भागवत कथा एक ऐसा अमृत है जिसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है – देवी विष्णु प्रिया

HIGHLIGHTS

  • भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद चरित्र का हुआ वर्णन
  • ध्रुव चरित्र की सजाई गई भव्य झांकी
  • भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने किया कथा का श्रवण
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। नगर स्थित आर्य समाज मंदिर में सौरभ कुमार भारद्वाज के नेतृत्व में चल रहे सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को प्रवचन कर्ता देवी विष्णु प्रिया जी ने अजामिल उपाख्यान ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र, व हिरणकश्यप बध तथा नरसिंह अवतार के कथा का व्याख्यान करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का केंद्र है आनंद।

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आनंद की तल्लीनता में पाप का स्पर्श भी नहीं हो पाता। भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हिरणकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया, तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए व कहा कि मांगों जो मांगना है। यह सुनकर हिरनयाक्ष ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्माजी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा-प्रभु मुझे केवल यही वर चाहिए कि मैं न दिन में मरूं, न रात को, न अंदर, न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही मैं पानी में डूबकर मरूं, सदैव जीवित रहूं। उन्होंने उसे वरदान दिया। हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे।

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हिरणकश्यप भागवत विष्णु को शत्रु मानते थे। उन्होंने अपने पुत्र को मारने के लिए तलवार उठाया था कि खंभा फट गया उस खंभे में से विष्णु भगवान नरसिंह का रूप धारण करके जिसका मुख शेर का व धड़ मनुष्य का था। प्रगट हुए भगवान नरसिंह अत्याचारी दैत्य हिरनयाक्ष को पकड़ कर उदर चीर कर बध किया। वहीं तीसरे दिन के कथा के अनुसार कोटा राजस्थान से पधारे ज्ञानेशानंद द्वारा ध्रुव चरित्र की भव्य झांकी सजाई गई जिसमें भगवान नरसिंह के वेश में शिवांगी पांडे, लक्ष्मी देवी बनी शिवांगी पांडे, हिरणाकश्यप आयुष पांडे तथा भक्त प्रहलाद के वेश में सजी श्रेया केसरी ने वहां उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया। तीसरे दिन की कथा का समापन मुख्य यजमान रतनलाल गर्ग और उनकी धर्मपत्नी अनारकली देवी की व्यासपीठ और श्रीमद् भागवत कथा पुराण की पूजन आरती के साथ किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से अजीत रावत, धर्मवीर तिवारी, नरेंद्र गर्ग, कृष्ण कुमार, विनोद, वीरेंद्र गोयल, सुमन केशरी, नितेश, राधेश्याम अग्रवाल, संतोष, सिट्टू, निशा, उषा अग्रवाल, नीतू सहित भारी संख्या में उपस्थित भक्तों ने कथा का श्रवण किया।

संस्कृति LIVE द्वारा प्रकाशित

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