
आंतरिक आनंद स्वयं के भीतर से आनंद की अनुभूति एवं पछतावे से ऊपर जीवन जीना है। जो व्यक्ति आंतरिक आनंद की यात्रा के सफर में हैं या नए-नए मुसाफिर हैं वह इस यात्रा के नियमों एवं आनंद से स्वयं को परिपूर्ण करने की ओर अग्रसर हैं।

अव्यवस्थित खानपान, तनावपूर्ण दिनचर्या, दूसरों के प्रति द्वेष भावना, पछतावे में जलना, इत्यादि इत्यादि आज के मनुष्य के जीवन में जल की जैसी आवश्यकता जैसा हो गया है। मनुष्य भीतर से ना तो आनंदित है और ना ही मानसिक रूप से स्वस्थ। आंतरिक आनंद आपके बाह्य जीवन को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ आपके जीवन में एक नवीन सकारात्मक ऊर्जा का संचार है जोकि आपके जीवन के प्रति रचनात्मक, कलात्मक एवं सार्थकता प्रदान करता है।

भागते दौड़ते जीवन में मनुष्य को स्वयं के आंतरिक पोषण के लिए समय की आवश्यकता है जो कि उसके जीवन को संतुलन प्रदान कर सके जिससे कि जीवन में मानसिक विकास उत्पन्न ना हो और कई प्रकार की शारीरिक रोगों से भी रक्षा हो सके।






















