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- जमीन गवर्नमेंट ग्रांट या ग्राम पंचायत या काश्त की है नही हुआ है सीमांकन
बीजपुर, सोनभद। स्थानीय थाना क्षेत्र के बीजपुर बाजार के उत्तरी पटरी पर बसे हजारों रहवासियों को वन विभाग द्वारा तत्काल खाली करने अन्यथा बुलडोजर चलाकर ध्वस्त करने के फरमान का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।रहवासियों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर 40 वर्षो से रह रहे जमीन पर मालिकाना हक दिलाने की गुहार लगाई है।

विदित हो कि क्षेत्रीय वनाधिकारी रेंज जरहाँ के रेंजर राजेश कुमार सिंह ने दलबल के साथ 23 फरवरी को उत्तरी पटरी पर बसे व्यवसायियों को घर घर जाकर अल्टीमेटम दिया था कि 24 फरवरी सुबह 10 बजे तक सभी लोग अपना दुकान मकान खाली करके अपने अवैध निर्माण को स्वयं ध्वस्त कर दें अन्यथा 24 फरवरी को सुबह 11 बजे तक बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त करके ध्वस्त करने का हर्जाना खर्च भी सभी से वसूला जाएगा।उत्तरी पटरी पर बसे सभी रहवासियों से अपने-अपने जमीनों का कागज ले जाकर वन विभाग ऑफिस में जमा करने को भी कहा गया था। डरे सहने रहवासियों ने ज्यादातर लोगों ने अपने-अपने जमीनों का कागज भी ले जाकर वन विभाग कार्यालय में जमा किया था परंतु वन विभाग अभी तक यह तय नहीं कर पाया कि उत्तरी पटरी पर बसे लोगों में किसका निर्माण है और कौन अवैध है।

उत्तरी पटरी पर बसे सैकड़ों व्यवसायीयों एवं उनके परिजनों का कहना है कि हम लोग इस जमीन पर दशकों से रहते चले आ रहे हैं और अपनी छोटी मोटी दुकान करके अपना तथा अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं अगर वन विभाग हम लोगों को यहां से उजाड़ देगा तो हम लोग सड़क पर आ जाएंगे,आखिर हमारे परिवार तथा बच्चे कहां जाएंगे क्योंकि हमारे पास यहां के अतिरिक्त कहीं भी ना घर है ना रहने का ठिकाना आखिर हम अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे हमारी रोजी रोटी कैसे चलेगी।बड़ा सवाल यह है कि उक्त जमीन में कौन सी और कितनी जमीन वन विभाग की है,ग्राम पंचायत की है या काश्त की है,अभी तक इसका कोई सीमांकन ही नही हुआ तो फिर वन विभाग अपनी जमीन बताकर नोटिस कैसे जारी कर सकता है जबकी उक्त जमीन पर कइयों केस मुकदमे न्यायालय में भी विचाराधीन है।

यदि यह जमीन वन विभाग की है तो वन विभाग इतने दिनों तक कुंभकर्णी नींद में क्यों सोया रहा,गौरतलब है कि उत्तरी पटरी पर ज्यादातर लोग 40 वर्षों से भी अधिक समय से रह रहे हैं और कुछ लोगों ने तो दो से तीन मंजिला तक इमारतें भी बना ली है अगर उक्त स्थान पर वन विभाग की जमीन थी तो विभाग ने इतने बड़े निर्माण को कैसे होने दिया, रोका क्यों नहीं अभी तक ? यह सवाल लोगों के बीच में जन चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे सवालो पर वन विभाग ,राजस्व विभाग एवं सभी संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को ध्यान देकर उचित कार्यवाई करने की आवश्यकता है क्योकि मामला जनहित से जुड़ा हुआ है।
बहरहाल लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए न्याय की गुहार लगाई है।




