पावन खिंड दौड़ के प्रतीकों का अनावरण 26 अक्टूबर को

HIGHLIGHTS

  • लोगो, पोस्टर सहित तीन गीत रिलीज होंगे
  • मुख्य दौड़ का आयोजन 16 नवंबर को
  • एशियन गेम पदक विजेता रामबाबू का होगा अभिनंदन



सोनभद्र। पावन खिंड दौड़ महाआयोजन के प्रतीकों का अनावरण 26 अक्टूबर को शहीद उद्यान में किया जाएगा । इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। क्रीड़ा भारती के प्रांत अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि इस अवसर पर सोनभद्र की सांस्कृतिक विरासत और पावन खिंड के शौर्य को प्रकट करते तीन गीत भी रिलीज किए जाएंगे। इस अवसर पर एशियन गेम विजेता रामबाबू भी सम्मानित किए जाएंगे।

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सोनभद्र में पावन खिंड दौड़ के आयोजन के निमित्त पंद्रह दिन पूर्व रचनाकारों से थीम सांग और कविताएं आमंत्रित की गई थीं, कुल 46 प्राप्त रचनाओं में निर्णायक मंडल द्वारा जयश्री राय , कमलेश राजहंस , डॉ लखन राम जंगली और भोजपुरी में छोटेलाल खरवार के गीतों का चयन किया गया है। इन गीतों को अभिषेक मिश्रा व रागिनी द्वारा स्वर और विभन्न संगीतकारों ने गीतों की कम्पोजिंग और संगीत दिया है। छोटेलाल खरवार के गीत को उन्होंने स्वयं स्वर दिया है साथ ही विडियो में अभिनय भी किया है।

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श्री श्रीवास्तव ने बताया की इस अवसर पर रवि शंकर चतुर्वेदी द्वारा निर्मित वेबसाईट का शुभारंभ भी किया जाएगा । इसी वेबसाईट से दौड़ के प्रतिभागी अपना पंजीकरण भी कर सकेंगे। आयोजन के पोस्टर की डिजाइनिंग अरविंद वाष्णेय द्वारा की गई है।

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आयोजन की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए भोलानाथ मिश्र ने बताया कि प्रतिभागियों को बलिदानी भूमि की मिट्टी से बने चंदन का टीका लगाया जाएगा, इस क्रम में शहीद उद्यान, झांसी से रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान स्थल, प्रयागराज से चंद्रशेखर आज़ाद पार्क , चौरी चौरा और महाराष्ट्र से पावन खिंड की पवित्र मिट्टी सोनभद्र आ चुकी है। 26 अक्टूबर को ही डा. अनिल श्रीवास्तव देश के प्रमुख स्थलों की मिट्टी आयोजन समिति को सौंपेंगे जिसे वे कश्मीर से कन्याकुमारी की मोटरसाइकिल से यात्रा कर ले आए हैं।

क्यों प्रसिद्ध है पावन खिंड

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित पावन खिंड नामक स्थान पर छ्त्रपति शिवाजी के 300 सैनिकों का बलिदान हुआ , वे सभी मराठा सैनिक बाजीप्रभु देशपांडे के नेतृत्व में मुगलों की पंद्रह हजार सेना से मोर्चा ले रहे थे, मराठा सैनिकों का लक्ष्य छत्रपति शिवाजी को सुरक्षित विशालगढ़ किले पर पहुंचने तक मुगल सेना को रोककर रखना था।

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मुट्ठी भर मराठा सैनिकों ने डेढ़ हजार मुगल सैनिकों को मौत के घाट भी उतार दिया, मूसलाधार बरसात और संकरे रास्ते में चारों ओर से घिरे मराठा सैनिक तब तक युद्ध करते रहे जब तक शिवाजी विशालगढ़ किले तक नहीं पहुंच गए, जैसे ही शिवाजी ने किले पर पहुंच कर तोप का गोला दागकर सुरक्षित पहुंचने का संकेत दिया पहले से सैकड़ों घाव से घायल मराठा सैनिकों ने प्राण त्याग दिए, उनके त्याग और बलिदान से पावन खिंड की मिट्टी का एक एक कण पवित्र हो उठा।

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संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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