डाला, सोनभद्र। नगर के श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर में चल रही मानस कथा के चौथे दिन बरेली से पधारे कथा ऋषि व्यास पंडित उमाशंकर महाराज ने श्री रामचरितमानस के उत्तरकांड का प्रसंग सुनाया जिसमें उन्होंने बताया की गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में काकभुशुण्डि जी का बड़ा सुंदर वर्णन किया है। शास्त्रों में काकभुशुण्डि परमज्ञानी और रामभक्त बतलाया गया है।

श्रीराम और रावण के युद्ध में जब रावण पुत्र मेघनाद ने श्रीराम को नागपाश से बांध दिया था तब गरूड़ जी को संदेह हो गया नारद मुनि के कहने पर गरुड़जी ने श्रीराम को नाागपाश के बंधन से मुक्त करवाया था। श्रीराम के इस तरह नागपाश में बंध जाने से गरुड़जी को उनके अवतारी होने पर संदेह हो गया था। तब उनका संदेह दूर करने के लिए नारदजी ने उनको ब्रह्मा जी के पास भेजा। ब्रह्मा जी ने उनको महादेव के पास भेज दिया। महादेव ने गरुड़ के संदेह को दूर करने के लिए उनको काकभुशुण्डि जी के पास भेज दिया। अंत में काकभुशुण्डि ने श्रीराम का चरित्र गरुड़जी के सुनाकर उनका संदेह दूर किया।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद से नरसिंह त्रिपाठी ने कथा वाचक का माल्यार्पण कर स्वागत किया, वहीं कथा में मंदिर के महंत पं श्री मुरली तिवारी,पं ओमप्रकाश तिवारी,चंद्र प्रकाश तिवारी, मनोज तिवारी, जोगेंद्र उर्फ गुड्डू पटेल, राजू शुक्ला आदि रामभक्त शामिल रहे।












