वाराणसी। मंगलवार को उ0प्र0 लोक एवं जनजाति कला संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग), उत्तर प्रदेश सरकार एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में संस्थान परिसर में जंगो लिंगो लाटी गोंगो एवं गोंडवाना संस्कृति दशहरा महोत्सव, येरोमान (कुवांर मांस) उजियारा पाख दशमी पर्व का आयोजन किया गया।

महोत्सव के अन्तर्गत जंगो लिंगो लाटी देवता अर्थात प्रकृति चक्र-जल- जंगल-जमीन की संस्कृति विकास एवं संरक्षण हेतु विशेष अनुष्ठान के द्वारा गोंड आदिवासी समाज अपने 750 टोटम चिन्ह की स्थापना फड़ापेन एवं नारूंग दाई की सुमिरनी कर करते है। विश्व की अतिप्राचीन गोंगों (पूजा) जन समुदाय के कल्याण की मंगल कामना से करते है। आदिवासी समाज दशों दिशाओं (दशहरा) में अपनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सगा संग्गुम के बीच रीति-रिवाज के साथ नये सम्बन्धों के गोत्रां को देव भीड़ी (परिवार मिलन) के माध्यम से जोड़ा जाता है।

इस अवसर पर आदिवासी समाज अपने पुरखा-पेन राजाओं के शौर्य को गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते है। जंगो लिंगो लाटी गोंगो एवं गोंडवाना संस्कृति दशहरा महोत्सव, येरोमान (कुवांर मांस) उजियारा पाख दशमी पर्व का सफल आयोजन में जनजाति कला संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग), उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम संयोजक बृजभान मरावी रहे।

महोत्सव में डॉ. बनवारी लाल गोंड, अध्यक्ष-जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, भूमका सुखु सिंह मरावी, विनोद शाह, महेन्द्र पटेल, बाबू लाल, आकाश मौर्य, विरेन्द्र कुमार, छम्मन यादव, सुंदर पटेल, अलगू पासवान, राजेश कुमार यादव, चहेटू गोंड, राजू गोंड, राकेश कुमार, प्रितम गोंड, लाल बहादूर गोंड, दिनेश कुमार, बलिराम, गुड्डू गोंड, पूजा, अनिता गोंड आदि सहित सैकड़ों आदिवासी समुदाय एवं अन्य लोग उपस्थित रहें।











