22 सूत्री मांग को लेकर राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद जिला कमेटी के द्वारा निकाली गई रैली

डाला, सोनभद्र। स्थानीय डाला पुलिस चौकी क्षेत्र में राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद जिला कमेटी के द्वारा सोमवार सुबह ग्यारह बजे डाला शहीद स्मारक से शीतला मंदिर तक आदिवासियों पर हो रहे अन्याय अत्याचार एवं उनके विरोध में संसद में बनाए जा रहे यूसीसी कानून के विरोध में भारत मुक्ति मोर्चा बहुजन क्रांति मोर्चा के आवाहन पर 07 अगस्त भारत बंद के समर्थन में राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद जिला अध्यक्ष भगवान दास के नेतृत्व में रैली निकाली गई।

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आदिवासी एकता जिंदाबाद का गुंजे नारे इस संबंध में रा.आ.ए.प. सोनभद्र जिलाध्यक्ष भागवत दास ने बताया कि 22 सूत्रीय मांगों को लेकर भारत बंद समर्थन में यह रैली कि जा रही है, जो क्रमशः कॉमन सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू करने का कानून बनाकर आदिवासीयों को मिली अलग आदिवासी पहचान को खत्म करके उन्हें हिन्दू बनाने की साजिश की जा रही है। इससे आदिवासीयों का कस्टमरी लॉ, पृथक संवैधानिक पहचान एवम् तमाम तरह के संवैधानिक अधिकर खत्म होने का खतरा पैदा हो जायेगा, विकास के नाम पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर एवम् वन्य प्राणियों के संरक्षण के नाम पर आदिवासीयों को जल, जंगल और जमीन से विस्थापित करने एवम् उनकी रोजीरोटी छिनने का षड्यंत्र किया जा रहा है, नेशनल कॉरिडोर एवम् भारत माला प्रोजेक्ट के नाम पर 4-लेन, 6-लेन, 8-लेन और 10-लेन नेशनल हाईवे का में निर्माण करके और हाईवे के आजू-बाजू में नये-नये इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण करके आदिवासीयों को विस्थापित किया जा रहा है।

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जिससे उनके 5वीं अनुसूची क्षेत्रों को ख़त्म होने का खतरा पैदा हो गया है, 2020, 2021 व 2022 में आदिवासीयों के विरोध में जो बिल संसद में पारित हुए एवम् 2023 में नया फॉरेस्ट एक्ट बनाया जा रहा है, जिससे आदिवासीयों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है, मणिपुर में आदिवासीयों पर बड़े पैमाने पर अन्याय एवम् अत्याचार किये जा रहे है। उनकी बस्तियों में आग लगाई जा रही है। जिसकी वजह से मणिपुर के आदिवासी बड़े पैमाने पर पलायन करने के लिए मजबूर हो गये है, अतिक्रमण हटाने के नाम पर जंगलों के आसपास रहने वाले आदिवासीयों को बड़े पैमाने पर फॉरेस्ट विभाग के द्वारा विस्थापित किया जा रहा है, जडमूल से रहने वाले आदिवासीयों के गाँवों को रेवन्यू विलेज (राजस्व ग्राम) का दर्जा आजादी के 75 वर्षो के बाद भी प्रदान नहीं किया गया है, यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है, आदिवासी बहुल इलाको में देवी-देवताओं के मंदिरों का बड़े पैमाने पर निर्माण करके, उनके इलाकों में कथा वाचकों के कार्यक्रम आयोजित करके आदिवासीयों की संस्कृति को खत्म करके उन्हें जबरदस्ती हिन्दू बनाया जा रहा है, डिलिस्टिंग के नाम पर यानि धर्म परिवर्तित आदिवासीयों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के नाम पर प्रोपोगेंडा करके ईसाई आदिवासीयों एवम् गैर-आदिवासीयों को आपस में झगडा लगाकर गैर ईसाई आदिवासीयों को हिन्दू बनाने की साजिश की जा रही है,

