सोनभद्र जनपद में तसर रेशम उत्पादन की असीम संभावनाएं- डा० एन.बी.चौधरी

संतोष दयाल

सोनभद्र। डा०बी० एन चौधरी निदेशक केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (केन्‍द्रीय रेशम बोर्ड) रांची केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रांची द्वारा राजकीय तसर रेशम फार्म मुनगाडीह जनपद सोनभद्र में “तसर कीटपालन पर जागरूकता एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन कार्यक्रम” आयोजित किया गया।

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इस कार्यक्रम के तहत किसान चौपाल का आयोजन किया गया जिसमें तसर कृषकों को नवीनतम तकनीकियों के बारे में जागरूक किया गया एवं परिचर्चा किया गया। डा. एन.बी. चौधरी निदेशक केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रांची ने तसर रेशमकीट में होने वाली बीमारियों से बचाव के बारे में बताया एवं उत्पादकता बढ़ाने की अपील किया।

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रणबीर सिंह सहायक निदेशक राज्य रेशम विभाग ने किसानों की आय बढ़ाने हेतु सहखेती पर प्रकाश डाला। डा जयप्रकाश पांडेय वैज्ञानिक डी ने तसर कीटपालन के दौरान प्रक्षेत्र विसंक्रमण की महत्ता व डिजीज मॉनिटरिंग के बारे में बताया। डा भूपेंद्र सिंह बी. एच.यू.वाराणसी ने विषाणु जनित रोगों पर शोध की आवश्यकता पर ध्यान आकृष्ट किया। डा जगदज्योति वैज्ञानिक सी ने वैज्ञानिक विधि से तसर की खेती करके उत्पादन बढ़ाने पर प्रकाश डाला।

पंकज कुमार,सहायक रेशम विकास अधिकारी ने तसर फार्म के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में बैठक के दौरान तसर उत्पादन में वृद्धि हेतु कार्ययोजना पर मंथन किया गया । निदेशक ने कहा कि हमें प्रक्षेत्र पर इस बात का पता लगाना होगा कि उत्पादन बढ़ाने के प्रमुख अवयव क्या हैं। हमें अपने अनुसंधानों को इसी पर केंद्रित करते हुए आगे कार्य करना होगा ।

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उन्होंने वैज्ञानिकों को परामर्श दिया कि वह राज्य रेशम विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का फील्ड में अनुप्रयोग करना सुनिश्चित करें । साथ ही साथ तसर अनुसंधान के क्षेत्र की बारीकियों का अध्ययन करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य अनुसंधान के माध्यम से ग्रामीण आदिवासी आबादी की आजीविका में वृद्धि करना है।

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सहायक निदेशक श्री रणबीर सिंह ने राज्य रेशम की गतिविधियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया तथा उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य रेशम विभाग तसर उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा और निश्चित रूप से आगामी समय में हम तसर रेशम का उत्पादन बढ़ाने में सक्षम होंगे। कार्यक्रम का संचालन डा. जयप्रकाश पांडेय वैज्ञानिक डी ने किया। इस अवसर पर लगभग 45 कृषकों ने सहभागिता किया।

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