HIGHLIGHTS
- विद्वानों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व कृतित्व पर डाला प्रकाश।
- काव्य की वही रसधार।
- लेखक राजकुमार द्वारा लिखित कृति “अंतोदय” का हुआ वितरण।

(जिला संवाददाता)
सोनभद्र। शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी के तत्वावधान में सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक की अध्यक्षता में तहसील सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती मनाई गई।
सरस्वती वंदना के पश्चात मुख्य अतिथि भूपेश चौबे ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि पंडित जी समय दृष्टा थे और उन्होंने आजादी के कुछ वर्ष बाद ही यह जान लिया था कि तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी से देश का भला नहीं होने वाला है इसलिए वे जनसंघ में शामिल हुए।


विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष रूबी प्रसाद ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आचार- विचार- व्यवहार प्रासंगिक एवं देश हित में है।
अधिवक्ता विनोद चौबे ने पंडित जी की विचारधारा को रेखांकित करते हुए कहा कि देश को हिंदू हिंदी की ओर ले जाने वाले पंडित जी की हत्या भारतीय देश समाज और हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना पर कुठाराघात था।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण प्रताप सिंह ने भारतीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ, भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक एवं महान नेताओं के व्यक्तित्व कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि आज हमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बताए हुए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।

भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने भी अधिवक्ता हितों की चर्चा करते हुए कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में अधिवक्ताओं, पत्रकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और अधिवक्ता समाज की रीढ है जो अपने योग्यता से बल पर
वादकारियों को न्याय दिलाते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व- कृतित्व वर्तमान समय में विचारणीय है।
भूतपूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता, अधिवक्ता शशांक शेखर कात्यायन, दिनेश अग्रहरि, राधेश्याम मिश्रा, रशीद अहमद, सत्य प्रकाश तिवारी, कन्हैया सिंह, मनीष मिश्रा, राम पीयूष मिश्रा रशीद अहमद खान,
रामायण कलर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के विशेषज्ञ दीपक कुमार केसरवानी सहित अन्य अधिवक्ताओं एवं विद्वानों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व कृतित्व पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया।

तत्पश्चात हिंदी दिवस पकवाड़ा के समापन के उपलक्ष में काव्य पाठ
का आरंभ कवि प्रद्युम्न तिवारी की कविता से हुआ- माँ ममता की खान मर्तबा आला है, भगवान् तो क्यों अपमान हो रहा तो क्यों अपमान हो रहा सुनाकर समाज की विसंगति व हिन्दी तथा भारत माता के दर्द को उकेरा।

वरिष्ठ साहित्यकार पारस नाथ मिश्र, भोजपुरी के गीतकार जगदीश पंथी, कवि मदन चौबे, कवित्री अनुपम वाणी , कौशल्या कुमारी चौहान, बालकवि कुमारी सृजा, सुधाकर पांडे “स्वदेश प्रेम”शायर विकास वर्मा, दिवाकर द्विवेदी “मेघ विजय गढ़ी”, जयराम सोनी, दयानंद दयालु, दिलीप सिंह “दीपक” अधिवक्ता राकेश शरण मिश्र, अशोक तिवारी, धर्मेश चौहान आदि कवियों ने वीर रस, हास्य रस, करुण रस से भरी कविता का काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र मिश्र एवं आए हुए अतिथियों का आभार
कार्यक्रम कीअध्यक्षता कर रहे सोनभद्र बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक ने व्यक्त किया।













