सोनभद्र (मिर्जापुर) में सिख धर्म की स्थापना किया था गुरु तेग बहादुर साहिब

HIGHLIGHTS

  • सन 1666 ईस्वी में गुरु नानक देव के मिशन के प्रचार प्रसार के लिए आए थे
  • प्रयागराज त्रिवेणी संगम से शुरू किया था विंध्य क्षेत्र की यात्रा
हर्षवर्धन केसरवानी
(जिला संवाददाता)

सोनभद्र। सिख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर सिंह साहिब सिख धर्म के प्रथम गुरु नानक देव साहिब के धर्म के सत्य- ज्ञान के प्रचार- प्रसार एवं लोक कल्याणकारी कार्य के लिए सोनभद्र जनपद के पूर्वर्ती जिला मिर्जापुर मे आए थे।
इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार-“सन 1666 (45 वर्ष की अवस्था) गुरुजी ने कश्मीरी पंडितों एवं हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनाने पर मुस्लिम शासक औरंगजेब का विरोध किया और पंजाब के आनंदपुर से किरतपुर, रोपड़, सैफाबाद, खंडल, दमदमा साहब पहुंचे और यहां से यमुना के किनारे होते हुए उत्तर प्रदेश के कड़ामानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर बनारस पटना (बिहार) आसाम आदि जगह पर गए जहां उन्होंने आध्यात्मिक सामाजिक आर्थिक उन्नयन आदि के कई रचनात्मक कार्य किए। सोनभद्र जनपद के मिर्जापुर जिला के चुनार, भूईली, अहरौरा, आदि नगरों में उनका पदार्पण हुआ था और इस क्षेत्र के लोगों ने गुरुजी से प्रभावित होकर सिख धर्म को अपनाया था।

पटवा समाज के संत निहाल सिंह द्वारा अकाली संगत (गुरु तेग बहादुर सिंह जी) का गुरुद्वारा की स्थापना की गई। मान्यता यह है कि गुरु तेग बहादुर सिंह इस स्थल पर आए थे और अपने हाथों से वृक्ष रोपित किया था।
अहरौरा नगर के निवासी एवं वनस्थली महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य सिद्धनाथ गुप्ता ने अपनी कृति नानक गुरु गोविंद सिंह लिखते हैं कि-“धन धन से समृद्ध व्यापारिक नगर अहरौरा में निवास करने वाले केसरवानी, अग्रहरी, पटवा, हलवाई समाज के लोगों ने सिख धर्म को अपनाकर अपने अपने समाज की गुरुद्वारा स्थापित किया। प्रत्येक पर्व, सिख धर्म के गुरु जयंती और शहीदी दिवस पर विविध प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन सिख समाज द्वारा किया जाता है।”

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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी वाराणसी के सुभाष चंद्र यादव के अनुसार-“गुरु तेग बहादुर सिंह विंध्य क्षेत्र से काशी की ओर प्रस्थान किया और काशी के नीची बाग निवासी कल्याण सिंह जी के यहां प्रतिदिन संगत, प्रवचन, कड़ा प्रसाद वितरण आदि का कार्यक्रम होता था और दूर-दूर से लोग इसमें शामिल हुआ करते थे। गुरु तेग बहादुर सिंह यहां पर 7 महीना 13 दिन तक निवास किया और काशी से प्रस्थान करते समय उन्होंने अपना एक मलमली चोला एवं चरण पादुका छोड़ कर गए। गुरु जी की यह निशानी आज गुरुद्वारे में रखी हुई है और श्रद्धालु दूर-दूर से आकर इसका दर्शन कर निहाल होते हैं।
भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समन्वय समिति के संस्थापक सरदार दिलावर सिंह उत्तर प्रदेश शासन से यह मांग किया कि संगत द्वारा निर्मित गुरुद्वारा को तत्काल संरक्षित किया जाए और सिखों के धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
उत्तर भारत पर सिख धर्म की स्थापना एवं प्रचार- प्रसार सिख धर्म के नौवे गुरु तेग बहादुर सिंह साहिब द्वारा किया गया।

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