महिला सशक्तिकरण विषयक संगोष्ठी का हुआ आयोजन

सोनभद्र। अधिवक्ता परिषद् सोनभद्र इकाई द्वारा सोमवार की देर शाम महिला शक्तिकरण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन सोनभद्र बार सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती व भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।
वहीं की अध्यक्षता अधिवक्ता परिषद सोनभद्र इकाई के अध्यक्ष शशांक शेखर कात्यायन एड0 व स्वागत व अतिथि परिचय महामंत्री अधिवक्ता परिषद सोनभद्र इकाई नीरज कुमार सिंह ने। किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यकारिणी सदस्य राजीव सिंह गौतम एड0 ने किया। संगोष्ठी की मुख्य अतिथि वरिष्ठ महिला अधिवक्ता पूनम सिंह,विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता परिषद के संरक्षक द्वय वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य प्रताप सिंह व वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेश चंद्र पांडेय रहे।

वही कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनपद सोनभद्र की गौरव एवं अपनी प्रतिभा से देश,प्रदेश व विदेश में एक गरिमामई कवियित्री के रूप में पहचान बनाने वाली सुप्रसिद्ध कवियित्री एवं लेखिका डॉ0 रचना तिवारी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाओं के बारे में हमारी सोच उत्तम होगी। वही महिला सशक्त है जिस महिला के सर पर आंचल हो। महिलाएं आदिकाल से ही सशक्त रही हैं। सशक्त रहने के लिए महिलाओं को उद्देश्य चुनना होगा। वर्तमान परिवेश में हमें चूहा दौड़ व सौंदर्य प्रतियोगिताओं में सम्मिलित नहीं होना चाहिए, उससे बचना चाहिए।

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अंधी दौड़ अंधे कुएं की ओर ले जाती है। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि संरक्षक द्वय सूर्य प्रताप सिंह व अमरेश चंद्र पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि,भारतीय संदर्भ में महिलाओं की स्थिति का विश्लेषण करें तो उसे तीन काल खंडों में विभाजित किया जा सकता है। जिसमें प्राचीन काल खंड में हमारे भारत देश में महिलाओं की स्थिति अत्यंत सुदृढ़ थी और उन्हें हर क्षेत्रों में पुरुषों की तुलना में भी अधिक अच्छी स्थिति प्राप्त थी, लेकिन मध्यकाल में बाहरी आक्रांतओ द्वारा किए गए हमलों से अपने घर की महिलाओं को सुरक्षित करने के लिए उन्हें घर की देहरी तक सीमित कर दिया जिस कारण महिलाओं की स्थिति में थोड़ी गिरावट आई किंतु वर्तमान समय में पुनः महिलाओं की स्थिति अपने प्राचीन काल के रूप में विकसित होते हुए दिखाई दे रही है और बच्चियां हर क्षेत्रों में बच्चों की तुलना में कहीं अधिक सफलता अर्जित कर रही है और उन क्षेत्रों में भी बच्चियों ने अपनी भागीदारी और अपना कौशल दिखाना शुरू कर दिया है जहां उनके होने की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी जैसे सेना, अंतरिक्ष की यात्रा।

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वक्ताओं में अर्पिता मालवीय व स्वयंप्रभा ने भी महिला सशक्तिकरण पर बहुत ही उत्कृष्ट उद्बोधन दिया। विषय प्रर्वतन पवन मिश्रा एड0 ने किया व समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम में महिला अधिवक्ता चंदा पांडेय, पूनम, कोमल सिंह, वर्तिका केशरी व वरिष्ठ अधिवक्ता संजीत चौबे, कृष्ण प्रताप सिंह, सर्वेश मिश्रा, सुनील मालवीय, उमेश मिश्र, मदन चौबे, जितेंद्र देव पांडेय, राघवेंद्र त्रिपाठी सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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