सोनभद्र के आदिवासियों में क्रांति की मशाल जलाया था नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने

HIGHLIGHTS

  • सन 1939- 40 में नेता जी का आगमन मिर्जापुर के लालगंज में हुआ था।
  • नेताजी के ओजस्वी भाषण से प्रभावित हुए थे क्षेत्रवासी।
  • नेताजी की आदम कद की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग।

सोनभद्र। क्रांतिकारियों, देशभक्तों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जन्म भूमि एवं कर्मभूमि, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के जंगली ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आदिवासियों, पिछड़ी जाति की स्त्रियों, पुरुषों,युवाओं के हृदय में आजादी का जज्बा जगाने के लिए आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस सन 1939- 40 मैं मिर्जापुर जनपद की यात्रा कर लोगों में आजादी का अलख जगाया।

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विंध्य संस्कृति शोध समिति उत्तर प्रदेश ट्रस्ट के निदेशक/इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“सन 1939 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस कोलकाता से दिल्ली जाते समय मिर्जापुर आए और रेलवे स्टेशन से बग्गी पर सवार होकर
लालगंज के मिलिट्री परेड ग्राउंड के सामने उपरौथ इंटर कॉलेज पहुंचे। वहां पर स्थानीय नेताओं के स्वागत, सत्कार के पश्चात मिट्टी के बने चबूतरे पर उन्होंने विशाल सभा को सभा को संबोधित किया था।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भाषण से इस क्षेत्र की जनता काफी प्रभावित हुई, आदिवासी नेता सैठोले कोल सभा स्थल से ही स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का संकल्प लिया और मिर्जापुर- सोनभद्र के जंगलों में 10,000 से घरो मै जाकर अंग्रेजो के खिलाफ आदिवासियों को अंग्रेज खिलाफ संगठित कर अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए तैयार किया।
आदिवासियों के तेवर को देखकर ब्रिटिश हुकूमत डर गई। अंग्रेज पुलिस जगह- जगह पर कोल नेता की गिरफ्तारी के लिए दबिस दिया लेकिन नाकाम रही।

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सन 1940 में जब देश में मुस्लिम लीग और कांग्रेस के मध्य टकराहट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी और देश में संप्रदायिकता जहर तेजी के साथ फैल रहा था, ऐसे माहौल में मिर्जापुर जनपद के कांग्रेसी नेता बैरिस्टर युसूफ इमाम के नेतृत्व में इस जनपद में स्वतंत्रता आंदोलन चलाया जा रहा था।
इसी वर्ष जिला कांग्रेस कमेटी मिर्जापुर का चुनाव मे वर्तमान सोनभद्र जनपद के गुरु परासी के निवासी, मिर्जापुर के गांधी कहे जाने वाले पंडित महादेव प्रसाद चौबे को जिला अध्यक्ष चुना गया।
इनके नेतृत्व में जनपद में कांग्रेस कमेटी से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने, स्वतंत्रता आंदोलन का प्रचार के लिए दो दिवसीय पांचवा राजनैतिक सम्मेलन 7-8 मार्च को लालगंज में आयोजित हुआ।

इस सम्मेलन में भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष, क्रांतिकारी, आजाद हिंद फौज के संस्थापक, युवाओं के दिलों की धड़कन सुभाष चंद्र बोस पधारे।
इस महान क्रांतिकारी विचारों को सुनने के लिए सोनभद्र जनपद के प्रख्यात क्रांतिकारी बलराम दास केसरवानी के नेतृत्व में रॉबर्ट्सगंज, दुद्धी, बद्री प्रसाद आजाद, डॉक्टर विश्राम सिंह के नेतृत्व में चुनार तहसील, प्रख्यात गांधीवादी नेता बैरिस्टर युसूफ इमाम के नेतृत्व में मिर्जापुर तहसील से सैकड़ों आंदोलनकारी लालगंज में आयोजित पांचवें राजनीतिक सम्मेलन मैं पहुंच।
इस सम्मेलन में नेताजी ने 2 घंटे तक ओजस्वी भाषण दिया और सभा में उपस्थित हजारों मंत्रमुग्ध लोगों ने उनके भाषण को सुना और गुना इसमें प्रांतीय नेता जेड अहमद ने भाषण दिया था। नेताजी का मिर्जापुर में आगमन मिर्जापुर जनपद के शहरी, ग्रामीण, आदिवासी इलाकों में रहने वाले आंदोलनकारियों पर व्यापक प्रभाव पड़ा और नवयुवक नेताजी से प्रेरित होकर कांग्रेस के साथ जुड़े मातृभूमि को आजाद कराने का संकल्प लेकर जिसका परिणाम 1940 के बाद होने वाले आंदोलन में दिखा और युवाओं ने उत्साह से ब्रिटिश साम्राज्य से लोहा लिया।
आज जब देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126 वी जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाया रहा है, अंडमान निकोबार के 25 दीपों का नामकरण परमवीर चक्र प्राप्त योद्धाओं के नाम पर किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में मिर्जापुर जनपद के लालगंज के उपरौथ इंटर कॉलेज जहां पर नेता जी ने सभा को संबोधित किया था यहां पर नेताजी की आदम कद की प्रतिमा की स्थापना ही नेताजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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