हर्षवर्धन केसरवानी
राबर्ट्सगंज (सोनभद्र): श्री रामचरितमानस नवाह पाठ महायज्ञ के द्वितीय दिवस के अवसर पर श्री राम जन्मोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया-
नवमी तिथि मधुमास पुनीता। शुक्ल पक्ष अभिजीत हरिप्रीता मध्य दिवस अति शीत न घामा। पावन काल लोक विश्रामा।
दीनों पर दया करने वाले कौशल्या जी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रगट हुए- भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी। हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप निहारी। लोचन अभिराम तनु घनश्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषण मन वनमाला नयन भूषण वनमाला नैन विशाला शोभा सिंधु खरारी।


व्यास आचार्य सूर्य लाल मिश्र के मुखारविंद से निकले इसी छंदों के साथ श्रीराम का जन्म हुआ। श्री सालिक राम को पाल पालने में झूला कर जन्म उत्सव की झांकी दिखाई गई, यजमान पंकज कानोडिया सहधर्मीणी निक्की कानोडिया ने पालने की डोर पकड़ कर रस्म निभाई।
इस अवसर पर मानस पांडाल में राम जन्म उत्सव की झांकी सजाई गई, मुद्राएं एवं खिलौने लुटाए गए और सोंठ के लड्डू बांटे गए, पटाखे भी छुड़ाए गए।
इसके एक दिन पूर्व रात्रि प्रवचन के प्रारंभिक क्रम में गोरखपुर से पधारे सुप्रसिद्ध प्रवचन कर्ता हेमंत त्रिपाठी ने शिव विवाह तथा नारद मोह की कथा सुनाते हुए कहा कि विवाह तो बहुत हुए हैं लेकिन शिव विवाह समाज के लिए अनुकरणीय है। शिव ने ससुर का पैर नहीं छुआ इसी के कारण दक्ष प्रजापति ने दमाद को समाज में झुका राजा लेकिन भगवान शिव ने इस परंपरा को तोड़ते हुए यह संदेश दिया कि जिसका एक बार पाव पूज लिया जाय उल्टा उससे पैर छुआने पर ससुर का विनाश ही होता है।

वही काशी से आए हुए पंडित विद्याशंकर पांडे व अयोध्या से पधारे मधुसूदन शास्त्री ने नारद मोह पर बोलते हुए कहा कि जैसे नारद को मोह हुआ उसी तरह मनीष भी मोह पास में बंध जाता है। तो भगवान उसका चेहरा ही बिगाड़ देते हैं।
मंच का संचालन आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने किया इस अवसर पर मुख्य व्यास, मंच आचार्य, पाठ कर रहे भू देवों के साथ मंच पर उपस्थित अध्यक्ष सत्यपाल जैन, महामंत्री सुशील पाठक, राकेश त्रिपाठी, धर्मवीर तिवारी, अरविंद खंडेवाल, गुल्लू भंडारी अजीत सिंह भंडारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।




















