HIGHLIGHTS
- घर से चोपन की तरफ आ रहे शिक्षक डॉ बृजेश महादेव हुए घायल
सोनभद्र। अनियंत्रित एवं अनियमित वाहन चालन से आए दिन सड़क हादसा हो रहा है। चोपन भरहरी रोड पर तो आए दिन सड़क हादसा परिलक्षित होता है जिसका कारण बच्चों द्वारा वाहन चलाना गिट्टी बालू से लदी छोटी बड़ी गाड़ियां, वेतरकीब ढंग से वाहन चलाना आम आदमी के लिए सिरदर्द बन गया है।

शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ बृजेश महादेव चौरा में ऐसे जगह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गए जहां सड़क के किनारे गिट्टी रखी हुई थी और वही बिना किसी अलर्ट के ट्रैक्टर पीछे की ओर मुड़ रहा था पर ड्राइवर की निगाह कहीं और होने के कारण ट्राली से बाइक में जोरदार टक्कर लगने से जमीन पर गिर गए और चोटिल हो गए, मोटरसाइकिल का अग्रभाग भी पूरी तरह से नष्ट हो गया हालाकि ट्रेक्टर ड्राइवर के परिजनों डिपुल यादव ने स्थानीय डॉक्टर से ट्रीटमेंट कराया और गाड़ी के नुकसान का भरपाई करने का भी वादा किया। पर इससे हादसा तो रुक सकता नहीं जब तक सावधानीपूर्वक ड्राइविंग ना की जाए. कहीं-कहीं तो स्थानीय लोग गलत ढंग से वाहन चलाकर धक्का मार कर भी बाहर के यात्रियों को परेशान करते हुए देखे गए हैं और यात्री घायल अवस्था में भी दर्द को सहते हुए अपना नुकसान उठाते हुए चुपचाप दुर्घटना स्थल से खिसक लेने में ही बुद्धिमानी समझते हैं।सड़क हादसे में शिक्षक घायल

घर से चोपन की तरफ आ रहे शिक्षक डॉ बृजेश महादेव हुए घायल
सोनभद्र। अनियंत्रित एवं अनियमित वाहन चालन से आए दिन सड़क हादसा हो रहा है। चोपन भरहरी रोड पर तो आए दिन सड़क हादसा परिलक्षित होता है जिसका कारण बच्चों द्वारा वाहन चलाना गिट्टी बालू से लदी छोटी बड़ी गाड़ियां, वेतरकीब ढंग से वाहन चलाना आम आदमी के लिए सिरदर्द बन गया है।

शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ बृजेश महादेव चौरा में ऐसे जगह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गए जहां सड़क के किनारे गिट्टी रखी हुई थी और वही बिना किसी अलर्ट के ट्रैक्टर पीछे की ओर मुड़ रहा था पर ड्राइवर की निगाह कहीं और होने के कारण ट्राली से बाइक में जोरदार टक्कर लगने से जमीन पर गिर गए और चोटिल हो गए, मोटरसाइकिल का अग्रभाग भी पूरी तरह से नष्ट हो गया हालाकि ट्रेक्टर ड्राइवर के परिजनों डिपुल यादव ने स्थानीय डॉक्टर से ट्रीटमेंट कराया और गाड़ी के नुकसान का भरपाई करने का भी वादा किया, पर इससे हादसा तो रुक सकता नहीं जब तक सावधानीपूर्वक ड्राइविंग ना की जाए. कहीं-कहीं तो स्थानीय लोग गलत ढंग से वाहन चलाकर धक्का मार कर भी बाहर के यात्रियों को परेशान करते हुए देखे गए हैं और यात्री घायल अवस्था में भी दर्द को सहते हुए अपना नुकसान उठाते हुए चुपचाप दुर्घटना स्थल से खिसक लेने में ही बुद्धिमानी समझते हैं।





