महाशिवरात्रि पर शिवमय रही गुप्त काशी

HIGHLIGHTS

  • जिले के सभी शिवालयों में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु, भक्तों की देखी गई काफी भीड़
  • शिवद्वार धाम में शिवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं की सबसे अधिक रही भीड़ ।
  • देवालयों में भक्तों की भीड़ देर शाम तक पहुंचती रही।
हर्षवर्धन केसरवानी (जिला संवाददाता)
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। महादेव माता पार्वती के विवाह के पावन दिवस महाशिवरात्रि पर गुप्त काशी शिवमय रही । इस दौरान गुप्त काशी महादेव के उद्घोष से गूंजता रहा। सुबह स्नान-दान के बाद लोगों ने दर्शन-पूजन किया।
बतादें कि शनिवार की भोर में ही मंदिर का कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गए थे। हर-हर महादेव के उद्घोष ने मंदिर परिसर को गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर महिला व पुरुष पुलिस फोर्स लगाई गई थी। परिसर के बाहर से अंदर तक श्रद्धालुओं की लंबी लाइन पूरे दिन लगी रही। गुप्त काशी शिवद्वार धाम, बरैला स्थित महादेव मंदिर, रॉबर्ट्सगंज के वीर केश्वर मंदिर, सोमनाथ मंदिर दूधेश्वर महादेव मंदिर, शाहगंज के गौरीशंकर महादेव मंदिर, पंचमुखी महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक किया और भगवान शिव के दरबार में मत्था टेककर मन्नत मांगी।

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घोरावल : महाशिवरात्रि के पर्व पर शनिवार को गुप्तकाशी शिवद्वार धाम में श्रद्धालुओं का तांता उमा महेश्वर के दर्शन पूजन के लिए लगा रहा। मंगलवार की भोर में पुजारी ने मंगला आरती के पश्चात गर्भ गृह का कपाट श्रद्धालुओं को दर्शन पूजन के लिए खोल दिया। सुबह से शाम तक हाथ में नारियल बेलपत्र फूल माला अगरबत्ती कपूर लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त शिवलिग पर जलाभिषेक कर अनोखे विग्रह सुंदर प्रतिमा का दर्शन कर धन्य होते रहे।अनपरा : महाशिवरात्रि पर शनिवार को ऊर्जांचल का कोना-कोना हर हर महादेव के जयकारे से गुंजायमान हो उठा। देवाधिदेव को जलाभिषेक करने के लिए परिक्षेत्र स्थित शिवालयों में भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। व्रतधारियों द्वारा बुधवार को पर्व की तैयारी पूरी कर ली गई। गुरुवार को तड़के स्नान-ध्यान से निवृत्त होकर भक्तिभाव से सराबोर शिवभक्तों ने शिवालयों की राह पकड़ ली।

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कोहरौल स्थित प्राचीन शिव मंदिर, सीएचपी शिव मंदिर, बीना तालाब वाला शिव मंदिर, अनपरा कालोनी शिव मंदिर, रेणुसागर शिव मंदिर, ककरी शिव मंदिर, बीना सीएचपी, आवासीय परिसर शिव मंदिर, लोझरा शिव मंदिर, सोनवानी ककोरिहा शिवमंदिर सहित क्षेत्र के अन्य देवालयों में जलाभिषेक करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। इस दौरान भक्तों द्वारा लगाये जा रहे जयकारे व घंटे-घडियाल की अनुगूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। गंगाजल, दूध, शहद आदि पदार्थों से भोलेनाथ का अभिषेक कर सभी ने सर्वमंगल की कामना की। इस दौरान भारी संख्या में शिव भक्तों द्वारा रुद्राभिषेक भी किया गया। हरिकीर्तन व भजन-कीर्तन का कार्यक्रम देर रात तक जारी रहा।


बीजपुर : महाशिवरात्रि का त्यौहार क्षेत्र में धूमधाम एवं हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। बीजपुर बाजार स्थित बेड़िया हनुमान मंदिर, दुदहिया मंदिर, एनटीपीसी आवासीय परिसर के शिव मंदिर, सिरसोती शिव मंदिर, जरहा के अजीरेश्वर धाम, बकरिहवा सहित अन्य सभी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु भक्तो का तांता लग गया। जरहा स्थित अजीरेश्वर महादेव धाम में एक दिवसीय ऐतिहासिक विशाल प्राचीन मेले का आयोजन मंदिर निर्माण समिति द्वारा किया इस वर्ष भी किया गया। मेले में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश सहित आस पास के हजारों ग्रामीण श्रद्धालु भक्तों ने शिरकत की।

ओबरा : पूरे श्रद्धाभाव के साथ नगर सहित ग्रामीण अंचलों में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। सबसे प्रमुख तौर पर गोठानी स्थित गुप्त काशी कहे जाने वाले शिव मंदिर में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिवलिग पर जहाँ जल चढ़ाया। वहीं ओबरा के सेक्टर तीन स्थित बाबा भूतेश्वर दरबार, सलईबनवा में दुवरा घाटी में स्थित दुर्लभ शिवलिग पर भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई पड़ी। गोठानी स्थित सोमनाथ मंदिर पर बीती रात से ही आदिवासियों की भीड़ जुटने लगी थी। सुबह होते ही कई प्रदेशों से आये श्रद्धालु शिवलिग पर जल चढ़ाने के लिए आतुर दिखे। जल चढ़ाने से पहले हजारों श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष संगम में स्नान किया। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उपनिरीक्षक कमला शंकर यादव भारी फोर्स के साथ मौके पर डटे रहे।

सात दिवसीय मेला शुरू

गोठानी का मशहूर सात दिवसीय आदिवासी मेला शिवरात्रि के साथ शुरू हो गया। इस बार शहरी क्षेत्रों से मेले में आने वालों की संख्या में भारी वृद्धि दिखाई पड़ी। मेले में सैकड़ों की संख्या में दुकाने सजी हुई थी। इस मेले में आदिवासियों ने जमकर खरीदारी की। वार्षिक तौर पर होने वाले आयोजन को देखते हुए आदिवासियों ने जमकर मेले का लुत्फ उठाया। इस दौरान आदिवासियों की कला संस्कृति भी दिखाई पड़ी। दूर-दूर से आये गायकों के भजनों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान था। कई सदी पुराने मेले में आदिवासियों के कई लुप्त हो चुके गीतों की प्रस्तुति भी देखने को मिला। मेले में खरवार, बैगा, गौड़ एवं अगरिया सहित कई जनजातियों के कलाकार पारंपरिक गीत प्रस्तुत करते दिखाई पड़े। गुड़हिया जलेबी का बरकरार है क्रेज


गुड़ से बनने वाली जलेबी मेले के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मेले में जाओगे तो क्या खाओगे। इसके प्रति उत्तर में बच्चों का फौरन जबाब होता है गुडहिया जलेबी। बुजुर्ग भी इसे चाव से खाते हैं। यही कारण है कि दुकानदारों द्वारा रात से ही गुड़हिया जलेबी बनाना प्रारंभ कर दिया जाता है। मेले में कई कुंतल गुड़हिया जलेबी की बिक्री होती है। मेले में गुड़ से बनी जलेबी की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहती है।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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