धन्वंतरी पतंजलि योग संस्थान की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का विस्तार हुआ जिसमे संस्थान की भारतीय मूल वर्तमान में विदेशी निवासी फिजी आयरलैंड की संस्थापक सदस्य एवम राष्ट्रीय महिला प्रभारी अनामिका अग्निहोत्री एवम राष्ट्रीय महिला सह प्रभारी/प्रदेश प्रभारी झारखंड अंशिका पटेल,आकृति पोखरियाल एवम वर्णिका आर्य ने मिलकर लगातार संस्थान में लोगो को जोड़कर संस्थान को उद्देश्य के प्रति कार्य करने के लिए प्रेरित कर रही है ।

ऑनलाइन और दूरसंचार के माध्यम से आज संस्थान के संस्थापक सदस्य आचार्य अजय कुमार पाठक जी महाराज के मार्गदर्शन में विस्तार किया। जिसमें यशस्वी पाण्डेय (संस्थापक सदस्य प्रदेश प्रभारी,छत्तीसगढ़), सावित्रा कुमारी वोगटी (राष्ट्रीय महिला प्रभारी नेपाल), नेहा राठौर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, खीरी-उत्तर प्रदेश), खुसी कुमारी (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य,झारखंड), प्रिया पाल (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ,खीरी-उत्तर प्रदेश), प्राची वर्मा (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, खीरी-उत्तर प्रदेश), वशुधरा कश्यप (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य,छत्तीसगढ़),अलका श्रीवास्तव , राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, अमेठी-उत्तर प्रदेश ), विपिन सिंह कश्यप,संस्थापक सदस्य,मुख्य सह ट्रस्टी धन्वतरी पतंजलि योग संस्थान) मृन्तुंजय विश्वकर्मा (प्रदेश प्रभारी,ओडिशा) को मनोनीत किया गया।

धन्वतरी पतंजलि योग संस्थान की संस्थापक आकृति पोखरियाल एवम गायत्री आर्य ने बताया कि जल्द ही सितम्बर माह में ही होगा संस्थान जीवम आयुष मंत्रालय के सहयोग से योग प्रतियोगिता जिसमे उत्तर प्रदेश के मंत्री भी होंगे शामिल। लगातार संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने संस्थान के मूल उद्देश्य के पूर्ति के योग,आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति , एक्युप्रेशर चिकित्सा पद्धति एवम जनकल्याण के आम जन मानस को समाज एवम स्वास्थ्य के प्रति विभिन्न जिले, प्रदेशों के साथ के साथ इंटरनेशनल लेवल पर धन्वंतरी पतंजलि संस्थान के लोगो के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है । संस्थान की इकाई विभिन्न देशों एवमं प्रदेशों में जैसे नेपाल देश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, जम्मूकश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड में लोगो जनजागरूकता के माध्यम से लोककल्याण का कार्य कर रही है। संस्थान के राष्ट्रीय संयोजक योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक जी कहना है संस्थान स्वास्थ्य जागरूक के साथ साथ ऋषि परम्परा और अपनी मूल परम्परा को जीवित रखने के लिए सोनभद्र गुरुकुल शिक्षा पद्धति की स्थापना करना चाहते है, जिससे भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता सदैव जीवित रहे।