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आदिवासीयों के धार्मिक स्थलों पर कथा प्रवचन, कथा भागवत किया जा रहा है। जबरन आदिवासीयों की मूल सभ्यता, संस्कृति, कल्चर, देवी-देवताओं, पूजा पद्धती खत्म होने का खतरा उत्पन्न हो गया है, आदिवासी बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंदुओं धर्म के तीज त्यौहार, विभिन्न देवी-देवताओं की जयन्तियां, नवरात्रि पर्व, गणेश चतुर्थी पर्व मनाकर आदिवासीयों को गुमराह किया जा रहा है, आदिवासी बाहुल्य इलाकों में आदिवासी महापुरुषों के बारे में कपोल कल्पित एवम् मनगढ़त इतिहास से सम्बंधित साहित्य का निर्माण करके आदिवासी महापुरुषों के इतिहास का विकृतिकरण करने के लिए विभिन्न प्रकार के साहित्य को आदिवासी बाहुल्य इलाकों में फ्री में वितरित किया जा रहा है, भोले-भाले युवाओं एवम् युवतियों को विभिन्न संगठनों की जाल में फंसाकर उन्हें हिंदू धर्म के शास्त्रों की शिक्षा देकर-आदिवासी बहुल इलाकों में आदिवासीयों को हिन्दू बनाने के लिए प्रचारक बना कर काम पर लगाया जा रहा है, बीएसयू के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के द्वारा कपोल कल्पित रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित करके आदिवासीयों को विदेशी घोषित करने की साजिश रची जा रही है, जंगलों का निजीकरण करके आदिवासी बाहुल्य इलाकों में गैर आदिवासीयों / पूंजीपत्तियों की घुसपैठ करवाकर अनुसूचित क्षेत्रों को खत्म करने की साजिश की जा रही है, संविधान के आर्टिकल-25 के माध्यम से मिली धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का हनन किया जा रहा है, भोले-भाले एवम् अशिक्षित आदिवासीयों के विरोध में बड़े पैमाने पर फर्जी करके लाखों आदिवासीयों को जेलों में बन्द कर भूमाफियाओं के द्वारा उनकी जमीन छिनने की साजिश की जा रही है, भूमाफियाओं एवम् तथाकथित ऊंची जातियों के लागों द्वारा आदिवासीयों की जमीनों को जबरन छिनने की घटनाएं पूरे देश में घटीत हो रही है। जिसकी जानकारी सोशल मीडीया के माध्यम से एवम् संगठन के कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्राप्त हो रही है,

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आदिवासियों को वनवासी कह कर आदिवासी की पहचान खत्म की जा रही है, हिन्दू धर्म शब्द का अर्थ समझा जाये। हिन्दू नाम का कोई धर्म नहीं है और न धर्म शास्त्रों में हिन्दू धर्म के नाम से हिन्दू शब्द का उल्लेख है। प्रवेश शुक्ला नामक व्यक्ति ने आदिवासी युवक दशमत कोल के सिर पर पेशाब अर्थ क्या है, मणिपुर की कुकी आदिवासी महिलाओं के साथ नंगा नाच, कुकृत्य जिसमें बहुत सारे मर्द महिलाओं को नंगा करके उनके गुप्तांगों को दबोच रहे है। बेबस औरतें रो रही है और मर्दों की भीड़ आनंद ले रही है, पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, इस कुकृत्य का हम धिक्कार करते है।

इन तमाम मुद्दों के जरिये आदिवासियों की पहचान, कला, सभ्यता, संस्कृति, उनकी सामाजिक धरोहर, साधन-सम्पदा, आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों तथा 5वीं एवं 6वीं अनुसूची के द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकारों को समाप्त करने की साजिश है। उपरोक्त षडयंत्रों का पर्दाफाश करने के लिए जो चरणवद्ध राष्ट्रव्यापी आन्दोलन किया जा रहा है। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद, नई दिल्ली द्वारा तन, मन, धन से साथ सहयोग करके सफल बनाने की अपील की जाती है।
इस दौरान जिलाध्यक्ष भगवान दास गोंड, उपाध्यक्ष अनिल सिंह गोंड, महासचिव राजबली गोंड, अनिलेश, रमेश, मनीष, कमलेश, बुध्दि राम, कलापति देवी, अमरजीत, सूरज, राधेश्याम, रामकिशोर, अरविंद कुमार, मंजू देवी, अनीता, सुमन, परमेश्वर, रामप्रसाद, सीताराम, लालचंद्र, राम किशुन, राजाराम, लल्लन, रामपती, रामप्रसाद, देवचन्द्र दीवान, रविशंकर,अनिल आदि आदिवासी शामिल रहे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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