सोनभद्र। जिले में बैठे स्वास्थ्य अधिकारियों की वजह यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई है। जहां एक तरफ जिले में बड़े पैमाने पर डेंगू के मरीज निकल रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जिले में ही बड़े पैमाने पर अवैध पैथालॉजी सेंटरों से जारी हो रही फर्जी रिपोर्ट ने जिले की स्थिति और भी खराब कर दी है । जिसकी वजह से अदृश्य बुखार का कहर सोनभद्र के ग्रामीण अंचलों में भरमार है । नगवा ब्लाक के सुदूर पहाड़ी अंचल मऊ, धर्मदासपुर, गढ़वाल, मगरदा, रामपुर सोम सफारी में भी अदृश्य बुखार और डेंगू से लोग प्रभावित हैं लेकिन समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है ।

और यही कारण है कि जिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी-पीएससी में मरीजों की लाइन देखने की मिल रही है । इतना ही नहीं जिला चिकित्सालय में आए मरीज को जबरिया रेफर कर दिया जा रहा है ।
यह कहना है भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी का । उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्साधिकारी और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि गरीबों को सरकार द्वारा दी जाने वाली चिकित्सी सुविधा उपलब्ध कराने में भी अधिकारी नाकाम साबित हो रहे हैं । इससे यही प्रतीत होता है कि अधिकारियों द्वारा सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ धर्मवीर तिवारी ने कहा कि जब से मेडिकल कॉलेज बना है तब से जिला चिकित्सालय की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर चुके हैं वहीं दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां को नजरअंदाज करते हुए पीएचसी-सीएचसी सेंटरों की दुर्व्यवस्था इतनी बढ़ गई है कि डॉक्टर मरीज को उपचार किए बिना छोड़ दे रहे हैं । पीएचसी-सीएचसी सेंटर रेफर सेंटर बनकर रह गया । और जिन मरीजो को देखा जा रहा है उन्हें समुचित दवाएं नहीं दी जा रही हैं। बार-बार शिकायत करने पर भी गरीबों को चिकित्सी सुविधा नहीं मिल पा रही है ।

जबकि सरकार द्वारा तमाम सुविधाएं और नि:शुल्क जनरिक दवाएं उपलब्ध होने के बाद भी इन डॉक्टरों के द्वारा मरीजों को नहीं दी जा रही है । और यही कारण है कि मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ रुख कर रहे हैं ।
डॉ धर्मवीर तिवारी ने कहा कि जिले की दुर्व्यवस्था के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला चिकित्सालय के प्राचार्य पूरी तरह से जिम्मेदार हैं । उन्होंने जिलाधिकारी महोदय से आग्रह किया है कि ऐसे लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि गरीब मरीजों को चिकित्सी सुविधा जो सरकार द्वारा दी जा रही है उसे उपलब्ध कराया जा सके ।










