- खुद को बदलने और दिशा तय करने का उम्र है किशोर अवस्था
संतोष दयाल
म्योरपुर,सोनभद्र। ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित सामाजिक संस्थान बनवासी सेवा आश्रम में गुरुवार को तीन दिवसीय किशोर किशोरी सहजीवन आवासीय शिविर का उद्घाटन वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने दीप प्रज्वलित कर किया।

शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह उम्र खुद को बदलने और आत्म निर्भर से स्वावलंबन की राह दिखाता है।अच्छा करें और सबका आदर करते हुए समाज में भाई चारा बना रहे इसकी सोच पैदा करनी चाहिए।उन्होंने ने कहा की पहले ज्ञान झोपड़ी में रहने वाले देते थे।जिसका अनुसरण कर राजा प्रजा की भलाई के लिए काम करते थे।

आज ऐश्वर्य और दिखावा पन के बीच ज्ञान का भंडार खुद की लड़ाई लड़ रहा है ।और जब जिमेदार अधिकारी हो या नेता या कोई भी जब खुद की झोली भरने लगते है तो वह देश खुशहाल नही होता।बल्कि उस देश में गरीबी,बेरोजगारी और भुखमरी जन्म लेती है। एम पी उमरिया से आए जाने माने समाज कर्मी,गांधी विचारक लेखक संतोष द्विवेदी ने कहा कि शिशु ,बाल्यावस्था के बाद किशोर उम्र ने शारीरिक मानसिक परिवर्तन आता है यह जीवन का अहम उम्र होता है।


जब हम खुद के और घर परिवार के बारे में सोचने लगते है कुछ जिमेदारिया समझने लगते है और निर्णय भी लेने लगते है।इस उम्र में जो आप का जीवन का लक्ष्य होता है वह शुरू होने लगता है ऐसे में अच्छा बनने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए अच्छा सोच पैदा करे। किताबे पढ़े ,छोटे छोटे काम जो आप से संभव है उसे जरूर करे।कपड़ा खुद धोए पानी खुद पिए,सफाई करे और पढ़ाई के साथ घर पर अध्ययन करने की आदत डाले। तो आप का आने वाला जीवन आसान होगा।
शिविर में चोपन, कोन,दुद्धी,म्योरपुर,बभनी के लगभग 80 छात्र प्रतिभाग कर रहे है।प्रशिक्षक श्री मोहन शुक्ल, राम जतन शुक्ला और प्रेम दयाल ने बताया कि शिविर में खेल गीत,नुक्कड़ नाटक, गांव की समस्याओं पर अध्ययन ,के साथ श्रम के प्रति निष्ठा पैदा करने के लिए श्रम दान जैसे विषय शामिल है जिससे किशोरो का व्यक्तित्व विकास हो । मौके पर यशस्वी पाण्डे,मीना अमरजीत वर्मा, आदि उपस्थित रहे।



















