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- आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष मे आजादी से जुड़े स्थलों का जीर्णोद्धार, निर्माण कार्य जारी

(जिला संवाददाता)
सोनभद्र। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देश में चलाए गए स्वाधीनता आंदोलन में महति भूमिका का निर्वहन करने वाले जनपद सोनभद्र के सदर ब्लॉक मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज शहर के ऐतिहासिक चाचा नेहरू बाल उद्यान में अवस्थित प्रस्तर स्तंभ पर सेनानी सूची से कई नामचीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम गायब है।

चाचा नेहरू बाल उद्यान वह ऐतिहासिक स्थल है जहां पर 25 दिसंबर 1937 को आयोजित मिर्जापुर का तृतीय राजनीतिक सम्मेलन में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ देश के कई नामचीन देशभक्त, सेनानी, नेता आए थे, इस सम्मेलन के कारण ही सोनभद्र जैसे आदिवासी बाहुल्य, जंगली इलाके में अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए स्त्री- पुरुष- युवक प्रेरित हुए थे। नेहरू जी को लौटते समय टाउन एरिया के प्रथम चेयरमैन कांग्रेसी नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, बद्रीनारायण केसरवानी ने ₹151 की थैली भेंट कर स्वतंत्रता आंदोलन में अपना आर्थिक सहयोग दिया था।

(विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार)

सेनानी बद्री नारायण केसरवानी के भतीजे बलराम दास केसरवानी ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेते हुए 36 महीने तक शारीरिक, मानसिक, आर्थिक प्रताड़ना, नजरबंदी, जेल यात्रा, जुर्माना की सजा झेला था। इनके निकट सहयोगी चंद्रशेखर वैद्य, अली हुसैन उर्फ बेचू, मोहनलाल गुप्ता, शिव शंकर प्रसाद केसरवानी आदि युवाओं के सहयोग से रॉबर्ट्सगंज एवं दुद्धी तहसील में स्वतंत्रता आंदोलन का बिगुल स्थानीय सेनानियों के सहयोग से बजाया गया। वही गुरु परासी के निवासी, मिर्जापुर के गांधी कहे जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित महादेव प्रसाद चौबे अंग्रेजों के अत्याचार को झेलते हुए जेल की लंबी सजा काटी और अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन चलाते रहे।

विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 75 वी पुण्यतिथि के अवसर पर चाचा नेहरू बाल उद्यान में अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-“आजादी के 75 वर्षों बाद भी चाचा नेहरू बाल उद्यान में अवस्थित सेनानियों की सूची पट्टिका मे रॉबर्ट्सगंज नगर के सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी, चंद्रशेखर वैद्य, अली हुसैन उर्फ बेचू, गुरु परासी के निवासी, मिर्जापुर के गांधी पंडित महादेव प्रसाद चौबे, पंडित प्रभा शंकर चौबे सहित अन्य छूटे हुए सेनानियों के नाम को उत्कीर्ण कराने के लिए शासन- प्रशासन को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है।।” आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में जब शासन-प्रशासन स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थलों का जीर्णोद्धार, अमृत सरोवर की स्थापना और विकास का कार्य करा रही है ऐसी स्थिति में सेनानी सूची में छूटे हुए सेनानियों का नाम अंकित कराना सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।







