अनपरा, सोनभद्र। सूबे के ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के साथ 3 दिसंबर को हुए लिखित समझौते का क्रियान्वयन न होने तथा अनपरा व ओबरा में प्रस्तावित 800 मेगावाट की दो-दो यूनिटों का निर्माण उत्पादन निगम से न कराकर एनटीपीसी को सौंपने के निर्णय को लेकर प्रदेश की सरकार और ऊर्जा शीर्ष प्रबंधन द्वारा की जा रही वादाखिलाफी से विवश होकर बृहस्पतिवार की रात 10 बजे से समस्त विद्युतकर्मियों ने प्रदेश भर में हड़ताल प्रारंभ कर दी है।
हड़ताल की पूर्व सूचना होने के उपरांत ऊर्जा प्रबंधन द्वारा उत्पादन निगम की इकाइयों को एनटीपीसी के द्वारा चलाए जाने की तैयारी थी। हड़ताल प्रारंभ होने पर एनटीपीसी के अनुभवहीन अभियंताओं के द्वारा इकाइयों का परिचालन करने में असमर्थता जताई गई, जिससे सायं पाली में 8 घंटे की ड्यूटी पूर्ण कर चुके परियोजना के विद्युतकर्मियों से परियोजना की इकाइयों का परिचालन कराया जाता रहा। लगभग 8 घंटे के अनवरत प्रयास के बाद लगातार 16 घंटे से ज्यादा समय परिचालन कार्य कर चुके विद्युतकर्मियों को अवमुक्त किए जाने पर कार्यवाही हुई, जिसमें अनपरा की उत्पादनरत 03 इकाइयों का परिचालन कार्य एनटीपीसी के द्वारा संभाला गया,

वही 02 इकाइयों को बॉक्सअप कराना पड़ा। वही दूसरी ओर थर्मल बेकिंग के उपरांत भी तीनों इकाइयों का परिचालन एनटीपीसी के द्वारा फुल लोड पर किया जा रहा है, जिससे उत्पादन निगम को आर्थिक क्षति भी हो रही है और इसके जिम्मेदार कौन होगा।
ऊर्जा मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा एवं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहने पर संघर्ष समिति के द्वारा जारी कार्य बहिष्कार के उपरांत प्रदेशव्यापी सम्पूर्ण हड़ताल प्रारंभ कर दी गई है।
इस दौरान अनपरा परियोजना के कालोनी परिसर में संघर्ष समिति से जुड़े बिजली कर्मियों ने विरोध सभा कर शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हड़ताली सभा में प्रमुख वक्ताओं ने बताया कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबन्धन के द्वारा अपनी हठवादिता कारण बिजली कर्मियो पर हड़ताल थोपी गई है, विद्युत उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी एवं विद्युत कर्मियों की जायज मांगों के प्रति संवेदनशील पूर्ण रवैया अपनाते हुए सरकार एवं ऊर्जा प्रबंधन को विद्युत कर्मियों की मांगों को अविलंब क्रियान्वित किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि विगत तीन दिसम्बर 2022 को हुए समझौते में ऊर्जा मंत्री की ओर से 15 दिन का समय मांगा गया था। लगभग 3 महीने के उपरांत भी समझौते के प्रमुख बिन्दुओं के क्रियान्वयन की दिशा में कुछ भी कदम नहीं उठाया जा रहा है एवं ओबरा, अनपरा की 800-800 मेगा वाट की नई इकाईयां को उत्पादन निगम से छीन कर एन.टी.पी.सी. को दिये जाने, पारेषण के निजीकरण को रोकने व अन्य न्यायोचित मांगों के सार्थक समाधान किये जाने के उल्टे शांतिपूर्ण ढंग से आन्दोलन कर रहे बिजली कर्मियों को पुलिस उत्पीड़न की धमकी दी जा रही है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति पूरा सम्मान व निष्ठा व्यक्त करते हुए समझौते को लागू कराने हेतु प्रभावी हस्तक्षेप करने की पुनः अपील की।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 16 मार्च की रात 10 बजे से 72 घण्टे की सांकेतिक हड़ताल रहेगी, यदि इस दौरान किसी विद्युत कर्मियों के ऊपर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई की जाती है तो यह हड़ताल 72 घंटे से बढ़कर अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगी। जिससे उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन का होगा। सभा की अध्यक्षता इं अदालत वर्मा तथा संचालन विशंभर सिंह ने किया।

सभा में अभिषेक बरनवाल, एसपी यादव, उत्पल शंकर, ऋषि कांत त्रिपाठी, रविकांत यादव, अनूप वर्मा, आशुतोष त्रिवेदी, सचिनराज, पियूष राय, राजकुमार, सत्यम यादव,मनोज सिंह,अभिषेक,आरएन तिवारी,शारदा प्रसाद, रामकिशुन,विवेक सिंह,श्याम बिहारी सिंह,राजीव यादव, शैलेंद्र सिंह,जितेंद्र खरवार, कालिका प्रसाद, राजकुमार सिंह,सुमन झा,देवेंद्र कुमार,पंकज कुमार, आर पी मल्ल, मृदुरंजन श्रीवास्तव, शैलेश यादव, दिनेश द्विवेदी, अभिषेक त्रिपाठी,सचिन कन्नौजिया, ज्ञानेंद्र पटेल,धर्मेंद्र सिंह यादव, अरविंद मेहता, समून अहमद,रवि गुप्ता, अयाज अहमद, पवन सिंह, श्रवण यादव, अंकित गुप्ता,लईक अख्तर समेत हजारों की संख्या में अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।





