सोनभद्र में सोन विश्वविद्यालय की हो स्थापना – एड पवन कुमार

सोनभद्र। अलग पूर्वांचल राज्य की मांग कर रहे संगठन पूर्वांचल राज्य जनमोर्चा की बैठक तहसील परिसर राबर्ट्सगंज के अधिवक्ता भवन में जिला जिला बार एसोसिएशन सोनभद्र के उपाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह एड की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

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मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव एड पवन कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मिर्जापुर में राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। कायदे से यह विश्वविद्यालय सोनभद्र मुख्यालय पर विश्वविद्यालय के रूप में बनना चाहिए। क्योंकि सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली तीनों जिले नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल रह चुके हैं। तीनों जिले उत्तर प्रदेश के आदिवासी एवं पिछड़े जिलों में शुमार हैं। सोनभद्र अभी भी केंद्र सरकार से इसके लिए अनुदान लेता है।

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उत्तर प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र का पुलिस मुख्यालय सोनभद्र में है। यह जनपद सोनभद्र चार राज्यों बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भी जुड़ता है। शिक्षा के मामले में सोनभद्र उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से पीछे है। सोनभद्र जिले की एक-चौथाई आबादी आदिवासियों की है जो राज्य के सभी जिलों से सबसे ज्यादा है। यहां उच्च शिक्षा के लिए पूर्ववर्ती सरकारों की ओर से केवल तीन राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना की गई है। लेकिन इसका फायदा यहां के आदिवासी और दलित समुदाय को बहुत अंधिक नहीं मिल पाता है।

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प्रदेश सचिव नवीन कुमार पांडेय ने कहा कि मिर्जापुर के बरकछा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का राजीव गांधी दक्षिणी परिसर है जहां दो दर्जन से ज्यादा विषयों की पढ़ाई होती है। मिर्जापुर में ही दो बड़े अनुदानित महाविद्यालय हैं। इस जिले में राजकीय और अनुदानित महाविद्यालयों की संख्या दो दर्जन के करीब है। निजी महाविद्यालयों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। मिर्जापुर से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर वाराणसी और प्रयागराज है जहां केंद्रीय विश्वविद्यालय और राज्य विश्वविद्यालयों के साथ दर्जनों बड़े-बड़े महाविद्यालय हैं जहां अलग अलग विभागों के भवन हैं।

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शिक्षा और आवागमन के संसाधनों के लिहाज से भी मिर्जापुर सोनभद्र से कहीं ज्यादा आगे है। इसलिए जरूरी है कि राज्य सरकार मिर्जापुर में स्थापित करने जा रहे विश्वविद्यालय को सोनभद्र में स्थापित किया जाय ! जिससे इसका फायदा सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली के आदिवासी बहुल पिछड़े एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सामुहिक रूप से मिलेगा।

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आदिवासी और दलित समुदाय अभी भी बाहर पढ़ने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। इस अवसर पर काकू सिंह, संतोष चतुर्वेदी, पवन कुमार दिवेदी, संतोष सिंह पटेल, रामगोपाल दुबे, रमाशंकर यादव, गिरिजा पटेल, जगदीश प्रसाद, फूल सिंह एड, सुरेश कुशवाहा आदि लोग मौजूद थे !

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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