सोनभद्र। बेबाक बोल, स्वतंत्र विचार, फक्कड़ी मिजाज, शान्ति, सौहार्द और सामाजिक एकता के संवाहक समाजवाद के वैचारिक पक्षधर लोहिया और जेपी के समग्र क्रांति आन्दोलन में सहभागी रहे लोकतंत्र सेनानी, कवि, लेखक, पत्रकार योगेश शेखर की चौथी पुण्यतिथि उनके न्यू कालोनी स्थित निज आवास पर आयोजित हुआ।


इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय शेखर ने कहा कि-स्व० योगेश शुक्ल मेरे् अत्यंत निकट रहे, हमारे और उनके बीच काफी मधुर सम्बन्ध भी रहे। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर मैं अत्यंत भावुक हूँ, उनके साथ बिताये समय को याद कर के मन दुःखी है। स्व. शुक्ल आज हमारे बीच भले न हों लेकिन उनकी स्मृतियां हमारे जेहन में है,।मैं सोच रहा हूँ कि महात्मा गांधी मैंकाशी विद्यापीठ से उनके छात्र जीवन के संघर्षों पर बात करूं या डा. लोहिया के समाजवादी आन्दोलन के दौरान अपने साथ जेल में बिताए समय काल और संघर्ष पर करूँ, कहने के लिए तो बहुत कुछ है परन्तु मेरे शब्द मौन हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार पारसनाथ मिश्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार परिषद मिश्रा ने कहा कि-प्रकृति का नियम है कि जो पृथ्वी पर पैदा होगा वह जरूर मरेगा। इसी नियम के तहत शुक्ला जी आज हमारे बीच कर शरीर भले उपस्थित ना हो लेकिन उनके द्वारा किया गया सामाजिक कार्य आज भी नगर वासियों को याद है।

विंध्य संस्कृति शौध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट द्वारा विंध्य रत्न से सम्मानित श्री शुक्ल के बारे में रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एवं उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के विशेषज्ञ दीपक कुमार केसरवानी नेअपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-” श्री योगेश शेखर का सोनभद्र जनपद की स्थापना विकास एवं मुख्यालय की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह हमेशा दबे, कुचले, आदिवासी, दलित, पिछडी जातियो के पक्षधर रहे हैं और उनके लिए यह हमेशा आंदोलन रहे।

कवियत्री डॉ रचना तिवारी के गीत के पंक्तियों से अपने विचारों को जोड़ते हुए कहा कि- “सपने मर गए तो जीवन बचता कहा है, सपने न हो तो जीवन कहाँ सपनो के बगैर जीवन की सार्थकता ही नही है। सपनो के बगैर न नींद है न चैन न सुकून है सपने हैं तभी जीवन है, सपनों के बिना जीवन थम जायेगा हमें सपनों को साकार करने के लिए निरन्तर चलना होगा जिस प्रकार स्व. शुक्ल अपने जीवन पथ पर चलते रहे यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने कहा कि-” योगेश शुक्ल के जीवन मूल्यों से हम लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए, उनका संघर्ष शासन-प्रशासन व व्यस्था से ही नही बल्कि स्वयं के जीवन से भी रहा और उन्होंने वैचारिक व सामाजिक मूल्यों को लेकर जीवन पर्यन्त संघर्ष किया उनका सम्पूर्ण जीवन हम सभी के लिए अनुकरणीय है।

इस अवसर पर कवयित्री गीतकार डा. रचना तिवारी, राष्टपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक ओम प्रकाश त्रिपाठी, संत कीनाराम पीजी कालेज के प्राचार्य डा. गोपाल सिंह, नगर पालिका परिषद रॉबर्ट्सगंज के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता, उत्तर प्रदेश ब्यापार संगठन के जिलाध्यक्ष कौशल कुमार शर्मा, सपा के वरिष्ठ नेता हिदायत उल्ला खां, एडवोकेट शशांक शेखर कात्यायन, प्रखर गीतकार जगदीश पंथी, कवि सुशील राही, प्रदुम्न त्रिपाठी, अशोक तिवारी, प्रभात सिंह चन्देल, धर्मेश चौहान, कौशल्या कुमारी चौहान, अरुण तिवारी, राधेश्याम पाल, सुधाकर स्वदेशप्रेम, डी डी पांडेय, राम कृष्ण शर्मा,भाजपा नेता बलराम सोनी सहित शुक्ला जी के परिजन क्रांति चतुर्वेदी, विलियम शुक्ल, जेम्स शुक्ल, पुरु के साथ ही नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने अपने भावपूर्ण विचार व्यक्त कर उन्हें शत-शत नमन किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र ने स्वर्गीय योगेश शहर के साथ बीताये हुए पल को याद करते हुए कहा कि सोन साहित्य संगम संस्थान की परिकल्पना श्री शुक्ल ने किया था और यह संस्थान आज निरंतर आगे की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शुक्ल के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों द्वारा माल्यार्पण से शुरू हुआ।
परंपरा के अनुसार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भी स्वर्गीय शुक्ल जी की चौथी पुण्यतिथि पर साहित्य व समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए योगेश शेखर स्मृति सम्मान से वरिष्ठत साहित्यकार एवं सोन साहित्य संगम के उपनिदेशक सुशील कुमार राही को परिवार जनों की ओर से अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं श्रीमद् भागवत गीता की धार्मिक पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।









