मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का संबंध सोनभद्र से रहा है- दीपक

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HIGHLIGHTS

  • एक रात्रि विश्राम किया था शोण महानद के तट पर
  • वनागमन के समय सोनभद्र का पहाड़ी मार्ग अपनाया था
  • घोरावल के मुख्यफाल की गुफा में कुछ दिनों तक वनवासी श्री राम ने किया था विश्राम
  • लंका विजय के पश्चात कर्णावती एवं गंगा नदी के संगम तट परअपने पिता राजा दशरथ का किया था पिंडदान
  • मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से संबंधित स्थलों पर रामशिला स्थापना की मांग।



सोनभद्र। भारतीय संस्कृति के प्रतीक, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के महानायक मर्यादा पुरुषोत्तम राम वर्तमान सोनभद्र से संबंध रहा है। इसी क्षेत्र से श्रीराम का परमार्थ कार्य शुरू हुआ था।

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केंद्र सरकार द्वारा संचालित रामायण कलचर मैपिंग योजना, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के विशेषज्ञ, इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“
महाकाव्य रामायण के बालकांड में वर्णित है कि अंगदेश, मलय, करुष, तड़का वन में रहने वाले राक्षसों के उत्पात, यज्ञ विध्वंस से दुखी होकर महर्षि विश्वामित्र द्वारा अयोध्या नरेश के पुत्र राजकुमार श्रीराम एवं लक्ष्मण को अपने साथ राक्षसों के दमन के लिए ले गए जहां पर राजकुमार श्रीराम ने तड़का राक्षसी सहित अनेको राक्षसों का वध किया था।

दीपक कुमार केसरवानी
इतिहासकार
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इसके पश्चात मिथिला जाते समय एक रात्रि शोण महानद के तट पर पर रात्रि प्रवास किया था। यही से मिथिला में राजा जनक द्वारा आयोजित धनुष यज्ञ में भाग लेने महर्षि विश्वामित्र के साथ राजकुमार श्रीराम एवं लक्ष्मण पहुंचे थे।
वनवास काल में राजकुमार श्री राम, भार्या सीता अनुज लक्ष्मण के साथ अयोध्या, श्रृंगवेरपुर, प्रयागराज से होते हुए विंध्य पर्वत पार कर सोनभद्र जनपद के घोरावल तहसील के शोण महानद के तट अवस्थित शिल्पी गांव के पास प्राचीन मार्ग से रामेश्वरम गए थे।

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लोकमान्यता है कि बेलन नदी के तट पर अवस्थित मुक्काफाल में आदिम मानव द्वारा चित्रांकित गुफाओं में कुछ दिनों तक वनवासी राम ने भार्या सीता अनुज लक्ष्मण के साथ विश्राम भी किया था। इस गुफा को स्थानीय जन सीता रसोइया की संज्ञा देते हैं। गए थे।

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इसके साथ-साथ सोनभद्र जनपद के भौगोलिक क्षेत्रफल पर अवस्थित आदिम कलाओं से चित्रांकित सीताकुंड, सीता कोहबर नाम वाली गुफाएं, कंदराएं बनवासी राम से जुड़े स्थल, सोनभद्र जनपद के लोक में गाए जाने वाले लोकगीतों, सुनाए जाने वाले लोककथाओं से बनवासी राम के इस क्षेत्र में आगमन की पुष्टि होती हैं ।

बाल्मिकीकृत रामायण के अनुसार वानर राज सुग्रीव के बताए हुए दक्षिण दिशा में तार अंगद आदि श्रेष्ठ वानरों ने यहां की गुफाओं, कंदराओं,जंगलों पर्वतों, नदियों, सरोवरों, झाड़ियो में भगवती सीता को ढूढा सीता को न पाकर निराश लौट गए थे।

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लंका विजय के पश्चात पुष्पक विमान से लौटते समय भगवान श्रीराम का पुष्पक विमान विंध्य पर्वत पर कुछ दिनों के लिए रुका था, वर्तमान विंध्याचल के पश्चिम कर्णावती- गंगा नदी के संगम तट पर विजयी श्रीराम ने अपनी दिवंगत पिता चक्रवर्ती राजा दशरथ का पिंडदान किया था इसे राम गया कहा जाता है, यहीं पर एक कुंड एवं शिवलिंग भी स्थापित किया था।

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अष्टभुजा मंदिर से पश्चिम भगवती सीता ने अएक कुंड की खुदाई किया था, जिसे सीता कुंड की संज्ञा दी गई है, राम भक्त हनुमान ने सीता कुंड के पास लंकेश शिवलिंग भी स्थापित किया था। इसके पश्चात पुष्पक विमान अयोध्या के लिए प्रस्थान किया था।

राज्याभिषेक के पश्चात स्वर्गारोहण के पूर्व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जेष्ठ पुत्र लव को उत्तरी कोशल जिसकी राजधानी कुशावती थी, उत्तरी कोशल का राज्य कनिष्ठ पुत्र लव को प्रदान किया था उत्तरी कोशल सोनभद्र के सीमावर्ती राज्य छत्तीसगढ़ के रायपु/र बिलासपुर और उत्तरी कोशल सोनभद्र जनपद के सीमा में अवस्थित था।

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त्रेता युग में विंध्य पर्वत के दक्षिण से लेकर गोदावरी नदी के पश्चिमी तट (इसके अंतर्गत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश राज्य के भूभाग आते हैं) तक दंडकारण वन विस्तृत था।

इसी क्षेत्र में ऋषि शारभंग, महर्षि अगस्त, अत्रि ऋषि, गौतम ऋषि, सती अनुसुइया, ऋषिमुक पर्वत, चित्रकूट, पंचवटी आदि रामायण में वर्णित स्थल अवस्थित थे, बनवासी राम, भार्या सीता, अनुज लक्ष्मण के साथ 10 वर्षों से अधिक समय यहां पर व्यतीत किया था।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा उत्तर प्रदेश के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम से संबंधित स्थलों पर रामशिला स्थापित कराने की योजना है, इस शिला पर संबंधित स्थलों एवं राम से जुड़ी घटनाओं को उत्तीर्ण कराया जाना है। सरकार द्वारा जिला प्रशासन एवं स्थानीय विद्वानों, इतिहासकारो, शोधकर्ताओं के सहयोग से भगवान श्रीराम से जुड़े हुए स्थलों
पर शोध कार्य कराते हुए चिन्हित स्थानों पर रामशिला की स्थापना कराई जाए, ताकि सोनभद्र एवं मिर्जापुर जनपद रामपथ से जुड़ सके। पर्यटक इस महत्वपूर्ण स्थलों से परिचित हो सके।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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