भगवती सीता की खोज में हनुमान जी पहुंचे लंका

HIGHLIGHTS

  • महिलाओं ने किया सुन्दर काण्ड का पाठ
  • मानस ‌पंडाल में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब
  • श्री राम दरबार की सजाई गई भव्य झांकी मानस
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

राबर्ट्सगंज, सोनभद्र। नगर के आटीएस क्लब मैदान में चल रहे श्री राम चरित मानस नवाह पाठ महायज्ञ के सातवे दिन श्री राम दरबार का भव्य श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात मंचासीन आचार्यों एवं भक्तों गणों ने दिव्य आरती उतारी तत्पश्चात परम पूज्य व्यास जी महाराज ने भूदेवो के साथ मानस पाठ प्रारंभ कराया। वही मध्यांतर के बाद श्री सूर्य लाल मिस्र के आचार्यत्व में सुंदर काण्ड महिला मंडल ग्रूप की विद्यावती देवी, शीला जैन राधा थर्ड, सैल पाठक, माधुरी शुक्ला, नीलम सिंघल, सुमन गुप्ता, सुनीता गुप्ता, प्रतिभा देवी सहित अन्य भक्तजनों ने मंच पर बैठकर सुंदरकांड का सास्वर पाठ किया।

बता दें कि सातवें दिन की कथा सुंदरकांड पर आधारित थी जिसमें हनुमानजी का लंका को प्रस्थान, सुरसा मान जी के बल बुद्धि की परीक्षा,छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वर्णन, लेकिनी पर प्रहार, लंका में प्रवेश हनुमान विभीषण संवाद, हनुमान जी का अशोक वाटिका में सीता को देखकर दुखी होना और रावण का सीता को भय दिखाना, सीता – हनुमान संवाद, हनुमान, जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस अक्षय कुमार का वध और मेघनाथ हनुमान जी को नागपाश में बांध कर सभा में ले जाना, हनुमान रावण संवाद, लंका दहन आदि प्रसंगों का पाठ किया गया।

दोहे पर प्रकाश डालते हुए मुख्य व्यास आचार्य सूर्य लाल मिश्र ने कहा कि- गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में सुंदरकांड एक महत्वपूर्ण कांड है। हनुमान रावण संवाद, लंका दहन आदि महत्वपूर्ण दोहो पर प्रकाश डालते हुए कहा की- गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री  रामचरितमानस में सुंदरकांड एक महत्वपूर्ण कांड हैं जहां पर सभी राम भक्तों की आस्था और विश्वास की झलक उनके कृत्यो से मिलती है, जिसमें राम भक्त हनुमान का प्रमुख स्थान है। जामवंत के कहने पर हनुमानजी को उन्हें अपना बल याद आया और वे हृदय में श्री रघुनाथ जी को धारण कर हर्षित होकर लंका की ओर प्रस्थान किए। श्री हनुमान जी की बुद्धि बल की परीक्षा लेने के लिए देवताओं ने सुरसा नामक सर्पों की माता को भेजा सुरसा की परीक्षा में सफल रहे। और उसने आशीर्वाद देते हुए कहा

Advertisement (विज्ञापन)

राम काजु सबु करहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
आशीष देई गई सो हरसी चले वह हनुमान।।
सुरसा के आशीर्वाद से हर्षित होकर हनुमानजी लंका की और प्रस्थान किये और लंका में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हुए वे माता का दर्शन कर उनसे उनका संदेश चूड्रामण लेकर समुद्र पार करके वापस आ गए।
वही इसके एक दिन पूर्व रात्रि प्रवचन के प्रथम सत्र में गोरखपुर से पधारे हेमंत तिवारी ने भरत द्वारा राम जी को अयोध्या वापस लाने के हर्ट को प्रकाशित करते हुए बताया कि दो प्रेमियों के बीच निर्णय कोई दे नहीं रहा है मुख्य वशिष्ठ वह साथ ही परिवार समाज की कोई भी सदस्य निर्णय  देने में असमर्थ है। तब राजा जनक ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि भरत क्या आपने कभी अपने प्रेमी रामजी की इच्छा पूछी कि वह क्या चाहते हैं तब भारत ने राम जी की आज्ञा से सिर पर खड़ा हूं रखकर अयोध्या में 14 वर्ष तक राज्य का संचालन किया।

Advertisement (विज्ञापन)

कथा के द्वितीय सत्र में जमानिया जौनपुर से आए पंडित अखिलेश चंद्र उपाध्याय ने दोहे का वर्णन करते हुए कहा कि सुपनखा रावण के बहिनी। दुष्ट ह्रदय दारुण दुख अहिनी ।। अर्थात बताया कि सुपुर नखा रावण की बहन थी। अर्थात सुपनखा रावण की बहन थी तथा दुष्ट हृदय की सर्वोपणी थी।
कथा के तृतीय सत्र मे जौनपुर से पधारे श्री प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने सीता हरण की कथा तथा जटायु मरण की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कहा कि गिद्धौर सिद्ध के बीच की लड़ाई में गिद्ध ने हरि का रूप प्राप्त किया लेकिन भगवान की स्तुति किया।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष सतपाल जैन महामंत्री सुशील पाठक, कमला पांडे, शिव सांवरिया, अजीत जायसवाल मिठाई लाल सोनी, शिशु तिवारी, संगम गुप्ता, दीपक कुमार केसरवानी, महेश दुबे, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
बता दें कि समिति के मीडिया प्रभारी हर्षवर्धन केसरवानी द्वारा पूरे इस नवाह पाठ महायज्ञ का  मानस पाठ के फेसबुक पेज पर लाइव चलाया जा रहा है। जिसे लाखों लोग देख रहे हैं।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

Sanskriti Live is a news website. Where you can read news related to religion, literature, art, culture, environment, economic, social, business, technology, crime, agriculture etc. Our aim is to provide you with correct and accurate information. This news website is operated by Sanskriti Live News Network (OPC) Pvt. Ltd. If you want to join us, you can contact us on 7007390035 or info@sanskritilive.in.

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें