्र नहीं है, जब चाहें श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान की भक्ति करके भगवान को हम प्रकट कर सकते हैं।  वामनदेव भगवान की झांकी सजाई गई । इस दौरान समूचा कथा पांडाल जयकारे से गुंजायमान हो गया। वामनदेव भगवान का दर्शन करने के लिए भक्तगणों का तांता लगा रहा।

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आचार्य जी ने सती चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव जी महाराज 5 वर्ष की अवस्था में ही वन में जाकर के 5 महीने कठोर तपस्या करके भगवान नारायण को प्रकट किया। आगे चलते हुए भक्त प्रहलाद साढ़े सात वर्ष की अवस्था में ही नरसिंह भगवान को प्रकट कर लिया।

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इसलिए भजन करने का कोई उम्र नहीं है, कोई अवस्था नहीं है। जब चाहें श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान की भक्ति करके भगवान को हम प्रकट कर सकते हैं। आचार्य जी ने यह भी बताया कि गजेंद्र उपाख्यान गजेंद्र की 100 पत्नियां, हजार पुत्र थे, लेकिन अंतिम समय में ना पुत्र साथ दिए और ना पत्नी ही साथ दी। जीव अकेले आया है और अकेले ही जाएगा। इसलिए हमेंशा कोई भी काम करें दूसरे के आश्रित होकर के ना करें।

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उन्होंने वामन अवतार का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भगवान वामन देवताओं की कार्य सिद्धि करने के लिए राजा बलि के द्वार पर जाकर के तीन पग पृथ्वी का दान मांगा,  दो ही पग में सारे संसार की वस्तु को नाप लिया और तीसरा पैर वावन भगवान राजा बलि के ऊपर रखकर  कृपा किया और राजा बलि के द्वार पर चौकीदार बनकर के पहरा देते हैं । भगवान अपने भक्तों के अधीन  हैं ,भक्त जैसा चाहे भगवान उसके ऊपर कृपा जरुर करते हैं।

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उधर वामनदेव भगवान के प्रकट होते ही जयकारे से समूचा कथा पांडाल गुंजायमान हो गया। वामनदेव भगवान का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। बीच बीच में भजन संध्या में भक्तगण डुबकी लगाते रहे। अंत में आरती के साथ ही  प्रसाद वितरण किया गया।

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कथा में ओम प्रकाश पाठक, महेंद्र प्रसाद शुक्ला, आशुतोष पाठक, अजीत शुक्ला, कौशलेश पाठक, धीरज पांडेय, विजय कानोडिया, सुशीला देवी, कमलेश सिंह, जेबी सिंह आदि भक्तगण मौजूद रहे।

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