वाराणसी। गोंड आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत- सभईपुर, पो0-घमहापुर, शिवपुर, वाराणसी में गोंड मरावी समाज ने पूष पूर्णिमा के दिन प्राचीन जंगो रायतार महागोगो महोत्सव के अवसर पर मरावी गोंत्र वंशी अपने पैतृक भूमि पर ‘‘बुढ़ादेव आदिवासी पेनठाना’’ की स्थापना आदिवासी रूढ़ीवादी परम्परा के तहत धूम-धाम से मनाया।
इस दौरान सभईपुर के गोंड परिवार के लोगो ने अपने रूढ़ी परम्परा के तहत प्राचीन समय से चली आ रही पेन पुरखा बुढ़ोदव की पूनज/गोंगो में सभी परिवार जन के प्रत्येक सदस्य सैकड़ों की संख्या में महिला/प्ररूष/बच्चे-बच्चियां अपनी इतिहास, धरोहर, संस्कृति, पेन-पुरखा, देव, गोत्र, टोटम की रक्षा एवं संरक्षण के लिए आदिवासी संस्कृति को बचाने व आदिवासी रीति-रिवाज पालन करने का प्रण लिया। साथ ही सभी लोगों ने जय सेवा जय बुढ़ादेव का नारा लगाकर अभिवादन किया।
गोंड परिवार का मानना है कि गोंड समाज के पहचान को मजबूती लाने के लिए वर्तमान समय मेें बढ़ते अनेक बाह्य समस्याओं जिनमें अशिक्षा, नशाखोरी, मतांतरण, बेराजगारी, भेद-भाव, दरिद्रता से बचने हेतु सभी गोंड आदिवासी मरावी गोत्रवंशी परिवार के लोगो ने आदिवासी संस्कृति का पालन करते हुए बुढ़ोदव आदिवासी पेनठाना की स्थापना किया है। जिसमें उनकी पेन शक्ति की निवास स्थान होता है। इस अवसर पर राजेश गोंड, लल्लन गोंड, गुड्डू गोंड, मेल्हू गोंड, विजई गोंड, अरविन्द गोंड, जोगेन्दर गोंड, बलिराम, बुधिराम, विनोद कुमार, रानी देवी, प्रमिला गोंड, मनभवती देवी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
