महात्मा गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक है -अरविंद अंजुम


सोनभद्र। महात्मा गांधी की 154 जयंती के अवसर पर जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में विमर्श संस्था की ओर से “गांधी जी की विरासत वर्तमान समय में गांधी विचारों की प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एवं चिंतक अरविंद अंजुम ने कहा कि-” महात्मा गांधी के विचार कल भी प्रसाद प्रासंगिक थे, आज भी हैं, और कल भी रहेंगे, महात्मा गांधी ने पूरे विश्व को विचारों की विरासत प्रदान किया है, जिसे दुनिया की कोई भी ताकत नहीं मिटा सकती ना कोई हथियार नष्ट कर सकता है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध लोक साहित्यकार डॉ अर्जुन दास केसरी ने कहा कि-” महात्मा गांधी की आर्थिक नीति, शिक्षा नीति, नैतिकता, नारी सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान, आदि विचार थे उन विचारों पर आज भी हमारा देश, हमारा समाज चल रहा है।

इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने कहा कि-“आजाद भारत में महात्मा गांधी की निर्मम हत्या ने उनके नश्वर शरीर को नष्ट किया लेकिन उनके आचार, विचार, व्यवहार आदि आज भी संपूर्ण विश्व के लिए प्रासंगिक हैं और महात्मा गांधी के आंदोलन, विचारधाराओं से प्रभावित होकर अब तक कई देश स्वतंत्रता हासिल कर चुके हैं और कई हासिल करने की कोशिश में है। महात्मा गांधी ने पूरे विश्व को यह बता दिया कि केवल हथियारों से युद्ध नहीं लड़ाया लड़ा जा सकता, विचारों से युद्ध लड़कर उन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाई बिना किसी हथियार के प्रयोग के।

सत्य- अहिंसा ही उनके विचारात्मक हथियार थे,

जिसके बल पर उन्होंने 1918 से लेकर 1947 तक आसहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन आदि आंदोलन की अगुवाई किया और उनके नेतृत्व भारत के क्रांतिकारी, देशभक्ति, नौजवानों, महिलाओं ने शानदार लड़ाई लड़ी और हम भारतीयों को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।”
कार्यक्रम के संयोजक एवं वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने कहां की-” हमें महात्मा गांधी को अभी समझना होगा और उनके विरासतों को सहेशजना होगा।

G19⅝ वे मनुष्य ही नहीं थे, बल्कि उनके अंदरक विचार इतने मजबूत, ताकत, विश्वास था कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई का मुख्य हथियार सत्य- अहिंसा को बनाया जो उन्हें अपने मां-बाप से ईश्वर भक्ति के लिए प्राप्त हुआ था उन्होंने सत्य अहिंसा जैसे अचूक हथियार से लड़ाई लड़कर पूरे विश्व को बता दिया कि जिसके राज्य में सूरज कभी अस्त नहीं होता उसे भी एक दिन भारत से बोरिया बिस्तर समेटकर अपने देश को लौटना पड़ा।”
संगोष्ठी में असुविधा पत्रिका के प्रधान संपादक वरिष्ठ कथाकार रामनाथ शिवेंद्र ने गांधी के कृतित्व- व्यक्तित्व, दर्शनp स्वराज, स्वावलंबन आत्मनिर्भरता, स्वच्छता आदि विषयों को परिभाषित करते हुये विशद ढंग से निरुपण किया।

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वनवासी सेवा आश्रम गोविंद पुर की डा.सुधा ने गांधी चिंतन को आत्मसात करने पर बल दिया।
भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी. अधिवक्ता चंद्र कांत शर्मा, समाजसेवी राजीव तिवारी, साहित्यकार पारसनाथ मिश्र, अरविंद सिंह, सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक, हरीश अग्रवाल, फरीद अहमद, राष्ट्रीय स्तर पर सोनभद्र का नाम रोशन करने वाले हास्य व्यंग के कलाकार कलाकार अभय शर्मा ने अपनी देश भक्ति पर आधारित शेर-ए-शायरी एवं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी की एक कार्यक्रम में संबोधन की नकल करके श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।
स्वागत भाषण जगदीश पंथी. व संचालन अशोक तिवारी ने किया।

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