रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के नामित सदस्य /इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी इनकी पत्नी वरिष्ठ साहित्यकार एवं आदिवासी लोककला केंद्र उत्तर प्रदेश की सचिव/साहित्यकार प्रतिभा देवी ने 1 नवंबर 2014 को बीएचयू वाराणसी के मानव विज्ञान संस्थान में देहदान एवं आरएम नेत्र बैंक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बनारस शाखा को नेत्रदान कर दिया है। प्रस्तुत है महादान कर चुके आदर्श दंपत्ति का साक्षात्कार-

(जिला संवाददाता)
साक्षात्कार-
हमने बचपन में महर्षि दधीची की कहानी है जरुर पड़ी होगी। जिन्होंने देवताओं की असुरों से रक्षा के लिए अपने तप के बल पर प्राण त्याग दिया और अपनी अस्थियां देवताओं को बज्र बनाने के लिए दान दे दिया था। इसी बज्र से देवताओं ने दानवो पर विजय प्राप्त की। यह प्राचीन अंगदान की कहानी आज के वर्तमान वैज्ञानिक युग में सार्थक है ।
27 नवंबर को भारतीय अंगदान दिवस मनाया जाता है इस अवसर पर जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज के निवासी रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के नामित सदस्य /इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी इनकी पत्नी वरिष्ठ साहित्यकार एवं आदिवासी लोककला केंद्र उत्तर प्रदेश की सचिव/साहित्यकार प्रतिभा देवी ने 1 नवंबर 2014 को बीएचयू वाराणसी के मानव विज्ञान संस्थान में देहदान एवं आरएम नेत्र बैंक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बनारस शाखा को नेत्रदान कर दिया है। प्रस्तुत है महादान कर चुके आदर्श दंपत्ति का साक्षात्कार-

आज 27 नवंबर है और इस दिवस को भारतीय अंगदान दिवस के रूप में मनाया जाता है इस बारे में आपका क्या कहना है?
-आपने सही कहा बड़े गौरव की बात है कि भारत सरकार अंगदान के प्रोत्साहन के लिए एक तिथि निश्चित किया है, इसके लिए सरकार बधाई के पात्र हैं।
आप द्वारा पत्नी सहित अंगदान एवं नेत्रदान किया है इसके बारे में बताएं?
-मैंने बीएचयू के मानव विज्ञान संस्थान से प्राप्त संकल्प पत्र को मैं और मेरी पत्नी प्रतिभा देवी ने भरकर हस्ताक्षर युक्त संकल्प पत्र संबंधित संस्थान में 1 नवंबर 2014 को शपथ पत्र के साथ जमा कर दिया। मेरा अंगदान पंजीकरण संख्या -1 प्रतिभा देवी का पंजीकरण संख्या- 2 है।
साथ ही साथ उसी दिन आरएम नेत्र बैंक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बनारस शाखा को नेत्रदान किया। मेरा नेत्रदान पंजीकरण संख्या 1168 एवं प्रतिभा देवी का नेत्रदान पंजीकरण संख्या 1169 है।
केंद्र सरकार अंगदनियों को सुविधाएं प्रदान करने जा रही है इस संबंध में आपका क्या विचार है?
-मेरे लगातार पत्र व्यवहार से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा संचालित राष्ट्रीय अंग उत्तक प्रत्यारोपण संस्थान (नोटों) द्वारा अंगदान देने वाले महादानियों को प्रतिवर्ष 27 नवंबर (भारतीय अंगदान दिवस) पर सम्मानित करने, उनके परिजनों को निशुल्क रेल यात्रा, स्वास्थ्य बीमा की सुविधाएं प्रदान करने की घोषणा की गई है लेकिन अभी तक इस घोषणा को अमल में लाया जाना बाकी है।

अंगदानदानियो एवं नेत्रदानियों को क्या- क्या सुविधाएं सरकार की ओर से मिलनी चाहिए?
-कोई भी व्यक्ति अंगदान अथवा नेत्रदान किसी लालच अथवा सरकारी सुविधा प्राप्त करने की मंशा से नहीं करता, यह स्वदान हैं, स्वस्थ, मन- मस्तिष्क से व्यक्ति इस महादान का संकल्प लेता है। लेकिन अंगदान और नेत्रदान देने वाले महादानियों को सरकार की ओर से सुविधाएं प्राप्त होंगी। तो निश्चित रूप से अन्य लोगों के लिए इस महादान के प्रति प्रेरणा प्राप्त होंगी। हमारा देश गांवो का देश है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की यहां बाढ़ है। गांवो मैं निवास करने वाले गरीब तबके के लोग अपने परिजनों का दाह संस्कार ज्यादातर स्थानीय स्तर पर ही कर देते हैं, ऐसे में दान देने वाला व्यक्ति अगर संकल्प पर पत्र भरा भी है तो सुविधाओं एवं जानकारी के अभाव में उसकी दान देने की मनसा अधूरी रह जाती है क्योंकि जिला स्तर, तहसील स्तर पर इस संकल्प पत्र को भरे जाने की उपलब्ध नहीं है। इसलिए
सरकार को यह चाहिए कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कार्यालय में अंगदान एवं नेत्रदान संकल्प पत्र भरने एवं अंग दानियों को निकट के मानव विज्ञान संस्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था निशुल्क रूप से करनी चाहिए। इससे अंगदान, नेत्रदान महादान को प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकेंगे। अंगदान एवं नेत्रदान के संबंध में व्यापक प्रचार- प्रसार होना चाहिए ताकि लोग निडर होकर महादान कर सकें।
अंगदान की प्रेरणा आपको कैसे मिली?
-बचपन में हमने अपनी पाठ्य पुस्तक हमारे पूर्वज में महर्षि दाधीची की कहानी
बाल पत्रिका पराग में एक कहानी पढा था, जिसका शीर्षक था “एक मुर्दा16 जिंदा” इस कहानी मैं एक युवती की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है और उसके मृत शरीर के अंगों को 16 व्यक्तियों में प्रत्यारोपित कर चिकित्सकों द्वारा जीवनदान दिया जाता है। बचपन में पढ़ी गई यह दोनों प्रेरणादायक कहानियां मुझे अंगदान के लिए प्रेरित किया।






