अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने जमाया रंग

सोनभद्र। सर्द मौसम की हिमानी शाम में देश के ख्यातिलब्ध शायर, कवि व गीतकारों की मौजूदगी में कविता, गीत, गजल, शायरी छंद और मुक्तक की मनोहारी प्रस्तुतियों से राबर्ट्सगंज का आरटीएस क्लब मैदान गुलजार रहा। घने कोहरे और ठंड की ठिठुरती रात में श्रोताओं से खचाखच भरा प्रांगण 60वां वर्ष पूर्ण कर आयोजन के हीरक जयन्ती का साक्षी बना।

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मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के संयोजक लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार व संस्था के निदेशक पं अजय शेखर के कुशल संयोजन व भोजपुरी के जाने माने गीतकार हरिराम द्विवेदी की अध्यक्षता तथा सभाजीत द्विवेदी प्रखर के सफल संचालन में नई इबारत लिख गया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि सदर विधायक भूपेश चौबे ने मधुरिमा साहित्य गोष्ठी द्वारा आयोजित सारस्वत महायज्ञ के 60 वर्ष पूर्ण होने पर साहित्य के क्षेत्र में सोनभद्र जनपद ही नही बल्कि प्रदेश व देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उक्त अवशर पर लेखक व पत्रकार दीपक केसरवानी से सम्पादन में चुनारी लाल की कृति विगुल व कमल नयन त्रिपाठी की कृति अनामिका स्मृति का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वाराणसी से आयी पूनम श्रीवास्तव ने वाणी वन्दना हे मइया पार करो मोरी नईया से किया तत्पश्चात दस वर्षीय कुमारी सृजा ने अपनी कविता एक रात छत पर आकर झांक रहा था चन्दा सुनाकर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया, तो रास बिहारी पाण्डेय ने प्यार का दे सके पैगाम वही कविता है सुनाकर शब्द साहित्य से राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। वहीं सदर एसडीएम रमेश कुमार यादव ने खुद को रांझा तुम्हे हीर बयां करता हूँ सुनाया, तो मोहित पाण्डेय ने हम देश भक्ति से सराबोर हम सोनभद्र के प्राणी हैं सुनाकर माटी की सुगन्ध बिखेरा, वहीं प्रयागराज से आये ई. राजीव दुबे ने कुछ धूप वाले थे कुछ छांव वाले थे सुनाकर माहौल दिया।

ओज के कवि प्रभात सिंह चन्देल ने हिन्दुस्तान का जर्रा जर्रा जय भारत माता बोल उठेगा सुनाकर श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरी, तो वही कौशल्या कुमारी चौहान ने उठो देश के नौजवानों पिघला दो चट्टान को सुनाया। तत्पश्चात वाराणसी से आये धर्म प्रकाश मिश्र भूमि यह रसिकों की रस की खान यहां, लवंग की डाल सी बल खाती है सुनाया, तो यथार्थ विष्णु ने एल्युमिनियम कोयला बिजली गिट्टी से हम आते हैं सुनाकर माटी की महत्ता को बताया, तो वही बीजपुर से आये दिनेश दिनकर ने बस्ती बस्ती पहरा देने वाले पापी पहरेदार तुम्हारे देखे सुनाकर व्यवस्था पर चोट किया।

कॉमेडियन मिमिक्री स्टार अभय शर्मा ने अपने आवाज के जादू से शमां बांध दिया और हर दिन फतह है हर रात फतह है सुनाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया, तो वही वाराणसी से आयी पूनम श्रीवास्तव ने तुम अगर वंशी बनो में रागिनी बन जाऊंगी सुनकर दिलों में प्यार का रंग भरा, तो वहीं हास्य कवि जयराम सोनी ने केहू त फिल्टर मंगलेसि जे कबों न देखलस बीड़ी की प्रस्तुति से श्रोताओं को हंसाया। इसके बाद वाराणसी से चलकर आये सलीम शिवालवी ने देश आपन ह बेंच के खाई पपुआ तोसे का की प्रस्तुति से समां बांध दिया, तो सरोज कुमार सिंह ने तेरा आंगन हुआ परदेश बाबुल मैं तो चली अपने देश की प्रस्तुति से दिलों करुणा भर दिया, तो गोरखपुर से चलकर आये गीतकार मनमोहन मिश्र ने रास्ता इश्क का आसान नही पर कोई न कोई चलेगा ही की प्रस्तुति से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान किया।

