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- रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को दिया जायेगा अर्घ्य
नीरज गुप्ता
बीजपुर, सोनभद्र। लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत शुक्रवार से नहाए खाए से शुरू हो गई है छठ व्रत करने वाली महिलाओं ने विधि विधान से नहाए खाए की पारंपरिक रस्म निभाई। व्रती महिलाओं ने सुबह जलाशयों और घरों में स्नान के बाद शाम को कुट्टू चावल पका कर खाया शनिवार को खरना से निर्जल उपवास शुरू करेंगी। रविवार को अस्ताचलगामी और सोमवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत का पारण होगा।


छठ पूजा सामाग्री की खरीदारी के लिए शुक्रवार से ही पूरे दिन बाजारों में चहल-पहल रही शनिवार को भारी भीड़ लगी रही।साथ ही छठ घाटों पर पूरे दिन साफ सफाई लाईट आदि की व्यवस्था हेतु श्रद्धालुओं के साथ जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता घाटों की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त करने में लगे रहे।

बीजपुर स्थित दुधहिया देवी मंदिर, बाजार सब्जी मंडी तथा एनटीपीसी आवासीय परिसर स्थित लेक पार्क,शिव मंदिर समेत आस पास के गांवों में विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु छठ घाटों पर पूजा वेदी बनाते नजर आए।मान्यता है कि घर में किसी मांगलिक आयोजन या किसी मन्नत के पूरा होने के बाद छठ पर कोसी भरी जाती है क्षेत्र के विभिन्न गली मोहल्ले व गांव के घरों में कोसी भरने की तैयारी है इसे लेकर परिजनों में जोरो से तैयारी चल रही है।

घर पर कोसी भरने में उपयोग में लाया जाने वाला मिट्टी का हाथी,कलश,दीए, गन्ना, फल आदि सामान जुटाने में लोग लगे रहे।इस महापर्व में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है घर की साफ सफाई भी अच्छे तरीके से की जाती है।श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से छठ व्रत रखने से मनोकामना जरूर पूरी होती है। जिसकी मनोकामना पूरी होती है।मनोकामना पूर्ण होने पर बहुत से लोग घाटों पर दंडवत करते हुए पहुंचते हैं।




मान्यता है कि भगवान सूर्य और माता छठ को समर्पित छठ व्रत का शुभारंभ रामायण काल से हुआ माता सीता ने इस व्रत को अपने पुत्रों को दीर्घायु के लिए किया था मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में द्रोपदी के छठ व्रत के परिणाम स्वरूप पांडवों को राजपाट वापस मिला था।






























