HIGHLIGHTS
- राजराजेश्वर श्री सहस्त्रार्जुन रत्न से सम्मानित हुए कई समाजसेवी
- वायस ऑफ़ जयसवाल परिवार ने किया संगोष्ठी का आयोजन
- वक्ताओं ने डॉक्टर काशी प्रसाद जायसवाल के व्यक्तित्व कृतित्व पर डाला प्रकाश

(जिला संवाददाता)
सोनभद्र। वॉयस ऑफ जायसवाल परिवार के द्वारा रविवार को भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार, पुरातत्व के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के विद्वान् एवं हिन्दी साहित्यकार डॉ काशी प्रसाद जायसवाल जी की 142 वीं जयंती के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें वहां उपस्थित वक्ताओं ने साहित्यकार के व्यक्तित्व कृतित्व प्रकाश डालते हुए उनकी उपलब्धियों को बताया। इस अवसर पर संगोष्ठी के बतौर मुख्य अतिथि रहे जय प्रकाश गुप्ता एडवोकेट ने काशी प्रसाद जयसवाल जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

वही संस्था के अध्यक्ष संदीप जायसवाल ने डॉ काशी प्रसाद जायसवाल जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने प्राचीन भारतीय संस्कृति की खोज की, काल निर्णय, सिक्कों के अध्ययन एवं शिला लेखों के संबंधों में प्रामाणिक रूप से प्रकाश डाला। सन् 1915 में भारतीय इतिहास के शोध, अन्वेषण एवं अनुसंधान के लिए जायसवाल जी ने ‘बिहार उड़ीसा रिसर्च सोसाइटी’ की न्यू डाली, जो आगे चलकर ‘डा.काशी प्रसाद जायसवाल रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के नाम से प्रसिद्ध हुई और आज भी उसके माध्यम से बहुत से शोध कार्य होते रहते हैं।

वॉयस ऑफ जायसवाल के द्वारा जय प्रकाश गुप्ता एडवोकेट, इंजीनियर रमेश चन्द्र जायसवाल एवं मरणोपरांत जुगल किशोर जायसवाल के पुत्र डॉ सुमन जायसवाल को राजराजेश्वर श्री सहस्त्रार्जुन रत्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मनोज जायसवाल, रमेश जायसवाल, आनन्द प्रताप जायसवाल, रूपेश जायसवाल, अंश जायसवाल, डिम्पल जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।