पटना से चलकर आये शंकर कैमरी ने न झुकना तुम किसी के सामने न गम से घबराना ऐ मेरे सर जरूरत पर वतन के काम आ जाना, तो पश्चिम बंगाल से आये कर्ण सिंह ने दिन के उजाले में इनका काम नही है, वहीं प्रदुम्न त्रिपाठी ने सबके आंखों का मर रहा पानी है मेरी आँखों मे भर रहा पानी है कि प्रस्तुति से आयोजन में चार चांद लगा दिया।
लखनऊ से आये जाने माने गीतकार डा. सुरेश ने जहां तुम्हारा सुख रहता है वहीं पास में दुख रहता है सुनाया, वहीं दिवाकर द्विवेदी मेघ विजयगढ़ी ने पहले से आगे है अपना देश तेल में, तो बरेली से आये प्रेम बरेलवी ने अकड़ भला किस बात की इत्ती सी जान है सुनाकर सम्मेलन को शिखर पर पहुंचा दिया। लीलासी से आये डा. लखन राम जंगली ने घायल सीमवा पर हमरो जवनवा सखी सुनाकर माटी की महत्ता को बताया।

दिल्ली से आये हसन सोनभद्री ने प्यार भरी बस एक बूंद का प्यासा दिल तपती रेगिस्तान को देखा होगा कि प्रस्तुति से श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया, तो गीतकार ईश्वर विरागी ने थाम लेंगे वक्त को चलने न देंगे क्रूरता के हांथ हम बढ़ने न देंगे सुनाकर व्यवस्था को आईना दिखाया, तो अनुपमा वाणी ने प्रेम भी करने लगे हैं लोग रेटिंग देखकर खोखले जज्बात की रिव्यू सेटिंग देखकर की प्रस्तुति से बदलाव की नई बानगी पेश की।
लोक भाषा के गीतकार जगदीश पंथी ने आयोजन में प्यार के मिठास को घोलते हुए प्यार तुम्हारा मिला कि सावन बरस गया सुनकर कार्यक्रम को शीर्ष पर पहुंचा दिया, तो वही दिलीप सिंह दीपक ने वहीं मुफलिसी वही राजनीति वही दर्द की खाई है सुनकर राजनीतिक व्यवस्था पर प्रहार किया।

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कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे जौनपुर से आये सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने गीत लिखें और अंतरा को भूल जाएं कैकेयी को याद रखें मंथरा को भूल जाएं सुनकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया, तो वही पं हरिराम द्विवेदी ने अपना अध्यक्षीय कव्यपाठ करते हुए बड़ी नायाब चीज दी है कुदरत ने इसे प्यार से निभाया जाये की प्रस्तुति के आयोजन को आकाश तलक पहुंचा दिया।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के संयोजक व मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक पं अजय शेखर ने आगत अतिथियों व श्रोताओं के प्रति आभार प्रगट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस मौके पर पूर्व विधायक तीरथ राज, वरिष्ठ पत्रकार व लेखक विजय शंकर चतुर्वेदी, रामचरित मानस नवाह्न पाठ के महामंत्री शुशील पाठक न.पा.प. पूर्व अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता, रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एवं संस्कृति विभाग के नामित सदस्य दीपक कुमार केसरवानी, ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी, गोपाल स्वरूप पाठक, राजेन्द्र प्रसाद, बृजेश शुक्ला, आशीष पाठक, आनन्द शंकर दुबे, अजित सिंह, धीरज पाण्डेय, नीतीश चतुर्वेदी, श्याम राय, समेत नगर गणमान्य नागरिक व भारी संख्या में सुधि श्रोता मौजूद थे।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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